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यूपी: हिरासत में मौत मामले में चार पुलिसकर्मियों की जमानत खारिज, हाईकोर्ट ने बताया शक्तियों का दुरुपयोग

Sat, 03 Oct 2026 06:45 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 03 Oct 2026 06:45 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर के चर्चित कृष्ण कुमार यादव उर्फ पुजारी की फरवरी 2021 में हुई पुलिस कस्टडी में मौत के मामले में आरोपी चार पुलिसकर्मियों को जमानत देने से इनकार कर दिया है।

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Bail rejected for four policemen in custody death case; High Court terms it an abuse of power.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जौनपुर के चर्चित कृष्ण कुमार यादव उर्फ पुजारी की फरवरी 2021 में हुई पुलिस कस्टडी में मौत के मामले में आरोपी चार पुलिसकर्मियों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने जयशील तिवारी, रामकृत यादव, राजकुमार वर्मा और अंगद प्रसाद चौधरी की जमानत अर्जियां खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला स्वाभाविक मौत का नहीं, बल्कि हिरासत में यातना और पुलिस शक्तियों के दुरुपयोग से जुड़ा गंभीर मामला है।

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अदालत ने 95 पन्नों के आदेश में सीबीआई की जांच और आरोप पत्र में सामने आए तथ्यों का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि सभी आरोपी पुलिस बल के सदस्य हैं, जिस पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा का दायित्व है। इसके बावजूद यदि पुलिस शक्तियों का दुरुपयोग कर हिरासत में किसी व्यक्ति की जान जाती है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
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मामला बक्शा थाना क्षेत्र का है। 11 फरवरी 2021 को पुलिसकर्मी कृष्ण कुमार यादव को उसके घर से हिरासत में लेकर गए थे। परिजनों के अनुसार देर रात उसे गंभीर हालत में घर लाया गया था। अगले दिन उसकी पुलिस हिरासत में मौत की सूचना दी गई। शुरुआती जांच में मौत का कारण दिल का दौरा बताया गया था, जबकि परिजनों ने पुलिस पर मारपीट और हिरासत में हत्या का आरोप लगाया था।

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सितंबर 2021 में हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। सीबीआई ने एम्स, नई दिल्ली के मेडिकल बोर्ड से भी चिकित्सकीय राय ली। बोर्ड की समीक्षा में शरीर पर कई गंभीर और मृत्यु पूर्व लगी चोटें सामने आने की बात कही गई। सीबीआई ने 22 फरवरी 2022 को 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। विशेष सीबीआई अदालत ने सितंबर 2024 में आरोप तय कर सुनवाई शुरू की।

हाईकोर्ट ने जयशील तिवारी के मामले में उसके पूर्व में फरार रहने को भी जमानत के खिलाफ महत्वपूर्ण तथ्य माना। वहीं रामकृत यादव और राजकुमार वर्मा की दूसरी जमानत अर्जियों में कोई नया आधार नहीं पाया गया। कोर्ट ने कहा कि केवल मुकदमे में लगने वाला समय या सह-आरोपी के आधार पर समानता का दावा जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि अनावश्यक स्थगन दिए बिना मुकदमे की सुनवाई में तेजी लाई जाए।

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