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आयुर्वेद रोगों से बचाव की उत्कृष्ट विद्या: केशरीनाथ
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Ayurved
- फोटो : CITY DESK
चतुर्थ राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर दीर्घायुष्य विषय पर संगोष्ठी
डॉ. जीएस तोमर ने निरोगी काया को बताए आयुर्वेद के सिद्धांत
प्रयागराज। धनवंतरि जयंती और राष्ट्रीय आयुर्वेंद दिवस पर शुक्रवार को विविध आयोजन हुए। भगवान धनवंतरि के पूजन से शुरू कार्यक्रमों में इस वर्ष की थीम दीर्घायुष्य पर आयुर्वेदाचार्यों ने रोगों से बचाव के बारे में बताया। लोगों को संयमित जीवन जीने का मंत्र दिया गया।
विश्व आयुर्वेद मिशन एवं विश्व आयुर्वेद परिषद के संयुक्त तत्वावधान में सिविल लाइंस के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी रहे। उन्होंने कहाकि आर्यु्वेद मात्र रोगों से मुक्ति का साधन ही नहीं, यह रोगों से बचाव का भी एक उत्कृष्ट उपाय है । यह एक आदर्श जीवनशैली है, जो अनेक गंभीर रोगों के चंगुल से हमें बचा सकती है। उन्होंने बताया कि अर्जुन की छाल की हृदय रोगियों के उपचार में उपयोगिता से आज सारा विश्व परिचित हो चुका है। आयुर्वेद के मूल सिद्धांत आज विज्ञान के लिए भी आश्चर्य का विषय हैं।उन्होंने डॉ. जीएस तोमर की संपादित पुस्तक और रचित संग्रह का विमोचन भी किया।
मिशन के अध्यक्ष डॉ. जीएस तोमर ने अतिथियों का स्वागत किया। विषय परिवर्तन करते हुए उन्होंने कहाकि महर्षियों की जीवेम शरद शत्म की परिकल्पना में भी दीर्घायुष्य का मूल मंत्र छिपा हुआ है। उन्होंने बताया कि चरक संहिता के मुताबिक दिनचर्या, रात्रिचर्या, ऋ तुचर्या, सदवृत्त, आचार रसायन तथा धारणीय-अधारणीय वेगों के सिद्धांत आज भी वैज्ञानिकता से ओतप्रोत हैं ।
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परिषद के अध्यक्ष डॉ सुधांशु उपाध्याय ने धनवंतरि को शल्य संप्रदाय प्रधान बताया। आयुर्वेद परिषद काशी प्रांत के अध्यक्ष डॉ. पीएस पांडेय ने धनवंतरि को आयुर्वेद का प्रवर्तक बताया। अध्यक्षता करते हुए पूर्व प्रचार्य एवं डीन प्रो. सर्वदेव उपाध्याय ने आयुर्वेद को वैदिक काल की समुन्नत चिकित्सा विधा बताया। संचालन डॉ.एमडी दुबे ने किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में आयुर्वेद चिकित्सक मौजूद रहे।
इन्हें मिला सम्मान
धनवंतरि जयंती और आयुर्वेद दिवस पर पूर्व राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने चिकित्सकों को सम्मानित किया। डॉ. जीएस तोमर को लाइफटाइम अचीवमेंट, डॉ. पीएस पांडेय को चिकित्सा श्री अवार्ड, डॉ. एमडी दुबे को वैद्यरत्न अवार्ड, डॉ. विष्णु बली मिश्रा को शल्यविद अवार्ड दिया गया। इसी क्रम में डॉ. एसएस उपाध्याय, डॉ. राकेश कुमार सिंह, डॉ सर्वांश मालवीय, डॉ. रंजना सिंह, डॉ. सत्यप्रकाश गुप्ता, वैद्य राकेश एवं डॉ. अनुपम श्रीवास्तव को एप्रीसिएशन अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस मौके पर में विश्व आयुर्वेद मिशन एवं विश्व आयुर्वेद परिषद ने संयुक्त रूप से डाबर इंडिया के टैरिटरी मैनेजर राजेंद्र कुमार को आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में समर्पित सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।
संयम सिखाता है आयुर्वेद
-डॉ. एसके राय बोले, आयुर्वेद पूर्णतया स्वदेशी इलाज
आयुष मंत्रालय की ओर से हिन्दुस्तानी ऐकेडमी में आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता आयुर्वेदाचार्य डॉ. एसके राय ने दीर्घायुष्य के लिए संयम के साथ दिनचर्या को नियमित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहाकि आयुर्वेद पूर्णतया स्वदेशी इलाज है। आयुर्वेद हमें संयम सिखाता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का प्राथमिक प्रयोजन स्वास्थ्य की रक्षा करना है। इसमें ही महर्षियों की जीवेम शरद शतम शतम की परिकल्पना में भी यही मूल मंत्र छिपा हुआ है ।
मुख्य अतिथि डॉ. सर्वदेव उपाध्याय ने आयुर्वेद को वैदिक काल की चिकित्सा विधा बताई। उन्होंने कहाकि बीच के काल में तमाम व्यवधानों एवं विकृत राजनीतिक परिस्थितियों को मध्यकाल में आयुर्वेद के पराभव का कारण बताया। इस मौके पर बड़ी संख्या में आयुर्वेद, यूनानी विशेषज्ञ मौजूद रहे। संयोजकत्व क्षेत्रीय आयुर्वेद अधिकारी डॉ. शारदा प्रसाद का रहा।
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डॉ. जीएस तोमर ने निरोगी काया को बताए आयुर्वेद के सिद्धांत
प्रयागराज। धनवंतरि जयंती और राष्ट्रीय आयुर्वेंद दिवस पर शुक्रवार को विविध आयोजन हुए। भगवान धनवंतरि के पूजन से शुरू कार्यक्रमों में इस वर्ष की थीम दीर्घायुष्य पर आयुर्वेदाचार्यों ने रोगों से बचाव के बारे में बताया। लोगों को संयमित जीवन जीने का मंत्र दिया गया।
विश्व आयुर्वेद मिशन एवं विश्व आयुर्वेद परिषद के संयुक्त तत्वावधान में सिविल लाइंस के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी रहे। उन्होंने कहाकि आर्यु्वेद मात्र रोगों से मुक्ति का साधन ही नहीं, यह रोगों से बचाव का भी एक उत्कृष्ट उपाय है । यह एक आदर्श जीवनशैली है, जो अनेक गंभीर रोगों के चंगुल से हमें बचा सकती है। उन्होंने बताया कि अर्जुन की छाल की हृदय रोगियों के उपचार में उपयोगिता से आज सारा विश्व परिचित हो चुका है। आयुर्वेद के मूल सिद्धांत आज विज्ञान के लिए भी आश्चर्य का विषय हैं।उन्होंने डॉ. जीएस तोमर की संपादित पुस्तक और रचित संग्रह का विमोचन भी किया।
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मिशन के अध्यक्ष डॉ. जीएस तोमर ने अतिथियों का स्वागत किया। विषय परिवर्तन करते हुए उन्होंने कहाकि महर्षियों की जीवेम शरद शत्म की परिकल्पना में भी दीर्घायुष्य का मूल मंत्र छिपा हुआ है। उन्होंने बताया कि चरक संहिता के मुताबिक दिनचर्या, रात्रिचर्या, ऋ तुचर्या, सदवृत्त, आचार रसायन तथा धारणीय-अधारणीय वेगों के सिद्धांत आज भी वैज्ञानिकता से ओतप्रोत हैं ।
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परिषद के अध्यक्ष डॉ सुधांशु उपाध्याय ने धनवंतरि को शल्य संप्रदाय प्रधान बताया। आयुर्वेद परिषद काशी प्रांत के अध्यक्ष डॉ. पीएस पांडेय ने धनवंतरि को आयुर्वेद का प्रवर्तक बताया। अध्यक्षता करते हुए पूर्व प्रचार्य एवं डीन प्रो. सर्वदेव उपाध्याय ने आयुर्वेद को वैदिक काल की समुन्नत चिकित्सा विधा बताया। संचालन डॉ.एमडी दुबे ने किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में आयुर्वेद चिकित्सक मौजूद रहे।
इन्हें मिला सम्मान
धनवंतरि जयंती और आयुर्वेद दिवस पर पूर्व राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने चिकित्सकों को सम्मानित किया। डॉ. जीएस तोमर को लाइफटाइम अचीवमेंट, डॉ. पीएस पांडेय को चिकित्सा श्री अवार्ड, डॉ. एमडी दुबे को वैद्यरत्न अवार्ड, डॉ. विष्णु बली मिश्रा को शल्यविद अवार्ड दिया गया। इसी क्रम में डॉ. एसएस उपाध्याय, डॉ. राकेश कुमार सिंह, डॉ सर्वांश मालवीय, डॉ. रंजना सिंह, डॉ. सत्यप्रकाश गुप्ता, वैद्य राकेश एवं डॉ. अनुपम श्रीवास्तव को एप्रीसिएशन अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस मौके पर में विश्व आयुर्वेद मिशन एवं विश्व आयुर्वेद परिषद ने संयुक्त रूप से डाबर इंडिया के टैरिटरी मैनेजर राजेंद्र कुमार को आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार में समर्पित सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया।
संयम सिखाता है आयुर्वेद
-डॉ. एसके राय बोले, आयुर्वेद पूर्णतया स्वदेशी इलाज
आयुष मंत्रालय की ओर से हिन्दुस्तानी ऐकेडमी में आयोजित संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता आयुर्वेदाचार्य डॉ. एसके राय ने दीर्घायुष्य के लिए संयम के साथ दिनचर्या को नियमित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहाकि आयुर्वेद पूर्णतया स्वदेशी इलाज है। आयुर्वेद हमें संयम सिखाता है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का प्राथमिक प्रयोजन स्वास्थ्य की रक्षा करना है। इसमें ही महर्षियों की जीवेम शरद शतम शतम की परिकल्पना में भी यही मूल मंत्र छिपा हुआ है ।
मुख्य अतिथि डॉ. सर्वदेव उपाध्याय ने आयुर्वेद को वैदिक काल की चिकित्सा विधा बताई। उन्होंने कहाकि बीच के काल में तमाम व्यवधानों एवं विकृत राजनीतिक परिस्थितियों को मध्यकाल में आयुर्वेद के पराभव का कारण बताया। इस मौके पर बड़ी संख्या में आयुर्वेद, यूनानी विशेषज्ञ मौजूद रहे। संयोजकत्व क्षेत्रीय आयुर्वेद अधिकारी डॉ. शारदा प्रसाद का रहा।