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प्रयागराज : बिना जांच नहीं कर सकते सहायक अध्यापक को बर्खास्त, बीएसए मऊ को एक माह में निर्णय लेने का निर्देश

Sun, 24 Sep 2023 03:52 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 24 Sep 2023 03:52 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा है कि बीएसए विचार करें कि क्या नियम- 11का पालन किया गया है, जिसके तहत बर्खास्तगी से पूर्व बीएसए का अनुमोदन लेना जरूरी है। यह भी देखें कि क्या कोई गंभीर आरोप है जिसके कारण याची की बर्खास्तगी की जा सकती है। साथ ही क्या नियमानुसार जांच कार्यवाही की गई है।

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Assistant teacher cannot be dismissed without investigation, instructions to BSA Mau to take decision within a
court - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मऊ को डॉ. भीमराव आम्बेडकर प्राइमरी स्कूल धर्मगतपुर गुलारी के सहायक अध्यापक की बिना जांच किए प्रबंध समिति द्वारा बर्खास्त करने के आदेश पर एक माह में नियमानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

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कोर्ट ने कहा है कि बीएसए विचार करें कि क्या नियम- 11का पालन किया गया है, जिसके तहत बर्खास्तगी से पूर्व बीएसए का अनुमोदन लेना जरूरी है। यह भी देखें कि क्या कोई गंभीर आरोप है जिसके कारण याची की बर्खास्तगी की जा सकती है। साथ ही क्या नियमानुसार जांच कार्यवाही की गई है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल ने सहायक अध्यापक प्रेम सागर चौहान की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है। याचिका पर अधिवक्ता सुधीर कुमार सिंह ने बहस की।
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इनका कहना था कि याची के आधारहीन आरोप में निलंबित किया गया। आरोप पत्र दिया गया। जिसमें ऐसा कोई आरोप नहीं है, जिसके आधार पर दंड दिया जा सके। इसके बावजूद बिना जांच किए प्रबंध समिति ने याची को बर्खास्त कर दिया।याची सरकारी खजाने से वेतन पा रहा है।जिसकी बर्खास्तगी बिना बीएसए की पूर्व अनुमति लिए नहीं की जा सकती।


बीएसए ने याचिका लंबित होने के कारण बर्खास्तगी आदेश पर कोई निर्णय नहीं लिया है। नियमानुसार बर्खास्तगी रद होने योग्य है।

कोर्ट ने नियम-11 का परिशीलन करते हुए कहा कि बिना जांच बर्खास्तगी कानून की निगाह में कायम रहने लायक नहीं है। प्रबंध समिति बीएसए के अनुमोदन पर ही बर्खास्तगी आदेश दे सकती है।

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