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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Bhaiyyaji Joshi said: Tibet should be independent, atrocities on minorities should stop in Bangladesh and Paki

भैय्याजी जोशी बोले : तिब्बत स्वतंत्र हो, बांग्लादेश व पाकिस्तान में बंद हो अल्पसंख्यकों पर अत्याचार

Wed, 05 Feb 2025 10:08 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज)
अमर उजाला नेटवर्क, महाकुंभ नगर (प्रयागराज) Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 05 Feb 2025 10:08 PM IST
सार

त्रिवेणी के तट पर बौद्ध और सनातन धर्म के महासंगम में देश को नया संदेश दिया। बौद्ध संस्कृति संगम में तीन प्रस्ताव पास किए गए। इसमें बांग्लादेश और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बंद करने, तिब्बत की स्वायत्तत और तीसरा प्रस्ताव सनातन व बौद्ध धर्म की एकता के लिए पास किया गया।

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Bhaiyyaji Joshi said: Tibet should be independent, atrocities on minorities should stop in Bangladesh and Paki
कार्यक्रम में मौजूद भैयाजी जोशी और स्वामी अवधेशानंद। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

त्रिवेणी के तट पर बौद्ध और सनातन धर्म के महासंगम में देश को नया संदेश दिया। बौद्ध संस्कृति संगम में तीन प्रस्ताव पास किए गए। इसमें बांग्लादेश और पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बंद करने, तिब्बत की स्वायत्तत और तीसरा प्रस्ताव सनातन व बौद्ध धर्म की एकता के लिए पास किया गया। बुद्धं शरणं गच्छामि,धम्मं शरणं गच्छामि,संघम् शरणम गच्छामि के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए बुधवार को बौद्ध भिक्षुओं ने शोभायात्रा निकाली।

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बुधवार को सेक्टर 17 से निकली बौद्ध संस्कृति संगम यात्रा का समापना जूना अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि के प्रभु प्रेमी शिविर में हुआ। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह भैयाजी जोशी ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ से संगम समागम व समन्वय का संदेश पूरी दुनिया में जाना चाहिए। जो भी यहां आता है वह संगम जाकर स्नान की इच्छा रखता है। यहां गंगा जमुना व सरस्वती मिल जाती हैं तो भेद दिखाई नहीं देता।
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संगम का संदेश है कि यहां से आगे एक धारा चलेगी। देश के विविध प्रकार के मत मतांतर के सभी श्रेष्ठ संत यहां आकर आपस में मिलकर संवाद व चर्चा करते हैं। संत एक साथ आएंगे तो सामान्य लोग भी एक साथ मिलकर चलने चाहिए। तीसरा शब्द है वह है समन्वय। विश्व में चलना है तो सबको साथ लेकर चलना। भैय्याजी जोशी ने कहा कि विश्व को संचालित वहीं करेंगे जो सबको साथ लेकर चलने की ताकत रखता हो। यह शक्ति भारत के पास है।

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महाकुंभ में एक बार आएं सब प्रकार की भ्रांतियां समाप्त होंगी। बाबा साहब आंबेडकर ने हमें संविधान दिया, उस संविधान की पहली पंक्ति है हम भारत के लोग। बौद्ध भिक्षुओं का यह कार्यक्रम उज्ज्वल भविष्य का संकेत देने वाला है। निर्वासित तिब्बत सरकार की रक्षामंत्री गैरी डोलमाहम ने कहा कि सब लोगों के लिए ऐतिहासिक आयोजन है। यह पावन धरती पर बहुत कुछ पहली बार हो रहा है। इतिहास रचा जा रहा है।

सनातन व बौद्ध धर्म के बीच जो होना चाहिए जिस तरह का प्रेम भावना और नजदीकी होनी चाहिए उसकी तरफ बहुत बड़ा कदम इस पावन धरती पर लिया गया है। इस पावन धरती पर संघ के मार्गदर्शन में हम सब एक साथ हैं। एक तरफ भिक्षु एक तरफ लामा देखकर आनंद की अनुभूति हुई। महाकुंभ में हम बौद्ध व सनातनी एक साथ आए हैं और कदम मिलाकर चल रहे हैं।

कुंभ से सनातन व बौद्धमत के समन्वय की धारा को ले जाएंगे आगे

म्यांमार से आये भदंत नाग वंशा ने कहा कि मैं पहली बार महाकुंभ में आया हूं। बौद्ध व सनातन में बहुत ही समानता है। हम लोग विश्व शांति के लिए काम करते हैं। हम भारत और यहां के लोगों को खुश देखना चाहते हैं। भारत सरकार बौद्ध धर्म का काम करने में सहयोग करती है। हम लोग मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री का आभार जताते हैं। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के भदंत शील रतन ने कहा कि हम सब एक थे एक हैं एक रहेंगे। जो सनातन मार्ग पर चलता है। जो कुशल कर्मों को करता है वह कभी दुखी नहीं रहता।

भारत कभी विचलित नहीं होता। भारत फिर से अखंड होगा और जगद्गुरू भारत बनेगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य इंद्रेश कुमार ने कहा कि वह दिन आएगा जब स्वप्न साकार होगा। सनातन ही बुद्ध है। बुद्ध ही शाश्वत व सत्य हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था भारत के पास युद्ध नहीं बुद्ध है। हम एक रहेंगे तो एक नया भारत व एक नया विश्व जो युद्धमुक्त,छुआछूत मुक्त और गरीबी मुक्त होगा। कुंभ से सनातन व बौद्धमत के समन्वय की धारा को आगे ले जाकर काम करेंगे।

भगवान बुद्ध की करुणा हो,सम्राट अशोक अमर रहें से गूंजा महाकुंभ

महाकुंभ में दुनिया के कई देशों से आए बौद्ध भिक्षुओं ने शोभायात्रा निकाली। भगवान बुद्ध की करूणा हो, सम्राट अशोक अमर रहें के नारे से मेला क्षेत्र गूंजता रहा। शोभायात्रा के माध्यम से बौद्ध भिक्षुओं ने संदेश दिया कि बौद्ध व सनातनी एक थे, एक हैं और एक रहेंगे। शोभायात्रा में बौद्ध भिक्षु,भंते व लामा शामिल रहे। नेपाल, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका, तिब्बत, जापान, कोरिया, कंबोडिया, लाओस व वियतनाम समेत कई देशों के बौद्ध भिक्षु शामिल रहे।

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