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भारती भवन : अतिक्रमण की गिरफ्त में महामना की ज्ञान संपदा, द्वार पर सब्जी-ठेले वालों का डेरा

Fri, 22 Mar 2024 01:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 22 Mar 2024 01:03 PM IST
सार

नियमित 70-80 प्रतियोगी छात्र और पुस्तक प्रेमियों की भीड़ रहती है, लेकिन सबसे बड़ा संकट है इस पुस्तकालय के रास्तों पर अतिक्रमण कर लिया जाना। बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम जब इस पुस्तकालय पर पहुंची, तब मुख्य प्रवेश द्वार पर सब्जी की दुकानों के अलावा ठेले वालों का कब्जा रहा।

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Bharti Bhawan: Mahamana's knowledge wealth in the grip of encroachment, vegetable vendors camp at the gate
भारती भवन के सामने अतिक्रमण। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिस शहर में पूरब का आक्सफोर्ड बसता हो,जहां सड़कों की पटरियां सौंदर्य प्रसाधन की वस्तुओं से नहीं पुस्तकों से सजती हों, वहां ज्ञान-संपदा की दुर्दशा जान कर आप सिर थाम लेंगे। प्रयागराज के सबसे समृद्ध भारती भवन पुस्तकालय में जहां 62 हजार से अधिक पुस्तकों और 12सौ से अधिक पांडुलिपियों का संग्रह है, वहां तक पहुंचना दुश्वार हो गया है।

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वजह है इस पुस्तकालय के द्वारों पर सब्जी-ठेले वालों का कब्जा जमा लेना। इस पर भी मजाल क्या कि कोई इन्हें रास्ता खाली करने के लिए टोक दे। विवाद और मारपीट की नौबत आने की वजह से लोग बोलने तक की हिम्मत नहीं जुटा पाते। भारती भवन पुस्तकालय ज्ञान संपदा की अनमोल थाती को संजोए हुए है। डिजिटलाइजेशन के दौर में जब दुनिया दूसरी मिट्टी पर शिफ्ट हो रही है, तब भी इस पुस्तकालय से 1017 लोग सीधे तौर पर जुड़े हैं।
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नियमित 70-80 प्रतियोगी छात्र और पुस्तक प्रेमियों की भीड़ रहती है, लेकिन सबसे बड़ा संकट है इस पुस्तकालय के रास्तों पर अतिक्रमण कर लिया जाना। बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम जब इस पुस्तकालय पर पहुंची, तब मुख्य प्रवेश द्वार पर सब्जी की दुकानों के अलावा ठेले वालों का कब्जा रहा। पीछे के रास्ते से भी पुस्तकालय में प्रवेश करना मुश्किल था। इसलिए कि वहां भी दो पहिया वाहनों की पार्किंग कर ली गई थी।

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Bharti Bhawan: Mahamana's knowledge wealth in the grip of encroachment, vegetable vendors camp at the gate
भारती भवन के सामने अतिक्रमण। - फोटो : अमर उजाला

लाइब्रेरियन स्वतंत्र पांडेय बताते हैं कि पुस्तकालय केे द्वार पर अतिक्रमण की समस्या वर्षों पुरानी है। कई बार नगर निगम और कोतवाली पुलिस से शिकायत की गई, लेकिन रास्ता खाली नहीं कराया जा सका। मना करने पर विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है।

अतीत के पन्नों को पलटा जाए तो यहां गौरवशाली इतिहास छिपा है। महामना मदन मोहन मालवीय, राजश्री पुरुषोत्तम दास टंडन, डॉ. कैलाश नाथ काटजू, केशव देव मालवीय जैसे देशभक्त भारती भवन पुस्तकालय के अध्यक्ष रहे।

इस पुस्तकालय की स्थापना 1889 में लाला ब्रजमोहन लाल भल्ला ने की थी। 1902 में लाला बृजमोहन ने अपने बड़े पुत्र लाला भवानी प्रसाद और छोटे पुत्र लाला राजाराम के सहयोग से पुस्तकालय के लिए भवन और भूमि दान में दी। इसके साथ ही उन्होंने पुस्तकालय का प्रबंधन और संचालन करने के लिए एक ट्रस्ट भी गठित किया। पुस्तकालय की प्रथम कार्यकारिणी में महामना मदन मोहन मालवीय, पं. बालकृष्ण भट्ट, पं. श्रीधर पाठक, लाला लाल बिहारी, पं. रामनाथ मिश्र, डॉ. जय कृष्ण व्यास, पं. जय गोविंद मालवीय, लाला बृजमोहन लाल, लाला दुर्गा प्रसाद, पं. देविका नंदन तिवारी, लाला कालिका प्रसाद जैसे लोग थे।

इस बगिया को सींचने में महीयशी महादेवी वर्मा, महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुमित्रानंदन पंत, डॉ. हरिवंश राय बच्चन, सतीश चंद्र देव, विश्वंभर नाथ पांडेय और पं. ब्रजमोहन व्यास का विशेष योगदान रहा है। पुस्तकालय की मंत्री मुक्ति व्यास बताती हैं कि शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में केंद्र सरकार की तरफ से पुस्तकालय के राष्ट्रीय महत्व को ध्यान में रखते हुए विशेष डाक टिकट भी जारी किया जा चुका है।

स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र बिंदु बनी पुस्तकें यहीं से प्रकाशित हुई थीं। इस पुस्तकालय में 62 हजार किताबें, 12 सौ पांडुलिपिया हैं जो चार सौ वर्ष पूर्व से शुरू होती हैं। इतना ही नहीं 1750 से अब तक के पंचांगों का भी संग्रह यहां मौजूद हैं।


पुस्तकालय के द्वारों पर लंबे समय से अतिक्रमण कर लिया गया है। आम दिनों में भी सुबह होने के बाद वहां जाना मुश्किल हो जाता है। सब्जी, ठेले वाले मुख्य प्रवेश द्वार घेर कर अपनी दुकानें लगा लेते हैं और बोलने पर विवाद होने लगता है। प्रशासन का सहयोग न मिलने से दिक्कत बनी हुई है। - मुक्ति व्यास, मंत्री- भारती भवन पुस्तकालय।

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