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छोटे अपराधों में कार्रवाई से पूर्व व्यक्ति की स्वतंत्रता व सामाजिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए पुलिस: हाईकोर्ट

Mon, 19 Jul 2021 08:27 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 19 Jul 2021 08:27 PM IST
सार

  • सात साल से कम सजा वाले अपराधों में न की जाए रूटीन गिरफ्तारी

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Before taking action in petty crimes, the police should maintain a balance between the freedom of the individual and the social system: High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सात वर्ष की सजा तक के व छोटी घटनाओं में कार्रवाई करने से पूर्व व्यक्तिगत स्वतंत्रता व सामाजिक व्यवस्था के बीच में संतुलन बनाने की कोशिश करें। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की नजीरों का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस को ऐसे मामलों में गिरफ्तारी के रूटीन तरीके नहीं अपनाने चाहिए। कोर्ट ने यह आदेश नोएडा में तैनात एक  ट्रैफिक पुलिस के सिपाही की अर्जी को आंशिक रूप से मंजूर करते हुए दिया है।
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जस्टिस डॉ. केजे ठाकर ने कांसटेबिल वीरेन्द्र कुमार यादव की धारा 482 दंप्रसं के तहत दाखिल अर्जी निस्तारित करते हुए निर्देश दिया है कि याची के साथ किसी भी प्रकार की बलपूर्वक कार्रवाई न की जाए। याची का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि याची की नोएडा में वीवीआईपी ड्यूटी थी। उसने अपने ड्यूटी के स्थान पर सही ड्यूटी की।
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बाद में पता चला कि एक ही समय में उसकी दो जगह ड्यूटी लगा दी गई थी। याची पर आरोप लगाया गया कि दो जगह ड्यूटी लगाने को लेकर हेड कांसटेबिल (शिकायत कर्ता) के साथ याची ने मारपीट की। इस घटना को लेकर याची के खिलाफ थाना- सेक्टर 20 नोएडा में 2018 में आईपीसी की धारा 332,323,504 व 506 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज हुआ। अधिवक्ता का कहना था कि कि याची की इसमें कोई गलती नहीं थी।
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पुलिस ने याची के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। जिसे पूर्व में चुनौती दी गई थी। परंतु कोर्ट ने इसे यह कहकर खारिज कर दिया था कि याची कोर्ट में उचित समय पर डिस्चार्ज अर्जी दे और कोर्ट उस पर सकारण आदेश पारित करेगी। याची ने हाईकोर्ट में दुबारा याचिका दाखिल कर निचली अदालत द्वारा डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर देने के आदेश को चुनौती दी थी। कहा गया था कि याची सरकारी नौकरी में है और यदि वह गिरफ्तार कर लिया गया तो उसे अपूरणीय क्षति होगी। कहा गया था कि उस पर लगी सभी धाराएं सात वर्ष से कम के सजा की हैं।
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