फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Bail granted to accused of harassing daughter, High Court says right to livelihood cannot be taken away

High Court : भगोड़ा घोषित किए जाने के बाद भी परिस्थितियों पर विचार कर दे सकते हैं अग्रिम जमानत

Wed, 07 Jan 2026 03:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 07 Jan 2026 03:15 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी अभियुक्त को भगोड़ा घोषित कर दिया गया है और उसकी संपत्ति की नीलामी की जा चुकी है तो भी तथ्यों-परिस्थितियों पर विचार करते हुए अग्रिम जमानत दी जा सकती है।

विज्ञापन
Bail granted to accused of harassing daughter, High Court says right to livelihood cannot be taken away
अदालत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी अभियुक्त को भगोड़ा घोषित कर दिया गया है और उसकी संपत्ति की नीलामी की जा चुकी है तो भी तथ्यों-परिस्थितियों पर विचार करते हुए अग्रिम जमानत दी जा सकती है। इसी टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति डॉ.गौतम चौधरी की पीठ ने नर्स की अग्रिम जमानत अर्जी स्वीकार कर ली।

विज्ञापन


बिजनौर निवासी याची मोनिका एक अस्पताल में नर्स के रूप में कार्यरत थी। किरतपुर थाने में याची पर 2023 में अजन्मे शिशु की मृत्यु के मामले में मेडिकल काउंसिल एक्ट की धाराओं, धोखाधड़ी सहित विभिन्न आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया था। उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दायर की।
विज्ञापन


प्रतिवादी अधिवक्ता ने जमानत का विरोध करते हुए दलील दी कि याची के खिलाफ पहले ही गैर-जमानती वारंट जारी किया जा चुका है। उसे भगोड़ा घोषित कर कुर्की की कार्रवाई की जा चुकी है। इसलिए उसे जमानत नहीं मिलनी चाहिए। वहीं, याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि जब गैर जमानती वारंट जारी किया गया तो वह उस समय गर्भवती थी। उसने छह अक्तूबर 2025 को एक बच्चे को जन्म दिया। इस वजह से वह अदालत में पेश होने में असमर्थ थी। उसने अपने वकील के माध्यम से व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए आवेदन भी दिए थे, जिसे निचली अदालत ने नजरअंदाज कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद आशा दुबे बनाम मध्य प्रदेश राज्य के मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया। कहा कि धारा-82 की उद्घोषणा होने का मतलब यह नहीं है कि अग्रिम जमानत पर पूर्ण रोक लग गई है। अदालत को मामले की परिस्थितियों और उद्घोषणा जारी होने के पीछे के कारणों को देखना चाहिए। कोर्ट ने याची की गर्भावस्था और हाल ही में प्रसव को ध्यान में रखते हुए उसे 50,000 रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड और दो प्रतिभूतियों पर ट्रायल पूरा होने तक सशर्त अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed