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नए आयोग के इंतजार में फंसे भर्तियों के विज्ञापन
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प्रयागराज। शिक्षक भर्ती के लिए नए आयोग के गठन का प्रस्ताव तो आ गया, लेकिन इसके गठन की प्रक्रिया लंबी होती जा रही है। ऐसे में जिन भर्ती संस्थानों का विलय कर नए आयोग का गठन किया जाना है, वहां नई भर्तियों के विज्ञापन फंस गए हैं। हालांकि, नए आयोग के गठन का मसौदा शासन को माह भर पहले सौंपा जा चुका है। लेकिन, इस पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक शिक्षकों की भर्ती के लिए एक नए आयोग के गठन का प्रस्ताव आया था। शासन ने इस पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड और उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग का विलय कर एक नए आयोग का गठन किया जाना है। इसके लिए तीनों भर्ती संस्थानों के सचिवों को मसौदा तैयार करने के लिए कहा गया था। माह भर पहले मसौदा तैयार कर शासन को सौंपा जा चुका है। सूत्रों का कहना है कि इस मसौदे का परीक्षण किया जा रहा है। कुछ संशोधनों के बाद इसे अंतिम रूप से लागू किया जा सकता है।
हालांकि, इस प्रक्रिया के कारण नई भर्तियों के विज्ञापन फंस हुए हैं। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग वर्तमान में तीन साल पुरानी विज्ञापन संख्या 47 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पूरी कराने में व्यस्त है। साल भर पहले असिस्टेंट प्रोफेसर के 534 पदों पर भर्ती के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने आयोग को अधियाचन भेजा था, लेकिन बाद में निदेशालय ने अधियाचन वापस ले लिया। असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों की संख्या बढ़कर तीन हजार के आसपास पहुंच गई है, लेकिन निदेशालय की ओर से आयोग को अब तक अधियाचन नहीं भेजा गया। हालांकि, निदेशालय दावा कर रहा है कि रिक्त पदों की गणना की जा रही है और यह काम पूरा होते ही अधियाचन भेज दिया जाएगा। वहीं, अभ्यर्थियों में इस बात को लेकर असमंजस है कि नए आयोग के गठन से पहले नई भर्ती के लिए विज्ञापन जारी होगा या नहीं।
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उधर, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में भी अभ्यर्थी टीजीटी-पीजीटी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किए जाने की मांग को लेकर आए दिन धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। वहां भी नई भर्तियां फंसी हुई हैं। वहीं, सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से आयोजित की जा चुकी 69 हजार शिक्षक भर्ती विवादों में फंसी है और नई भर्ती का अतापता नहीं है। ऐसे में तीनों भर्ती संस्थानों की ओर से नई भर्तियों के लिए विज्ञापन नए आयोग के गठन से पहले जारी किए जाएंगे या नहीं, इस पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
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प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक शिक्षकों की भर्ती के लिए एक नए आयोग के गठन का प्रस्ताव आया था। शासन ने इस पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड और उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग का विलय कर एक नए आयोग का गठन किया जाना है। इसके लिए तीनों भर्ती संस्थानों के सचिवों को मसौदा तैयार करने के लिए कहा गया था। माह भर पहले मसौदा तैयार कर शासन को सौंपा जा चुका है। सूत्रों का कहना है कि इस मसौदे का परीक्षण किया जा रहा है। कुछ संशोधनों के बाद इसे अंतिम रूप से लागू किया जा सकता है।
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हालांकि, इस प्रक्रिया के कारण नई भर्तियों के विज्ञापन फंस हुए हैं। उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग वर्तमान में तीन साल पुरानी विज्ञापन संख्या 47 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पूरी कराने में व्यस्त है। साल भर पहले असिस्टेंट प्रोफेसर के 534 पदों पर भर्ती के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने आयोग को अधियाचन भेजा था, लेकिन बाद में निदेशालय ने अधियाचन वापस ले लिया। असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों की संख्या बढ़कर तीन हजार के आसपास पहुंच गई है, लेकिन निदेशालय की ओर से आयोग को अब तक अधियाचन नहीं भेजा गया। हालांकि, निदेशालय दावा कर रहा है कि रिक्त पदों की गणना की जा रही है और यह काम पूरा होते ही अधियाचन भेज दिया जाएगा। वहीं, अभ्यर्थियों में इस बात को लेकर असमंजस है कि नए आयोग के गठन से पहले नई भर्ती के लिए विज्ञापन जारी होगा या नहीं।
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उधर, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड में भी अभ्यर्थी टीजीटी-पीजीटी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किए जाने की मांग को लेकर आए दिन धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। वहां भी नई भर्तियां फंसी हुई हैं। वहीं, सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से आयोजित की जा चुकी 69 हजार शिक्षक भर्ती विवादों में फंसी है और नई भर्ती का अतापता नहीं है। ऐसे में तीनों भर्ती संस्थानों की ओर से नई भर्तियों के लिए विज्ञापन नए आयोग के गठन से पहले जारी किए जाएंगे या नहीं, इस पर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।