High Court : सात अधिवक्ताओं की जिला अदालत में प्रवेश पर लगी रोक हटी, तीन के खिलाफ प्रतिबंध जारी
यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति डाॅ. गौतम चौधरी की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान आपराधिक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। जिला अदालत इलाहाबाद की सिविल जज की ओर से दी गई रिपोर्ट मंगलवार की अदालत ने पेश की गई।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला अदालत में वादकारी दंपती से मारपीट और सिविल जज से दुर्व्यवहार के आरोपी सात अधिवक्ताओं के जिला अदालत में प्रवेश पर आग रोक हटा ली है। जबकि, मुख्य आरोपी रणविजय सिंह व मोहम्मद आसिफ पर रोक बरकरार रहेगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति डाॅ. गौतम चौधरी की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान आपराधिक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। जिला अदालत इलाहाबाद की सिविल जज की ओर से दी गई रिपोर्ट मंगलवार की अदालत ने पेश की गई। इसमें कहा गया कि शिकायतकर्ता सिविल जज केवल केवल मुख्य आरोपी रणविजय सिंह व मोहम्मद आसिफ को ही नाम से पहचानती है।
जबकि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जिला जज ने मुख्य आरोपी रणविजय व आसिफ के अलावा दस अन्य अधिवक्ताओं की पहचान करते रिपोर्ट भेजी थी। इसके आधार पर सभी आरोपी अधिवक्ताओं के प्रदेश के किसी भी जिला अदालत में प्रवेश व प्रैक्टिस पर रोक लगा दी गई थी। इसमें हाइकोर्ट के दो अधिवक्ता रितेश श्रीवास्तव, संजीव कुमार सिंह समेत महताब अहमद, सईद अफताब, आदर्श शुक्ला, विकास सिंह, ऋषभ सिंह, सत्यवान सिंह, आदर्श उर्फ अंशु व रवि सोनकर का नाम शामिल था।
मंगलवार को अदालत में पेश रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने महताब अहमद, सईद अफताब, आदर्श शुक्ला, विकास सिंह, ऋषभ सिंह, सत्यवान सिंह, आदर्श उर्फ अंशु के जिला अदालत में प्रवेश व प्रैक्टिस पर लगी रोक का आदेश निलंबित कर दिया है। इससे पहले कोर्ट ने हाइकोर्ट के अधिवक्ता रितेश श्रीवास्तव, संजीव सिंह और रवि सोनकर पर लगी रोक हटाई थी। अब मामले की सुनवाई 19 नवंबर को होगी।