प्रयागराज : अविश्वास पर चर्चा से पहले ही बहरिया के ब्लाक प्रमुख ने दिया इस्तीफा
योगेश का परिवार भाजपा से लंबे समय से जुड़ा रहा है। भाई कुलदीप पांडेय बहरिया के ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं। हालांकि, कुलदीप ने निर्दलीय चुनाव जीता था। पिछले चुनाव में कुलदीप के भाई योगेश पांडेय ने भाजपा के समर्थन से दावेदारी की मांग की लेकिन पार्टी ने कुछ समय पहले ही भाजपा में आए शशांक मिश्रा को प्रत्याशी बनाया।
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बहरिया में ब्लॉक प्रमुखी लेकर भाजपा नेताओं के बीच तलवार खींच गई है। अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा से पहले ही योगेश पांडेय ने ब्लॉक प्रमुख पद से इस्तीफा दे दिया, जिसे स्वीकार भी कर लिया गया। हालांकि, दोबारा चुनाव में उन्होंने पूरे दमखम से दावेदारी की बात कही है।
योगेश का परिवार भाजपा से लंबे समय से जुड़ा रहा है। भाई कुलदीप पांडेय बहरिया के ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं। हालांकि, कुलदीप ने निर्दलीय चुनाव जीता था। पिछले चुनाव में कुलदीप के भाई योगेश पांडेय ने भाजपा के समर्थन से दावेदारी की मांग की लेकिन पार्टी ने कुछ समय पहले ही भाजपा में आए शशांक मिश्रा को प्रत्याशी बनाया। इसके बाद योगेश ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत गए। इसके बाद भाजपा में भी योगेश को स्वीकार कर लिया गया।
इसी दौरान बदलते समीकरण के बीच शशांक ने योगेेश के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया। शशांक भाजपा गंगापार इकाई में पदाधिकारी हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी के स्थानीय नेताओं का उन्हें समर्थन प्राप्त है। इस खींचतान के बीच शुक्रवार को होने वाले अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा से पहले ही शशांक ने इस्तीफा दे दिया। जानकारों का कहना है कि चूंकि अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाता तो वह अगला चुनाव नहीं लड़ पाते। इसलिए उन्होंने यह रास्ता अपनाया।
योगेश का कहना है कि चुनाव में वह पूरी ताकत से उतरेंगे। वहीं बड़े भाई कुलदीप का कहना है कि उनका पूरा परिवार लंबे समय से भाजपा से जुड़ा रहा है। आगे भी वह पार्टी का काम करते रहेंगे। अब पार्टी को निर्णय लेना होगा कि ब्लॉक में क्या होना चाहिए। वहीं शशांक ने योगेश पर कई तरह के आरोप लगाते हुए सदस्यों का समर्थन प्राप्त होने की बात कही। दोनों नेताओं के इस दावेदारी के बीच पार्टी में खेमेबाजी भी शुरू हो गई। यह खेमेबाजी अब सोशल मीडिया पर दिखने भी लगी है।
छह महीने के भीतर होगा चुनाव
बहरिया के ब्लॉक प्रमुख योगेश पांडेय के इस्तीफे के बाद यह पद खाली हो गया है। इस पर छह महीने के भीतर चुनाव कराना होगा। डीपीआरओ आलोक कुमार सिन्हा का कहना है कि पंचायती राज विभाग को रिपोर्ट भेजी जाएगी। चुनाव की तारीख वहीं से घोषित की जाएगी।