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Prayagraj : किसानों व ट्रेड यूनियनों के भारत बंद का नहीं दिखा कोई खास असर, कई संगठनों ने निकाला मार्च
Fri, 16 Feb 2024 04:31 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 16 Feb 2024 04:31 PM IST
सार
ट्रेड यूनियन व किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को सुबह रोडवेज कार्यालय से जुलूस निकाला। पैदल मार्च करते हुए यह जुलूस पत्थर गिरजाघर स्थित धरना स्थल पर पहुंचकर समाप्त हुआ। यहां पर सभा आयोजित कर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा किया।
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भारत बंद।
- फोटो : amar ujala
विस्तार
अखिल भारतीय संयुक्त ट्रेड यूनियन और संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर भारत बंद का असर जिले में कुछ खास नहीं रहा। विभिन्न संगठनों की ओर से सुबह जुलूस निकाला गया था। एक दिन पहले ही बंदी को सफल बनाने क़े लिए रणनीति तैयार की गई थी और पर्चे भी वितरित किए गए थे।
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ट्रेड यूनियन व किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को सुबह रोडवेज कार्यालय से जुलूस निकाला। पैदल मार्च करते हुए यह जुलूस पत्थर गिरजाघर स्थित धरना स्थल पर पहुंचकर समाप्त हुआ। यहां पर सभा आयोजित कर केंद्र और राज्य सरकार पर निशाना साधा किया। किसान यूनियनों ने कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं का निदान करने में असफल साबित हो रही है।
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इस मौके पर पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह, वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता हरिश्चंद्र द्विवेदी, एटक के प्रदेश उपाध्यक्ष नसीम अंसारी, जिला मंत्री शीतला प्रसाद विश्वकर्मा, एआईयूटीयूसी के जिला मंत्री नंदलाल गुप्ता, विजलपाल सिंह, अखिल भारतीय किसान मजदूर महासभा के घनश्याम मौर्य, सीटू के जिला अध्यक्ष विकास स्वरूप, सीओसी के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चंद्र पांडेय, ब्रदरहुड के ऋषिस्वर उपाध्याय, अधिवक्ता मंच के संयोजक राजवेंद्र सिंह, मुस्तकीम अंसारी, रेलवे पेंशनर्स एसोसिएशन के राजेश कुमार यादव समेत विभिन्न संगठन के लोग मौजूद रहे।
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ये हैं प्रमुख मांगें
मंहगाई, बेरोजगारी, न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह किए जाने, ठेका मजदूरी की समाप्ति, पुरानी पेंशन की बहाली, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों में निजीकरण पर रोक, स्कीम कर्मचारियों को पूर्ण कालिक रोजगार, मलिन बस्ती व झोपड़ी पर कार्रवाई बंद किए जाने, किसानों को एमएसपी की कानूनी गारंटी, बिजली संशोधन कानून-2022 की वापसी, चार श्रम संहिताओं की वापसी, ऑनलाइन मार्केटिंग को बंद कर जीएसटी को सुगम बनाने, रेहड़ी-ठेला दुकानदारों के लिए विशेष कानून और हिट एंड रन कानून को वापिस लेना आदि।