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इविवि के ऑर्डिनेंस में होगा व्यापक बदलाव
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 11 Apr 2016 02:23 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के ऑर्डिनेंस में व्यापक फेरबदल होगा। संशोधन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुराछात्र सम्मेलन ‘प्रयाग पर्व’ में कुलपति प्रो. रतनलाल हांगलू ने कहा कि इसमें कई कमियां हैं, जिसमें पूरी तरह से बदलाव की जरूरत है।
विश्वविद्यालय की स्थिति को लेकर काफी चिंतित दिखे कुलपति ने संबोधन की शुरुआत ही गंगाजल की कसम से की और भरोसा दिलाया कि शिक्षक भर्ती या अन्य किसी भी निर्णय में पूरी ईमानदारी बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षक नहीं हैं। अफसरों के पद खाली थे। विश्वविद्यालय में कर्मचारियाें की लिस्ट नहीं है। डाटा उपलब्ध नहीं है। 19 लोगों को प्रमोशन मिलना था, लेकिन रिटायर हो गए। कई लोगों का तो निधन हो चुका है। फाइल निस्तारण में देर होती है। इसके पीछे पक्षपात की आशंका है। विश्वविद्यालय पूरी तरह से जकड़ गया है। ऑर्डिनेंस में पत्राचार संस्थान को विश्वविद्यालय का हिस्सा नहीं माना गया है। इसलिए वह कुछ कर पाने में लाचार हैं। उन्हाेंने आंदोलनों के दौरान शिक्षकों को गाली देने पर छात्रों को चेतावनी दी। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपये का गबन हुआ है। पैसा लेकर दाखिले किए गए। इसकी जांच कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि 90 फीसदी शिक्षक और विद्यार्थी अच्छे हैं, लेकिन कुछ लोगों ने ही विश्वविद्यालय पर दाग लगा दिया है। इस स्थिति में बदलाव के लिए कड़े निर्णय लेने होंगे। इसी के अंतर्गत ऑर्डिनेंस में बदलाव की पहल की गई है। विद्यार्थियों की 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य करने का भी निर्णय लिया गया है। मंगलवार को एकेडमिक काउंसिल में इसे रखा जाएगा। हर विभाग में स्मार्ट क्लास बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए छह करोड़ रुपये मिले हैं। यहां अब भी वार्षिक परीक्षा का पैटर्न लागू है। इसकी वजह से विदेशों में यहां की डिग्री मान्य नहीं है। इसलिए यहां भी सेमेस्टर सिस्टम लागू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी रात नौ बजे तक खुलने लगी है। पूरी कोशिश है कि छात्र-छात्राएं 24 घंटे लाइब्रेरी में पढ़ाई कर सकेंगे। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है।
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विश्वविद्यालय की स्थिति को लेकर काफी चिंतित दिखे कुलपति ने संबोधन की शुरुआत ही गंगाजल की कसम से की और भरोसा दिलाया कि शिक्षक भर्ती या अन्य किसी भी निर्णय में पूरी ईमानदारी बरती जाएगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में शिक्षक नहीं हैं। अफसरों के पद खाली थे। विश्वविद्यालय में कर्मचारियाें की लिस्ट नहीं है। डाटा उपलब्ध नहीं है। 19 लोगों को प्रमोशन मिलना था, लेकिन रिटायर हो गए। कई लोगों का तो निधन हो चुका है। फाइल निस्तारण में देर होती है। इसके पीछे पक्षपात की आशंका है। विश्वविद्यालय पूरी तरह से जकड़ गया है। ऑर्डिनेंस में पत्राचार संस्थान को विश्वविद्यालय का हिस्सा नहीं माना गया है। इसलिए वह कुछ कर पाने में लाचार हैं। उन्हाेंने आंदोलनों के दौरान शिक्षकों को गाली देने पर छात्रों को चेतावनी दी। कुलपति ने बताया कि विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपये का गबन हुआ है। पैसा लेकर दाखिले किए गए। इसकी जांच कराई जा रही है।
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उन्होंने कहा कि 90 फीसदी शिक्षक और विद्यार्थी अच्छे हैं, लेकिन कुछ लोगों ने ही विश्वविद्यालय पर दाग लगा दिया है। इस स्थिति में बदलाव के लिए कड़े निर्णय लेने होंगे। इसी के अंतर्गत ऑर्डिनेंस में बदलाव की पहल की गई है। विद्यार्थियों की 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य करने का भी निर्णय लिया गया है। मंगलवार को एकेडमिक काउंसिल में इसे रखा जाएगा। हर विभाग में स्मार्ट क्लास बनाने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए छह करोड़ रुपये मिले हैं। यहां अब भी वार्षिक परीक्षा का पैटर्न लागू है। इसकी वजह से विदेशों में यहां की डिग्री मान्य नहीं है। इसलिए यहां भी सेमेस्टर सिस्टम लागू किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि लाइब्रेरी रात नौ बजे तक खुलने लगी है। पूरी कोशिश है कि छात्र-छात्राएं 24 घंटे लाइब्रेरी में पढ़ाई कर सकेंगे। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है।
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