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Nafees Biryani: अशरफ की दोस्ती ने पहुंचाया फर्श से अर्श तक... क्रेटा कार ने कर दिया सब कुछ बर्बाद; पूरी कहानी
Tue, 19 Dec 2023 01:30 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 19 Dec 2023 01:30 PM IST
सार
अतीक गैंग के फाइनेंसर नफीस बिरयानी की रविवार देर रात एसआरएन अस्पताल में मौत हो गई। नफीस को दिन में करीब साढ़े 11 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इससे पहले वह एक रात जेल अस्पताल में भी भर्ती रहा। नफीस को पुलिस ने 22 नवंबर को नवाबगंज में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। उसके पैर में गोली लगी थी। उमेश पाल हत्याकांड में नफीस पर इनाम घोषित किया गया था। उमेश की हत्या में उसकी क्रेटा कार का इस्तेमाल हुआ था।
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नफीस बिरयानी। फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
प्रयागराज के अटाला स्थित गुलाबबाड़ी का रहने वाला नफीस का परिवार वर्षों तक गुरबत में जीता रहा। नफीस ने बहन के गहने बेचकर बिरयानी का ठेला लगाया। पढ़ाई के दौरान कुछ दोस्तों के माध्यम से अतीक के भाई अशरफ से उसकी जान पहचान थी। वर्षों बाद जब अशरफ ने उसे ठेला लगाते देखा तो उसके सिर पर हाथ रख दिया।
उसने न सिर्फ सिविल लाइंस में पैलेस सिनेमा के बगल में ईट ऑन रेस्टोरेंट खुलवाया बल्कि वहां बैठकी भी करने लगा। इससे धीरे-धीरे नफीस की भी धाक बढ़ने लगी। उसकी दुकान भी खूब चलने लगी। इसके बाद नफीस ने नवाब यूसुफ रोड पर दुकान से करीब 20 गुना बड़ा कारखाना लगाया। जब अतीक के दुर्दिन शुरू हुए तो इसकी आंच नफीस के धंधे पर भी पड़ी।
उसका रेस्टोरेंट ढहा दिया गया। कारखाना भी बंद करवा दिया गया लेकिन नफीस की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा। उसने बीएचएस के सामने यहां से कई गुना बड़ा रेस्टोरेंट खोल दिया। वह भी खूब चलने लगा। इसी बीच रियल एस्टेट और विवादित जमीनों के धंधे से भी वह खूब कमाने लगा।
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नफीस सिर्फ बिरयानी ही अच्छी नहीं बनाता था। वह बेहतरीन क्रिकेटर भी था। मजीदिया इस्लामिया इंटर कॉलेज से उसने इंटर पास किया था। कॉलेज की क्रिकेट टीम में वह शानदार विकेटकीपर था। हालांकि, परिवार की गरीबी के चलते वह क्रिकेट में आगे नहीं बढ़ सका।
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उसने न सिर्फ सिविल लाइंस में पैलेस सिनेमा के बगल में ईट ऑन रेस्टोरेंट खुलवाया बल्कि वहां बैठकी भी करने लगा। इससे धीरे-धीरे नफीस की भी धाक बढ़ने लगी। उसकी दुकान भी खूब चलने लगी। इसके बाद नफीस ने नवाब यूसुफ रोड पर दुकान से करीब 20 गुना बड़ा कारखाना लगाया। जब अतीक के दुर्दिन शुरू हुए तो इसकी आंच नफीस के धंधे पर भी पड़ी।
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उसका रेस्टोरेंट ढहा दिया गया। कारखाना भी बंद करवा दिया गया लेकिन नफीस की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ा। उसने बीएचएस के सामने यहां से कई गुना बड़ा रेस्टोरेंट खोल दिया। वह भी खूब चलने लगा। इसी बीच रियल एस्टेट और विवादित जमीनों के धंधे से भी वह खूब कमाने लगा।
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नफीस सिर्फ बिरयानी ही अच्छी नहीं बनाता था। वह बेहतरीन क्रिकेटर भी था। मजीदिया इस्लामिया इंटर कॉलेज से उसने इंटर पास किया था। कॉलेज की क्रिकेट टीम में वह शानदार विकेटकीपर था। हालांकि, परिवार की गरीबी के चलते वह क्रिकेट में आगे नहीं बढ़ सका।
क्रेटा कार ने सब कुछ कर दिया बर्बाद
नफीस बिरयानी ने कुछ साल पहले सफेद रंग की क्रेटा कार खरीदी थी जो उसकी बर्बादी का कारण बन गई। इस कार को उसने ट्रैवल्स का धंधा करने वाली रिश्तेदार रुखसार अहमद को बेच दिया था। हालांकि, वह और उसके बच्चे इसी कार का प्रयोग करते थे। अतीक के बेटे असद ने उमेश की हत्या के लिए इसी कार को चुना। असद इसी कार में बैठकर उमेश को मारने गया।
नफीस बिरयानी ने कुछ साल पहले सफेद रंग की क्रेटा कार खरीदी थी जो उसकी बर्बादी का कारण बन गई। इस कार को उसने ट्रैवल्स का धंधा करने वाली रिश्तेदार रुखसार अहमद को बेच दिया था। हालांकि, वह और उसके बच्चे इसी कार का प्रयोग करते थे। अतीक के बेटे असद ने उमेश की हत्या के लिए इसी कार को चुना। असद इसी कार में बैठकर उमेश को मारने गया।
वापस लौटकर उसने कार को चकिया स्थित घर के पास खड़ा कर दिया। पुलिस ने कार बरामद की तो तुरंत नफीस तक पहुंच गई। हालांकि, उसने बताया कि कार उसने बेच दी थी। इसी कारण उसे गिरफ्तार नहीं किया गया लेकिन बाद में जांच के दौरान जब नफीस की संलिप्तता का पता चला तो उसे वांछित घोषित कर दिया गया।
परिवार में पत्नी के अलावा तीन बेटियां
नफीस के परिवार में पत्नी के अलावा तीन बेटियां हैं। वह तीन भाइयों में मझला था। पिता की सालों पहले मौत हो चुकी है। सोमवार की शाम जब नफीस का शव घर पहुंचा तो बेटियों और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। नफीस पत्नी पिछले बुधवार को ही जेल में उससे मिलने गई थी।
नफीस के परिवार में पत्नी के अलावा तीन बेटियां हैं। वह तीन भाइयों में मझला था। पिता की सालों पहले मौत हो चुकी है। सोमवार की शाम जब नफीस का शव घर पहुंचा तो बेटियों और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। नफीस पत्नी पिछले बुधवार को ही जेल में उससे मिलने गई थी।
हार्ट अटैक के बाद अस्पताल में भर्ती किए गए नफीस बिरयानी की मौत
आपको बता दें कि अतीक गैंग के फाइनेंसर नफीस बिरयानी की रविवार देर रात एसआरएन अस्पताल में मौत हो गई। नफीस को दिन में करीब साढ़े 11 बजे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इससे पहले वह एक रात जेल अस्पताल में भी भर्ती रहा। नफीस को पुलिस ने 22 नवंबर को नवाबगंज में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया था। उसके पैर में गोली लगी थी। उमेश पाल हत्याकांड में नफीस पर इनाम घोषित किया गया था। उमेश की हत्या में उसकी क्रेटा कार का इस्तेमाल हुआ था। वहीं, सोमवार की शाम नफीस को काला डांडा कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक कर दिया गया।
शहर के मशहूर ईट ऑन रेस्टोरेंट का मालिक और अतीक गैंग का फाइनेंसर नफीस अहमद उर्फ नफीस बिरयानी (52) अटाला के गुलाबबाड़ी का रहने वाला था। उमेश पाल हत्याकांड में कातिलों ने जिस क्रेटा कार का इस्तेमाल किया था, वह नफीस की ही थी। पुलिस ने घटना के करीब नौ महीने बाद नफीस को वांछित घोषित कर दिया था और उसके ऊपर इनाम भी रखा था।
22 नवंबर को नवाबगंज इलाके में उसे पुलिस मुठभेड़ में गिरफ्तार किया गया था। इस दौरान उसके बाएं पैर में गोली भी लगी थी। घायल नफीस को एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहीं, नौ दिसंबर को उसे एसआरएन अस्पताल से जेल ले जाया गया था। तब से वह नैनी जेल में बंद था। घायल होने के कारण नफीस को बैरक में नहीं बल्कि जेल अस्पताल में ही रखा गया था।
शुक्रवार रात नफीस ने सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की। रात भर वह भर्ती रहा। रविवार सुबह तक उसकी तकलीफ बढ़ गई। पेट में दर्द भी शुरू हो गया। इसके बाद डॉक्टरों ने उसे एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया। फार्मासिस्ट और तीन सिपाहियों के साथ उसे एसआरएन अस्पताल भेजा गया। तब तक कोतवाली से भी फोर्स पहुंच गई थी।
उसके घर वालों को भी सूचना भेज दी गई। एसआरएन अस्पताल पहुंचने के बाद भी नफीस की हालत बिगड़ती गई। शाम को उसे वेंटीलेटर पर रखा गया। डॉक्टरों के मुताबिक रात में एक बजे उसकी मौत हो गई। सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद नफीस के शव को गुलाबबाड़ी स्थित घर ले जाया गया। देर शाम काला डांडा कब्रिस्तान में उसे सुपुर्दे खाक कर दिया गया।
नफीस को सीवियर हार्ट अटैक की पोजीशन में भर्ती किया गया था। उसे सांस लेने में दिक्कत थी। उसे वेंटीलेटर पर भी रखा गया था लेकिन देर रात उसकी मौत हो गई। -डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज
नफीस को जब जेल लाया गया था तो उसे चलने में तकलीफ थी। स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए उसे बैरक में न रखकर जेल अस्पताल में रखा गया था। शनिवार को ज्यादा तकलीफ होने पर उसे एसआरएन अस्पताल रेफर कर दिया गया था। -रंग बहादुर सिंह पटेल, वरिष्ठ जेल अधीक्षक