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High Court : बीएचयू के अस्पताल की निविदा में फर्जीवाड़े के आरोपी नोबल स्टार के निदेशकों की गिरफ्तारी पर रोक

Thu, 19 Jun 2025 11:12 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 19 Jun 2025 11:12 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सर सुंदरलाल चिकित्सालय में सरकारी निविदा में फर्जीवाड़ा करने के आरोपी नोबल स्टार हेल्थ सर्विसेज प्रा.लि. के निदेशकों डॉ.उदयभान सिंह और रजनी सिंह की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।

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Ban on arrest of Noble Star directors accused of fraud in BHU hospital tender
अदालत का आदेश - फोटो : istock

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सर सुंदरलाल चिकित्सालय में सरकारी निविदा में फर्जीवाड़ा करने के आरोपी नोबल स्टार हेल्थ सर्विसेज प्रा.लि. के निदेशकों डॉ.उदयभान सिंह और रजनी सिंह की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। साथ ही विवेचना 90 दिन में पूरी करने का आदेश दिया है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की खंडपीठ ने दिया है। मामला वाराणसी के लंका थाना क्षेत्र का है। बीएचयू के एसएसएल चिकित्सालय में पीपीपी मोड पर एमआरआई और सिटी स्कैन सेवाएं संचालित करने की सरकारी निविदा में फर्जीवाड़ा करने के संबंध में बीएचयू चिकित्सा संस्थान के निदेशक प्रो.डॉ. एसएन संखवार ने एफआईआर दर्ज कराई थी। याचियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और जाली दस्तावेज लगाकर निविदा में भागीदारी की।

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निदेशक प्रो.संखवार ने अपनी शिकायत में कहा है कि उक्त कंपनी ने कानपुर के कैंसर अल्ट्रासाउंड एंड इमेजिंग सेंटर, गोरखपुर के जायसवाल इमेजिंग क्लिनिक प्रा. लि. के नाम से झूठे अनुबंध व अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किए, जो जांच में फर्जी पाए गए। इतना ही नहीं, जाली हस्ताक्षरों से बने रेडियोलॉजिस्ट से जुड़े एग्रीमेंट भी निविदा में लगाए थे।

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बीएचयू की नौ सदस्यीय तकनीकी समिति ने 26 दिसंबर 2024, 10 फरवरी 2025 को दोनों अनुभव प्रमाणपत्रों-अनुबंधों को फर्जी और कूटरचित घोषित किया था। जांच के दौरान ईमेल से पुष्टि की गई कि डॉ.राजीव जायसवाल की कंपनी का नोबल हेल्थ सर्विसेज से कोई वैधानिक अनुबंध नहीं था और जो प्रमाणपत्र दिए गए, वे केवल प्रशस्ति पत्र थे। इसके बावजूद आरोपियों ने इन्हें अनुभव प्रमाणपत्र बताकर सरकारी संस्था को गुमराह किया। इस मामले में याचियों ने एफआईआर रद्द करने व गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग के साथ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए दोनों की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। 

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