प्रयागराज : नए सिरे से तैयार होगा अतीक अहमद का गैंगचार्ट, बेगम-बेटे भी होंगे शामिल, कई मददगार भी हिट लिस्ट में
उमेश पाल हत्याकांड के बाद अब अतीक अहमद का गैंग चार्ट एक बार फिर से नए सिरे से बनाने की तैयारी है। इसमें न सिर्फ गुर्गे बल्कि उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन और तीनों बेटों का नाम भी शामिल किया जाएगा।
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उमेश पाल हत्याकांड के बाद अब अतीक अहमद का गैंग चार्ट एक बार फिर से नए सिरे से बनाने की तैयारी है। इसमें न सिर्फ गुर्गे बल्कि उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन और तीनों बेटों का नाम भी शामिल किया जाएगा। कई अन्य नाम भी जोड़े जाएंगे जिनमें से कुछ सफेदपोश भी शामिल हैं। यह सफेदपोश अतीक व अशरफ के लिए प्लाटिंग का काम कर रहे हैं। अतीक आईएस-227 गैंग का लीडर है। यह अंतरराज्यीय गिरोह है, जिसमें पिछले साल तक उसके भाई अशरफ, शूटर आबिद, जुल्फिकार उर्फ तोता समेत कुल 179 सदस्य थे।
माफिया के खिलाफ चलाए जा रहे हैं अभियान के तहत शासन की ओर से सख्त कार्रवाई के निर्देश मिलने के बाद जिला पुलिस पड़ताल में जुटी तो पता चला कि गिरोह में शामिल 17 सदस्यों की मौत हो चुकी है। इसके बाद इन 17 नामों को हटाया गया जबकि शेष बचे 162 लोगों के संबंध में जानकारी जुटाने शुरू की गई। पता किया गया कि वह मौजूदा समय में कहां हैं, उनकी आय का स्रोत क्या है और उनकी मौजूदा गतिविधियों आदि के संबंध में भी सूचनाएं एकत्र की गईं।
सूत्रों का कहना है कि उमेश पाल हत्याकांड के बाद अब माफिया पर कार्रवाई के तहत एक कार्ययोजना पर विचार किया जा रहा है। इसके तहत अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन और उसके तीनों बेटों उमर, अली और असद का नाम गैंग में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा उमेश पाल हत्याकांड में शामिल चार अन्य शूटरों गुलाम, गुड्डू मुस्लिम, साबिर और अरमान का नाम भी इस गिरोह में शामिल किया जाएगा।
मददगार सफेदपोश भी होंगे निशाने पर
सबसे खास बात यह है कि जिला पुलिस की ओर से कुछ ऐसे सफेदपोशों को चिह्नित किया गया है, जो पर्दे के पीछे से अतीक व अशरफ के लिए काम कर रहे हैं। अलग-अलग इलाकों में यह बड़े पैमाने पर प्लाटिंग का काम भी कर रहे हैं। हाल ही में से इनमें से कुछ के खिलाफ विकास प्राधिकरण की ओर से कार्रवाई भी की गई। सूत्रों का कहना है कि इन सफेदपोशों का नाम भी अतीक के गैंग में शामिल किया जाएगा। इसके बाद इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कहां हैं 40 निगरानी दस्ते, क्या हुआ रिपोर्ट का?
उमेश पाल हत्याकांड के बाद प्रयागराज में पूर्व में गठित 40 निगरानी दस्तों को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल पिछले साल तत्कालीन कप्तान अजय कुमार पांडेय ने अतीक व उसके गुर्गों पर कार्रवाई के क्रम में 40 निगरानी दस्तों का गठन किया था। खूब जोर-शोर से इनका प्रचार प्रसार किया गया और एक भव्य आयोजन के तहत इन्हें हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया गया। तब अफसरों ने बताया था कि प्रत्येक थानों पर गठित दो सदस्यीय निगरानी दस्ते को अतीक गैंग के सदस्यों के भौतिक सत्यापन में लगाया गया।
कैसे नहीं लगी इतनी बड़ी साजिश की भनक
इन टीमों को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह अतीक के गुर्गों के पते पर जाकर उनकी मौजूदा गतिविधियों, आय के स्रोत के संबंध में जानकारी जुटाएं। इनसे मिलने वाली रिपोर्ट का अवलोकन क्षेत्राधिकारी और एडिशनल एसपी करेंगे और फिर कार्रवाई की संस्तुति करते हुए रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। हालांकि अजय कुमार के तबादले के बाद यह निगरानी दस्ते भी गुम हो गए। अब सवाल ये उठता है कि आखिर यह निगरानी दस्ते कहां हैं और अगर यह ईमानदारीपूर्वक काम कर रहे हैं तो फिर इतनी बड़ी साजिश की भनक उन्हें कैसे नहीं लगी।
आखिर कैसे अतीक अहमद और उसके गुर्गे प्रदेश भर को हिलाकर रख देने वाली वारदात की साजिश रचते रहे और निगरानी दस्ते इसकी भनक तक नहीं पा सके। एक सवाल यह भी है कि अगर निगरानी दस्ते वर्तमान में काम नहीं कर रहे हैं तो आखिर किसके आदेश पर इन्हें ऐसा करने से रोका गया या बंद किया गया। यही नहीं सवाल यह भी है कि जितने दिनों तक निगरानी दस्तों ने काम किया, उन दिनों में माफिया के गुर्गों के संबंध में तैयार की गई रिपोर्ट का आखिर क्या हुआ।