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UP : बेटी से दुष्कर्म के आरोपी को दी जमानत, हाईकोर्ट ने कहा-आजीविका के अधिकार को नहीं छीना जा सकता
Wed, 07 Jan 2026 02:06 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 07 Jan 2026 02:06 PM IST
सार
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ व न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा प्रथम की खंडपीठ ने दिया है। फर्रुखाबाद के फतेहगुढ़ थाने में अपीलकर्ता की पत्नी ने जनवरी 2020 में दुष्कर्म और पॉक्सो मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म के मामले में सजा काट रहे एक सरकारी कर्मचारी को अपील लंबित रहने के दौरान सजा निलंबित करते हुए सशर्त जमानत दे दी है। साथ ही कहा कि अपीलकर्ता एक सरकारी कर्मचारी (लेखपाल) है। ऐसे में केवल इस मामले में संलिप्तता के चलते उसके गुजारे के लिए कमाने के अधिकार को नहीं छीना जा सकता।
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यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ व न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा प्रथम की खंडपीठ ने दिया है। फर्रुखाबाद के फतेहगुढ़ थाने में अपीलकर्ता की पत्नी ने जनवरी 2020 में दुष्कर्म और पॉक्सो मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोप लगाया था कि पति ने 16 वर्षीय बेटी का यौन शोषण किया। ट्रायल कोर्ट ने मामले में उसे दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की।
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वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि 2003 से अपीलकर्ता और पत्नी अलग रह रहे थे। उनके बीच गुजारा भत्ता और तलाक के कई मुकदमे लंबित थे। पत्नी मायके में रहती थी, इसलिए उसका अपनी बेटी तक पहुंचना संभव नहीं था। पत्नी ने बेटी को पिता के खिलाफ झूठी गवाही देने के लिए सिखाया-पढ़ाया था। मेडिकल जांच में पीड़िता के शरीर पर कोई बाहरी या आंतरिक चोट नहीं पाई गई। अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट भी सामान्य थी।
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खंडपीठ ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि प्रतिदिन सैकड़ों अपीलें सूचीबद्ध होती हैं। ऐसे में इस मामले की जल्द सुनवाई की संभावना कम है। इसके साथ ही कोर्ट ने कई निर्देश व शर्तों के साथ जमानत दे दी।