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जयकारों के बीच हुआ बाबा का जलाभिषेक
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Baba's ablution in the midst of cheer
- फोटो : ALDCOMPACT
सावन के चौथे और अंतिम सोमवार पर पूजन-अर्चन, अभिषेक के लिए शिवालयों में भोले के भक्त उमड़े। शिवालयों में महारुद्राभिषेक के साथ कई तरह केअन्य अनुष्ठान भी हुए। मंदिरों के अतिरिक्त संगम पर भी महारुद्राभिषेक के सामूहिक अनुष्ठान हुए और सर्वमंगल के लिए प्रार्थना की गई। पर्व पर मंदिरों के साथ ही घरों में भी सामूहिक रूप से भजन-कीर्तन के बीच महिलाओं की टोली ने नृत्य किया।
मुख्य जमावड़ा यमुना किनारे स्थित मनकामेश्वर मंदिर में रहा। यहां प्रभारी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी की ओर से आरती पूजन के बाद दर्शन, अभिषेक आरंभ हुआ। शृंगार के बाद श्रद्धालुओं ने शृंगार का दर्शन किया। जयकारों के बीच महिलाओं और पुरुषों की अलग-अलग लंबी कतारें भोर से ही लगी रहीं। नागवासुकि में पुजारी श्यामधर त्रिपाठी और तक्षकतीर्थ मंदिर में तक्षकतीर्थ पीठाधीश्वर रविशंकर की देखरेख में पूजन-अर्चन के अतिरिक्त महारुद्राभिषेक अनुष्ठान हुए। श्री सर्वेश्वर महादेव मंदिर परिसर में गायत्री प्रयाग पीठाधीश्वर त्रिकाल भवंता के सानिध्य में यात्रिक अनुष्ठान के साथ सर्वमंगल के लिए आहुतियां डाली गईं।
सोमवार को हरिहर गंगा आरती समिति की ओर से रामघाट पर ज्योतिर्लिंग निर्मित पिंडी पर महारुद्राभिषेक किया गया। बैहराना स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री निंबार्क आश्रम में महंत स्वामी राधा माधव दास जी की देखरेेख में रुद्राभिषेक, पूजन के बाद सांगीतिक प्रस्तुतियों में भोले की महिमा बखानी गई। वहीं मठ बाघम्बरी गद्दी में बाघंबरेश्वर महादेव का दुग्धाभिषेक करने के बाद बटुकों की ओर से महाआरती उतारी गई।
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श्रद्धालुओं के अतिरिक्त संगम और दशाश्मवेध घाट से जल भरकर चले कांवड़ियों ने भी शिवालयों में जलाभिषेक किया। अंतिम सोमवार को जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ियों की टोलियां दूर दराज के गांवों के शिवालयों तक भी पहुंचीं।
सांपों से सजे पूर्णेश्वरनाथ
सावन के चौथे सोमवार को पूर्णेश्वरनाथ महादेव मंदिर में अनूठे रूप में शृंगार किया गया। यहां फूलों से इतर पूर्णेश्वरनाथ तरह-तरह के सांपों से सजे। शिवलिंग को घेरे सांपों का दर्शन सभी के लिए कौतूहल वाला रहा।
बर्फ से भी सजे भोलेनाथ
आखिरी सोमवार को आजाद नगर, साउथ मलाका के शिव मंदिर में बर्फ से भोलेनाथ का शृंगार किया गया। वहीं मंदिर को भी फूलों और बिजली की झालरों से सजाया गया।
पूरे जोश में हुई गहरेबाजी
परंपरानुसार चौथे सोमवार को भी सीएमपी डिग्री कॉलेज से लेकर मेडिकल कॉलेज चौराहा तक जोश के साथ गहरेबाजी हुई जिसका सड़क किनारे जुटे लोगों ने जमकर लुत्फ लिया। गहरेबाजों ने हवा से बातें करते अपने कदमबाज घोड़ों की बेहतरीन चाल दिखाई और शहरियों का दिल जीता। प्रयाग गहरेबाजी संघ के अध्यक्ष राजीव भारद्वाज ने गहरेबाजी के दौरान यातायात पर पूर्ण प्रतिबंध न लगाए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण कहा।
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मुख्य जमावड़ा यमुना किनारे स्थित मनकामेश्वर मंदिर में रहा। यहां प्रभारी श्रीधरानंद ब्रह्मचारी की ओर से आरती पूजन के बाद दर्शन, अभिषेक आरंभ हुआ। शृंगार के बाद श्रद्धालुओं ने शृंगार का दर्शन किया। जयकारों के बीच महिलाओं और पुरुषों की अलग-अलग लंबी कतारें भोर से ही लगी रहीं। नागवासुकि में पुजारी श्यामधर त्रिपाठी और तक्षकतीर्थ मंदिर में तक्षकतीर्थ पीठाधीश्वर रविशंकर की देखरेख में पूजन-अर्चन के अतिरिक्त महारुद्राभिषेक अनुष्ठान हुए। श्री सर्वेश्वर महादेव मंदिर परिसर में गायत्री प्रयाग पीठाधीश्वर त्रिकाल भवंता के सानिध्य में यात्रिक अनुष्ठान के साथ सर्वमंगल के लिए आहुतियां डाली गईं।
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सोमवार को हरिहर गंगा आरती समिति की ओर से रामघाट पर ज्योतिर्लिंग निर्मित पिंडी पर महारुद्राभिषेक किया गया। बैहराना स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री निंबार्क आश्रम में महंत स्वामी राधा माधव दास जी की देखरेेख में रुद्राभिषेक, पूजन के बाद सांगीतिक प्रस्तुतियों में भोले की महिमा बखानी गई। वहीं मठ बाघम्बरी गद्दी में बाघंबरेश्वर महादेव का दुग्धाभिषेक करने के बाद बटुकों की ओर से महाआरती उतारी गई।
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श्रद्धालुओं के अतिरिक्त संगम और दशाश्मवेध घाट से जल भरकर चले कांवड़ियों ने भी शिवालयों में जलाभिषेक किया। अंतिम सोमवार को जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ियों की टोलियां दूर दराज के गांवों के शिवालयों तक भी पहुंचीं।
सांपों से सजे पूर्णेश्वरनाथ
सावन के चौथे सोमवार को पूर्णेश्वरनाथ महादेव मंदिर में अनूठे रूप में शृंगार किया गया। यहां फूलों से इतर पूर्णेश्वरनाथ तरह-तरह के सांपों से सजे। शिवलिंग को घेरे सांपों का दर्शन सभी के लिए कौतूहल वाला रहा।
बर्फ से भी सजे भोलेनाथ
आखिरी सोमवार को आजाद नगर, साउथ मलाका के शिव मंदिर में बर्फ से भोलेनाथ का शृंगार किया गया। वहीं मंदिर को भी फूलों और बिजली की झालरों से सजाया गया।
पूरे जोश में हुई गहरेबाजी
परंपरानुसार चौथे सोमवार को भी सीएमपी डिग्री कॉलेज से लेकर मेडिकल कॉलेज चौराहा तक जोश के साथ गहरेबाजी हुई जिसका सड़क किनारे जुटे लोगों ने जमकर लुत्फ लिया। गहरेबाजों ने हवा से बातें करते अपने कदमबाज घोड़ों की बेहतरीन चाल दिखाई और शहरियों का दिल जीता। प्रयाग गहरेबाजी संघ के अध्यक्ष राजीव भारद्वाज ने गहरेबाजी के दौरान यातायात पर पूर्ण प्रतिबंध न लगाए जाने को दुर्भाग्यपूर्ण कहा।

Baba's ablution in the midst of cheer- फोटो : ALDCOMPACT