अतीक हत्याकांड: रिटायरमेंट के बाद भी खौफ में रहते थे राजू पाल हत्याकांड के विवेचक, कहा- अब जाकर डर हुआ खत्म
राजू पाल हत्याकांड में अतीक और उसके गुर्गों के खिलाफ विवेचना करने वाले विवेचक नारायण सिंह परिहार के खौफ का अब जाकर अंत हुआ है। रिटायरमेंट के बाद जब भी उन्हें गवाही के लिए बुलाया जाता, मन में एक खौफ तारी रहता कि कहीं अतीक और उसके गिरोह के लोग हमला न कर दें।
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राजू पाल हत्याकांड में अतीक और उसके गुर्गों के खिलाफ विवेचना करने वाले विवेचक नारायण सिंह परिहार के खौफ का अब जाकर अंत हुआ है। रिटायरमेंट के बाद जब भी उन्हें गवाही के लिए बुलाया जाता, मन में एक खौफ तारी रहता कि कहीं अतीक और उसके गिरोह के लोग हमला न कर दें। विवेचना के दौरान तो उन्हें पाकिस्तान से भी धमकी भरे फोन आते थे।
राजू पाल हत्याकांड की विवेचना करने वाले नारायण सिंह परिहार बताते हैं कि उन पर बहुत दबाव रहता था। यहां पर अतीक के लोग उनसे मिलने आते और दबी जुबान में धमकाते कि अतीक से जिसने दुश्मनी ली। उसे वह छोड़ता नहीं। वह दुष्कर्म में भी फंसा सकता है। हालांकि नारायण कभी इन धमकियों से नहीं डरे। इसके बाद उन्हें पाकिस्तान के नंबरों से धमकी आने लगी। धमकाने वाले साफ कहते कि राजू पाल हत्याकांड में अतीक को फंसाया तो जान से हाथ धो बैठोगे। बाद में नारायण ने पाकिस्तान से आने वाली कॉल्स को उठाना बंद कर दिया था।
उन्होंने न सिर्फ अतीक और अशरफ के खिलाफ अकाट्य सुबूत जुटाए बल्कि गुड्डू मुस्लिम समेत सात अन्य आरोपियों का नाम पूरक चार्जशीट में शामिल किया। इससे अतीक बेहद नाराज हो गया था। नारायण सिंह बताते हैं कि रिटायरमेंट के बाद जब भी बयान के लिए कहीं बुलाया जाता तो एक खौफ रहता कि कहीं अतीक कोई वारदात न करा दे। जब भी वे बाहर जाते, हर वक्त चौकन्ना रहते। अब जब अतीक और अशरफ नहीं रहे तो उन्हें भी काफी राहत है।