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Prayagraj News: महाकुंभ के पहले विभूूति, नौचंदी और कालिंदी एक्सप्रेस को मिलेगा एलएचबी रेक
Mon, 29 Jul 2024 05:33 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Mon, 29 Jul 2024 05:33 AM IST
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वर्षों पुरानी बोगियों के सहारे दौड़ रहीं प्रयागराज रामबाग-हावड़ा विभूति एक्सप्रेस, प्रयागराज संगम-सहारनपुर नौचंदी एक्सप्रेस, प्रयागराज-भिवानी जंक्शन कालिंदी एक्सप्रेस ट्रेन का रेलवे ने कायाकल्प करने की तैयारी की है। इन ट्रेनों में पुराने आईसीएफ कोच की जगह नई लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) बोगियां लगाई जाएंगी। बताया जा रहा है कि दिसंबर माह में यह तीनों ट्रेनें एलएचबी रेक से लैस हो जाएंगी।
हावड़ा जाने वाली विभूति एक्सप्रेस पूर्व रेलवे, नौचंदी एक्सप्रेस उत्तर रेलवे एवं कालिंदी एक्सप्रेस उत्तर मध्य रेलवे द्वारा संचालित की जाती है। यह तीनों ही ट्रेनें पुराने आईसीएफ कोच के सहारे चल रही हैं। इन ट्रेनों में लगे कुछ कोच ऐसे हैं जो 20 वर्ष पुराने हैं। पुराने कोचे होने की वजह से इन्हें अधिकतम 110 किमी की रफ्तार से ही चलाया जा सकता है।
इसी वजह से रेलवे प्रशासन ने इन तीनों ट्रेनों को एलएचबी रेक से लैस करने की तैयारी की है। एलएचबी कोच लगने के बाद जहां इन ट्रेनों की अधिकतम स्पीड बढ़ जाएगी तो वहीं दूसरी ओर बर्थ की संख्या में भी इजाफा हो जाएगा। कालिंदी एक्सप्रेस की बात करें तो इसमें पिछले वर्ष ही एलएचबी रेक लग जाना था लेकिन अब दिसंबर 2024 के पूर्व रेलवे इस ट्रेन में एलएचबी रेक लगा देगा। इसी तरह विभूति और नौचंदी एक्सप्रेस में भी एलएचबी रेक महाकुंभ के पूर्व लगाए जाने की तैयारी है।
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एलएचबी रेक की खूबियां
एलएचबी रेक वाली ट्रेनें 160 से 180 किमी की रफ्तार से दौड़ सकती हैं। यह कोच आईसीएफ कोच के मुकाबले हल्के होते हैं। एलएचबी कोच की लंबाई 23.54 मीटर एवं आईसीएफ कोच की लंबाई 21.77 मीटर होती है। आईसीएफ के मुकाबले एलएचबी कोच की खिड़कियां बड़ी और चौड़ी होती हैं। एलएचबी कोच 60 डेसिबल तक की आवाज करते हैं। इससे एसी कोच में कम आवाज रहती है जबकि आईसीएफ 100 डेसिबल तक की आवाज करते हैं। एलएचबी कोच की कपलिंग सीबीसी टाइप यानी सेंटर बफर कपलर वाली होती है यानी हादसे के वक्त यह कोच एक दूसरे के ऊपर चढ़ते नहीं हैं। वहीं, आईसीएफ कोच दुर्घटना के समय कपलिंग टूटने की वजह से एक दूसरे के ऊपर चढ़ने के साथ एक दूसरे में घुस जाते है। इससे जान-माल की क्षति ज्यादा होती है। लंबाई ज्यादा होने की वजह से एलएचबी कोच में बर्थ ज्यादा रहती हैं।
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हावड़ा जाने वाली विभूति एक्सप्रेस पूर्व रेलवे, नौचंदी एक्सप्रेस उत्तर रेलवे एवं कालिंदी एक्सप्रेस उत्तर मध्य रेलवे द्वारा संचालित की जाती है। यह तीनों ही ट्रेनें पुराने आईसीएफ कोच के सहारे चल रही हैं। इन ट्रेनों में लगे कुछ कोच ऐसे हैं जो 20 वर्ष पुराने हैं। पुराने कोचे होने की वजह से इन्हें अधिकतम 110 किमी की रफ्तार से ही चलाया जा सकता है।
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इसी वजह से रेलवे प्रशासन ने इन तीनों ट्रेनों को एलएचबी रेक से लैस करने की तैयारी की है। एलएचबी कोच लगने के बाद जहां इन ट्रेनों की अधिकतम स्पीड बढ़ जाएगी तो वहीं दूसरी ओर बर्थ की संख्या में भी इजाफा हो जाएगा। कालिंदी एक्सप्रेस की बात करें तो इसमें पिछले वर्ष ही एलएचबी रेक लग जाना था लेकिन अब दिसंबर 2024 के पूर्व रेलवे इस ट्रेन में एलएचबी रेक लगा देगा। इसी तरह विभूति और नौचंदी एक्सप्रेस में भी एलएचबी रेक महाकुंभ के पूर्व लगाए जाने की तैयारी है।
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एलएचबी रेक की खूबियां
एलएचबी रेक वाली ट्रेनें 160 से 180 किमी की रफ्तार से दौड़ सकती हैं। यह कोच आईसीएफ कोच के मुकाबले हल्के होते हैं। एलएचबी कोच की लंबाई 23.54 मीटर एवं आईसीएफ कोच की लंबाई 21.77 मीटर होती है। आईसीएफ के मुकाबले एलएचबी कोच की खिड़कियां बड़ी और चौड़ी होती हैं। एलएचबी कोच 60 डेसिबल तक की आवाज करते हैं। इससे एसी कोच में कम आवाज रहती है जबकि आईसीएफ 100 डेसिबल तक की आवाज करते हैं। एलएचबी कोच की कपलिंग सीबीसी टाइप यानी सेंटर बफर कपलर वाली होती है यानी हादसे के वक्त यह कोच एक दूसरे के ऊपर चढ़ते नहीं हैं। वहीं, आईसीएफ कोच दुर्घटना के समय कपलिंग टूटने की वजह से एक दूसरे के ऊपर चढ़ने के साथ एक दूसरे में घुस जाते है। इससे जान-माल की क्षति ज्यादा होती है। लंबाई ज्यादा होने की वजह से एलएचबी कोच में बर्थ ज्यादा रहती हैं।