बाइक शेयरिंग : सेहत की स्मार्ट योजना बीमार,कहीं स्टैंड मिट्टी में जमींदोज, कहीं खानाबदोशों का डेरा
अमर उजाला की पड़ताल में कई जगह साइकिलें नदारद मिलीं। सीएमपी डिग्री कॉलेज गेट। दिन में करीब साढ़े तीन बजे। बाइक शेयरिंग स्टैंड तो है एक भी साइकिल नहीं मिली। वहीं पर मौजूद रूपेश ने बताया कि यह स्थिति कई दिनों से है।
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सेहत की स्मार्ट योजना बीमार पड़ गई है। पांच करोड़ रुपये के करार वाली इस पब्लिक बाइक शेयरिंग योजना के स्टैंड तक अब कहीं मिट्टी में दब गए हैं तो कहीं खानाबदोश वहां चूल्हे जला रहे हैं। अमर उजाला की पड़ताल में कई जगह साइकिलें नदारद मिलीं। सीएमपी डिग्री कॉलेज गेट। दिन में करीब साढ़े तीन बजे। बाइक शेयरिंग स्टैंड तो है एक भी साइकिल नहीं मिली। वहीं पर मौजूद रूपेश ने बताया कि यह स्थिति कई दिनों से है।
कलेक्ट्रेट के पास स्टैंड है। बाइक शेयरिंग योजना की तीन साइकिलें वहां मिलीं, लेकिन खराब हालत में। वहां पूरे स्टैंड पर कब्जा भी हो गया है। इसी तरह स्वरूपरानी अस्पताल के सामने बने बाइक शेयरिंग स्टैंड पर एक भी साइकिल नहीं थी। उल्टे स्टैंड तथा आसपास के क्षेत्र पर कब्जा हो गया है। वहां रहने वाले स्टैंड पर कपड़ा आदि फैलाते हैं।
बाइक शेयरिंग योजना की बदहाली के ऐसे तीन नहीं 30 से अधिक उदाहरण मिल जाएंगे। ज्यादातर स्थानों पर यही स्थिति हो गई है। शहरियों के अच्छे स्वास्थ्य के मकसद से शुरू स्मार्ट सिटी की बाइक शेयरिंग योजना दो साल में ही इस कदर बीमार पड़ जाएगी, शायद किसी ने सोचा नहीं था। ज्यादातर स्टैंड से साइकिलें ही नदारद हैं। जहां हैं भी तो खराब हालत में हैं।
इतना ही नहीं कई जगहों पर स्टैंड भी ध्वस्त हो गए हैं। वहां गदंगी के साथ कब्जा भी हो गया है। एसआरएन अस्पताल के सामने स्टैंड पर तो खानाबदोशों का डेरा बन गया है। वहां साइकिलों की जगह चूल्हे जल रहे हैं। इसी तरह तेलियरगंज पावर हाउस के पास स्टैंड तो मिट्टी में दबा ही है, कई साइकिलें भी टूटकर बर्बाद हो गई हैं।
लोगों को साइकिल चलाने की आदत डालने के लिए स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत तीन साल पहले बाइक शेयरिंग योजना शुरू की गई। इस पर कुल चार करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके तहत 75 स्टेशन बनाए गए हैं, जहां से साइकिलें ली और जमा की जा सकती हैं। इसका किराया भी बहुत कम रखा गया है। आधा घंटा तक तो मुफ्त में साइकिल चलाई जा सकती है। शहरियों के स्वास्थ्य के साथ पर्यावरण के लिहाज से भी इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस योजना को लेकर लोगों में खासा उत्साह भी है। बच्चे से लेकर बुजुर्गों तक में इसका क्रेज है। दूर-दराज से पढ़ाई के लिए आए युवाओं के लिए तो यह योजना काफी फायदेमंद साबित हुई, लेकिन यह सुविधा ही बेपटरी हो गई है। चौफटका स्थित स्टैंड उखड़ गया है। सिविल लाइंस जीएचएस, सलोरी में कई जगहों पर स्टैंड बदहाल हो गए हैं। सलोरी में तो साइकिलें खराब हो गई हैं।
150 साइकिलें अभी स्टोर में
बाइक शेयरिंग योजना के तहत 750 साइकिलें मंगाई गई हैं, लेकिन इनमें से 600 का ही उपयोग किया जा रहा है। 150 साइकिलें अब भी स्टैंड में नहीं पहुंची हैं। स्टोर में ही पड़ी हैं।
सभी साइकिलें हैं। गायब नहीं हुई हैं। इतना जरूर हुआ है कि कई स्टैंड पर जरूरत से ज्यादा साइकिलें पहुंच गई हैं। वहीं कई प्रमुख स्थानों पर साइकिल नहीं बची है। इसका सर्वे कराया जा रहा है। ज्यादा जरूरत वाले स्टैंड पर साइकिलें शिफ्ट भी की जा रही हैं। कई जगहों पर स्टैंड के साथ फर्स उखड़ गई है। इसकी रिपोर्ट भी तैयार की जा रही है। उनके मरम्म्त की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साइकिलें भी ठीक कराई जा रही हैं। जल्द इसमें अपेक्षित सुधार दिखेगा। इसके अलावा शेष 150 साइकिलें भी जल्द स्टैंड में लगाई जाएंगी और लोग उनका उपयोग कर सकेंगे। - संजय रथ, मिशन मैनेजर-स्मार्ट सिटी