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Atiq Ashraf Murder: चार दशक में हुईं पांच बड़ी हत्याएं... कत्लेआम शुरू करने वाले अतीक का भी हुआ अंत
Mon, 17 Apr 2023 10:07 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 17 Apr 2023 10:07 AM IST
सार
प्रयागराज में चार दशक में पांच बड़ी हत्याएं हुईं। हर बार सड़क पर दिनदहाड़े बेखौफ अंदाज में हत्याओं को अंजाम दिया गया। आपको बता दें कि प्रयागराज में 34 साल में पांच बड़ी राजनीतिक हत्याएं हुईं। जिस माफिया अतीक ने चांद बाबा की हत्या के साथ इसकी शुरुआत की थी, उसकी हत्या के साथ इसका अंत भी हो गया।
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माफिया अतीक और अशरफ (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
प्रयागराज में माफिया अतीक अहमद और अशरफ की शनिवार की रात में गोली मारकर हत्या की गई। रात साढ़े 10 बजे के बाद अतीक और अशरफ को उस वक्त गोली मारी गई जब वो दोनों मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लाया गए थे। मीडियाकर्मी बनकर आए तीन हमलावरों ने दनादन गोलियां बरसाईं। घटना में एक पुलिसकर्मी और एक पत्रकार भी घायल हुआ।
प्रयागराज में चार दशक में पांच बड़ी हत्याएं हुईं। हर बार सड़क पर दिनदहाड़े बेखौफ अंदाज में हत्याओं को अंजाम दिया गया। आपको बता दें कि प्रयागराज में 34 साल में पांच बड़ी राजनीतिक हत्याएं हुईं। जिस माफिया अतीक ने चांद बाबा की हत्या के साथ इसकी शुरुआत की थी, उसकी हत्या के साथ इसका अंत भी हो गया। साल 1995 में जवाहर पंडित हत्याकांड को छोड़ दें तो हर राजनीतिक हत्या में माफिया अतीक अहमद का ही नाम सीधे तौर पर सामने आया।
हाईप्रोफाइल हत्याकांडों में हर बार अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया। घटनाओं को भी बेखौफ तरीके से खुलेआम सड़कों पर अंजाम दिया गया। 1989 के विधानसभा चुनाव में माफिया अतीक अहमद और उसका जानी दुश्मन सब्जी मंडी क्षेत्र का तत्कालीन सभासद शौक इलाही उर्फ चांद बाबा एक दूसरे को सीधे चुनौती दे रहे थे। मतगणना से दो दिन पहले रोशनबाग में कबाब पराठा की एक दुकान में शाम साढ़े सात बजे के आसपास दोनों को आमना-सामना हुआ।
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पहले बहस हुई और फिर ताबड़तोड़ गोलियां और बम चलने लगे। इस घटना में चांद बाबा मारा गया और हत्या का आरोप अतीक अहमद पर लगा। चांद बाबा गैंग के सदस्य इस्लाम नाटे, जग्गा और अख्तर कालिया बच निकले। बाद में, पुलिस ने एक मुठभेड़ में इस्लाम नाटे को ढेर कर दिया। इसके बाद अख्तर कालिया की हत्या कर दी गई और फिर मुंबई भागे जग्गा को वापस इलाहाबाद लाकर मार दिया गया।
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प्रयागराज में चार दशक में पांच बड़ी हत्याएं हुईं। हर बार सड़क पर दिनदहाड़े बेखौफ अंदाज में हत्याओं को अंजाम दिया गया। आपको बता दें कि प्रयागराज में 34 साल में पांच बड़ी राजनीतिक हत्याएं हुईं। जिस माफिया अतीक ने चांद बाबा की हत्या के साथ इसकी शुरुआत की थी, उसकी हत्या के साथ इसका अंत भी हो गया। साल 1995 में जवाहर पंडित हत्याकांड को छोड़ दें तो हर राजनीतिक हत्या में माफिया अतीक अहमद का ही नाम सीधे तौर पर सामने आया।
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हाईप्रोफाइल हत्याकांडों में हर बार अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया। घटनाओं को भी बेखौफ तरीके से खुलेआम सड़कों पर अंजाम दिया गया। 1989 के विधानसभा चुनाव में माफिया अतीक अहमद और उसका जानी दुश्मन सब्जी मंडी क्षेत्र का तत्कालीन सभासद शौक इलाही उर्फ चांद बाबा एक दूसरे को सीधे चुनौती दे रहे थे। मतगणना से दो दिन पहले रोशनबाग में कबाब पराठा की एक दुकान में शाम साढ़े सात बजे के आसपास दोनों को आमना-सामना हुआ।
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पहले बहस हुई और फिर ताबड़तोड़ गोलियां और बम चलने लगे। इस घटना में चांद बाबा मारा गया और हत्या का आरोप अतीक अहमद पर लगा। चांद बाबा गैंग के सदस्य इस्लाम नाटे, जग्गा और अख्तर कालिया बच निकले। बाद में, पुलिस ने एक मुठभेड़ में इस्लाम नाटे को ढेर कर दिया। इसके बाद अख्तर कालिया की हत्या कर दी गई और फिर मुंबई भागे जग्गा को वापस इलाहाबाद लाकर मार दिया गया।
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सभी दुश्मनों के मारे जाने के बाद अतीक का सियासी कारवां तेजी से आगे बढ़ चला। वह वर्ष 2004 तक लगातार पांच बार विधायक भी चुन लिया गया। इस बीच वर्ष 1995 में सपा के तत्कालीन विधायक जवाहर पंडित को सिविल लाइंस की सड़क पर दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया गया। चांद बाबा के बाद प्रयागराज में यह दूसरी सबसे बड़ी राजनीतिक हत्या थी। पहली बार शहर में किसी की हत्या के लिए एके-47 का इस्तेमाल किया गया था।
इस हत्याकांड में कपिलमुनि करवरिया, उदयभान करवरिया और सूरजभान करवरिया को प्रमुख आरोपी बनाया गया। हत्याकांड में तीनों करवरिया भाइयों और इनके रिश्तेदार रामचंद्र उर्फ कल्लू को उम्रकैद की सजा हो चुकी है। इस घटना के ठीक 10 साल बाद माफिया अतीक और अशरफ सुर्खियों में फिर आए, जब 25 जनवरी 2005 को शहर पश्चिमी से बसपा के तत्कालीन विधायक राजू पाल को धूमनगंज में दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया गया था। नवंबर 2004 हुए विधानसभा चुनाव में राजू पाल ने शहर पश्चिमी से अशरफ को हराया था।
अतीक और अशरफ पर हत्या का इल्जाम लगा। बावजूद इसके राजू पाल की हत्या के बाद हुए उप चुनाव में अशरफ ने राजू पाल की पत्नी पूजा पाल को हरा दिया। 2007 में हुए विधानसभा के मुख्य चुनाव में पूजा पाल ने अशरफ को शिकस्त दी। तीनों बार अशरफ ने सपा के टिकट से चुनाव लड़ा। इसके बाद माफिया अतीक तो सियासत की छांव में फलता-फूलता रहा, लेकिन अशरफ 2007 के बाद फिर कभी चुनाव नहीं लड़ा।
18 सेकंड में अतीक और अशरफ को मौत की नींद सुलाया
आपको बता दें कि अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को महज 18 सेकंड के भीतर मौत की नींद सुला दिया गया। शूटरों ने दोनों के पुलिस जीप से उतरने के 32वें सेकंड में पहली गोली दागी। इसके बाद लगातार कुल 20 गोलियां दागीं और 50वें सेकंड तक माफिया भाइयों का काम तमाम हो चुका था।
आपको बता दें कि अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ को महज 18 सेकंड के भीतर मौत की नींद सुला दिया गया। शूटरों ने दोनों के पुलिस जीप से उतरने के 32वें सेकंड में पहली गोली दागी। इसके बाद लगातार कुल 20 गोलियां दागीं और 50वें सेकंड तक माफिया भाइयों का काम तमाम हो चुका था।
अतीक व अशरफ को 10.36 मिनट पर लेकर पुलिस कॉल्विन अस्पताल के गेट पर पहुंची। 10.37 मिनट और 12 सेकंड पर दोनों पुलिस जीप से नीचे उतर चुके थे। इसके बाद पुलिस उन्हें लेकर अस्पताल के भीतर जाने लगी।
यह भी पढ़ें: Atiq Arshad Murder: कैमरे में सही-सलामत दिखे अतीक और अशरफ, फिर रात में क्यों ले गए अस्पताल? पुलिस का ये तर्क
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ठीक 32वें सेकंड यानी 10.37 मिनट और 44 सेकंड पर शूटरों ने पहली गोली दागी। इसके बाद ताबड़तोड़ 20 राउंड फायर अतीक और अशरफ को निशाना बनाकर किए गए। 18 सेकंड में वारदात को अंजाम देकर शूटर अपने मकसद में कामयाब हो चुके थे। 10.38 मिनट और 02 सेकेंड पर अतीक और अशरफ दोनों लहूलुहान होकर जमीन पर लुढ़के पड़े थे और उनके शरीर बेजान हो चुके थे।