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प्रयागराज में बाहुबलियों को नहीं मिला सियासी ठिकाना
Mon, 22 Apr 2019 01:07 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 22 Apr 2019 01:07 AM IST
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अतीक अहमद
- फोटो : self
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जुर्म की दुनिया से निकलकर सियासत में धमक दिखाने वाले कई बाहुबली नेताओं को इस लोकसभा चुनाव में सियासी ठिकाना नहीं मिला है। पूर्व सांसद अतीक अहमद के साथ एक मामले में कई वर्षों से जेल में बंद करवरिया बंधु (पूर्व सांसद कपिलमुनि करवरिया, पूर्व विधायक उदयभान करवरिया) का रसूख कुछ ऐसा ही है। तीनों नेता बड़ी पार्टियों के शीर्ष नेताओं के कृपापात्र माने जाते हैं, लेकिन इस बार ये चुनाव के मैदान से दूर हैं।
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वोटरों में तगड़ी पैठ के बावजूद राजनीतिक दलों ने उन्हें टिकट ही नहीं दिया। जबकि चर्चा में उनके नाम तैरते रहे हैं। अतीक अहमद ने वर्ष 1989 में पहला विधानसभा चुनाव शहर पश्चिमी से लड़ा। वह चुनाव जीते और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 1991 और 1993 का निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते। 1996 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट से अतीक फिर विधायक चुने गए। इस बीच उनकी माफिया छवि में और गहरी हो गई। वर्ष 2004 में फूलपुर से सांसद भी चुने गए लेकिन बाहुबली और माफिया की छवि से उबर नहीं पाए। उनके कारनामे हमेशा उन्हें सुर्खियों में रखा।
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अतीक अहमद पर हत्या, अपहरण जैसे संगीन मामलों समेत चार दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। इस लोकसभा चुनाव से कई दलों से उन्हें प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा रही, लेकिन सपा ने उनकी तरफ देखा तक नहीं। 25 जनवरी 2005 में विधायक राजू पाल की हत्या के बाद अतीक का सियासी ट्रैक गड़बड़ा गया। अब बरेली जेल में बंद अतीक निर्दल प्रत्याशी बनने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
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फूलपुर से वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव जीतने वाले कपिलमुनि करवरिया बसपा से अलग हो चुके हैं। सियासत की दूसरी पारी अभी नहीं शुरू की है। वहीं उनके छोटे भाई उदयभान करवरिया बारा विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक चुने गए। वोटरों में उनकी पैठ उनकी सियासी पूंजी है, लेकिन भाई कपिल के साथ फिलहाल उदयभान भी पूर्व विधायक जवाहर पंडित हत्याकांड में जेल के भीतर हैं। भाजपा नेता उदयभान की पार्टी के शीर्ष नेताओं तक पहुंच है। पिछले लोकसभा चुनाव से ही दोनों भाइयों के चुनाव लड़ने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा लेकिन जेल में बंद होना सियासत की राह में रोड़ा बन गया। पुलिस उन्हें भी बाहुबली नेता मानती है।
पड़ोसी जनपद भदोही से कांग्रेस प्रत्याशी रमाकांत यादव का प्रदेश के बाहुबली नेताओं ने शुमार है। भाजपा ने उनसे किनारा काटा तो उन्होंने कांग्रेस का दामन पकड़कर टिकट भी हासिल कर लिया। यहां उनका सामना अप्रत्यक्ष रूप से विधायक विजय मिश्रा से होगा। विजय मिश्र की धमक भदोही ही नहीं प्रयागराज के कई इलाकों में है। रमाकांत यादव के चुनावी क्षेत्र में प्रयागराज की दो विधानसभा क्षेत्र हंडिया और प्रतापपुर शामिल हैं। दोनों क्षेत्रों के दिग्गज नेता अपने-अपने दलों के प्रत्याशी की नैय्या पार लगाने को बाहुबली रमाकांत की सियासी काट में उनके आपराधिक रिकार्ड को प्रचारित कर रहे हैं।
पति की विरासत नहीं संभाल पाईं पूजा पाल
25 जनवरी 2005 को शहर पश्चिमी विधायक राजू पाल की दिनदहाड़े हुई हत्या के मामले में पूर्व सांसद अतीक अहमद और उनके भाई खालिद अजीम अशरफ को आरोपी बनाया गया। बाहुबलि नेताओं के क्षेत्र में पूर्व विधायक राजू पाल की पत्नी पूजा पाल ने बसपा के टिकट पर दो बार विजय पताका फहराई लेकिन पिछले चुनाव में वह पति की विरासत नहीं संभाल पाईं।