बिशप जॉनसन गर्ल्स हाई स्कूल विवाद : करोड़ों रुपए के गबन के आरोप में कोर्ट ने दिया जांच करने का आदेश
न्यायालय ने कहा कि आवेदक द्वारा अपने प्रार्थना पत्र के सम्बन्ध में फोटो प्रतियां दाखिल की गईं हैं। जिसमें साढ़े चार करोड़ रुपये गबन का आरोप लगाया गया है। प्रार्थना पत्र में अंकित तथ्यों के सम्बन्ध में जांच कराया जाना न्यायिक रूप से आवश्यक है।
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जिला न्यायालय ने विशप जॉनसन गर्ल्स हाईस्कूल मिशन रोड कचहरी में साढ़े चार करोड़ रुपये के गबन के आरोप के मामले में पुलिस कमिश्नर प्रयागराज को किसी राजपत्रित पुलिस अधिकारी से जांच करने और जांच आख्या न्यायालय के समक्ष 11 दिसंबर तक पेश करने का आदेश दिया है। विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ. लकी ने डायोसिस ऑफ लखनऊ के पूर्व सचिव रेव. प्रवीण मेसी के द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के अंतर्गत प्रस्तुत अर्जी पर अधिवक्ता अंबिकेश्वर मिश्र के तर्कों को सुनकर दिया।
न्यायालय ने कहा कि आवेदक द्वारा अपने प्रार्थना पत्र के सम्बन्ध में फोटो प्रतियां दाखिल की गईं हैं। जिसमें साढ़े चार करोड़ रुपये गबन का आरोप लगाया गया है। प्रार्थना पत्र में अंकित तथ्यों के सम्बन्ध में जांच कराया जाना न्यायिक रूप से आवश्यक है।
दाखिल अर्जी में यह आरोप लगाया गया है कि पीटर बलदेव एवं उनकी पुत्री पारूल सोलोमन एवं अन्य अज्ञात ने मिलकर एक सोची समझी कपटपूर्ण चाल के तहत कूट रचना एवं जालसाजी के द्वारा संस्था डायसेसियन एजूकेशन बोर्ड ऑफ दि डायसिस ऑफ लखनऊ का चेयरमैन एवं कमेटी ऑफ मैनेजमेंट का फर्जी तरीके से पदाधिकारी बनकर तीनों लोगों को चयनकर्ता बनाकर जबरन पीटर बलदेव ने अपनी ही पुत्री पारूल सोलोमन जो कि इस साजिश मे बराबर की हकदार थीं।
उन्हें बिशप जॉनसन गर्ल्स कॉलेज का प्रधानाचार्य नियम विरूद्ध तरीके से नियुक्त करा दिया, जबकि ऐसा करने का अधिकार पीटर बलदेव के पास था ही नहीं। पारूल सोलोमन संचालित दूसरे विद्यालय बिशप जॉनसन मैन विंग सिविल लाइन्स में अध्यापिका थी बिशप जॉनसन गर्ल्स स्कूल से इनका कोई लेना देना नहीं था। प्रधानाचार्य की नियुक्ति के लिए नियमानुसार विज्ञापन साक्षात्कार आयोजित करके किया जाना चाहिए था।
जालसाजी के द्वारा कूट रचित दस्तावेज तैयार करके मनगढ़ंत तरीके से अपनी पुत्री को लाभ पहुंचाने तथा विद्यालय पर कब्जा करने की बदनियती से पीटर बलदेव एवं पारूल सोलोमन ने जबरन गुंडई के बल पर नियुक्ति कराकर लगातार अनुचित लाभ प्राप्त कर रही है। विद्यालय में पढ़ रहे छात्रों की फीस काउन्टर पर नगद लेकर विद्यालय के खाते मे जमा नहीं की जा रही है।