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Asian Games: कभी मां-बाप ने उधार लेकर दिलाए थे जूते... अब चीन में जीत ली चांदी, अजय कुमार ने लहराया तिरंगा

Mon, 02 Oct 2023 10:34 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 02 Oct 2023 10:34 AM IST
सार

Asian Games 2023: प्रयागराज के सोरांव के लाल अजय कुमार सरोज ने चीन में तिरंगा लहराया है। कभी मां-बाप ने उधार लेकर जूते दिलाए थे आज पूरा देश गर्व कर रहा है। अजय ने कई बार दोस्तों से उधार लेकर जूते खरीदे और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पहुंचे। जब भी किसी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में उसे भाग लेने जाना पड़ता तो वह दोस्तों और भाई की मदद लेता है।

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अजय कुमार सरोज की कहानी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

‘अभी न पूछो हमसे मंजिल कहां है, अभी तो हमने चलने का इरादा किया है। ना हारे हैं ना हारेंगे कभी, ये हमने खुद से वादा किया है।’ ऐसा लगता है कि उत्साह एवं जोश से लबरेज ये पंक्तियां सोरांव के कजियानी गांव के रहने वाले अजय कुमार सरोज के लिए ही लिखी गईं हैं। तंगहाली और प्रतिकूल परिस्थितियों से जूझकर अजय ने चीन में चल रही एशियाड में एथलेटिक्स में सिल्वर पदक पर कब्जा जमाया।
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1500 मीटर की दौड़ में अजय का प्रदर्शन बेहद उम्दा रहा। एक समय लगा कि वह स्वर्ण पदक भी जीत सकते हैं। आखिर में उनकी झोली में सिल्वर आया। अजय ने अपनी दौड़ 3:38.94 के समय में पूरी की।
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अजय के पिता धर्मराज प्लम्बरिंग का काम करते हैं। उनके पांचों बच्चे धावक है। पिता की इच्छा पर अजय के भाई अजीत ने सबसे पहले दौड़ना शुरू किया। पिता चाहते थे कि उनका बेटा सेना में जाए। अजीत ने जब एथलेटिक्स में राष्ट्रीय स्तर तक की स्पर्धा में मेडल जीता तो पिता की ख्वाहिश हुई कि बेटा देश के लिए पदक जीते। 
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पिता की इसी ख्वाहिश पर दोनों छोटे बच्चों ने मेहनत शुरू कर दी। भाईयों को देखकर बहनों में भी धावक बनने की इच्छा हुई। पिता ने समाज के चलन को दरकिनार कर बच्चों को दौड़ने के लिए प्रेरित किया। यही वजह रही कि बच्चों ने बिना किसी परवाह के मेहनत जारी रखी और अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।

अजय के बड़े भाई अजीत की खेल कोटे से रेलवे में सीटीआई के पद पर नौकरी लगी तो परिवार की स्थिति सुधरने लगी। अजीत की नौकरी लगने के बाद उन्होंने अजय की मदद की और उनका हौसला बढ़ाया, यही कारण रहा है कि अजय धीरे-धीरे अपनी मंजिल की ओर आगे बढ़ने लगे और वैश्विक फलक पर भारत को पदक जीतकर परिवार का मान बढ़ाया। वर्तमान में अजय भी रेलवे में कार्यरत हैं।
 

भाई-बहन भी हैं धावक
अजय कुमार की बड़ी बहन शशि और शास्त्री दोनों ही लंबी दूरी की धावक हैं। शशि दस हजार मीटर और पांच हजार मीटर की दौड़ में राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धा में पदक जीत चुकी हैं। वहीं, शास्त्री इंदिरा मैराथन की चैंपियन रह चुकी हैं। इसके अलावा अजय के बड़े भाई अजीत ने 800 मीटर और 1500 मीटर की दौड़ में राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता है। अजय का एक भाई दुबई में काम करता है।
 

उधार लेके खरीदे जूते
अजय की मां रानी देवी बताती हैं - अजय ने कई बार दोस्तों से उधार लेकर जूते खरीदे और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पहुंचे। जब भी किसी राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में उसे भाग लेने जाना पड़ता तो वह दोस्तों और भाई की मदद लेता है।
 

कर्ज लेकर की परवरिश
पिता धर्मपाल बताते हैं कि मामूली सी कमाई में बच्चों की परवरिश करना मुश्किल होता है। बच्चों ने जब धावक बनने का फैसला लिया तो बहुत खुशी हुई है। लेकिन मुझे जानकारी नहीं थी कि बड़ी स्पर्धा तक कैसे पहुंचा जाता है। मुझे लगता था सेना वगैरह में नौकरी मिल जाएगी। जब बच्चे मेडल जीतने लगे और ओलंपिक और एशियाड के बारे में बात करने लगे तब इसकी जानकारी हुई।

उन्होंने बताया कि धावकों के खानपान से लेकर जूते तक पर ठीक-ठाक खर्च करना पड़ता है। शुरुआत में कई बार हुआ कि दोस्तों व परिचितों से उधार लेकर बच्चों को खेलने के लिए भेजा और नए जूते दिलाए। अजय की जीत की खबर पर गांव में जश्न का माहौल है।

अजय कुमार सरोज की उपलब्धियां
एशियाई खेल

2022 - हांग्जो - 1500 मी. - रजत
एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप
2023 - बैंकाक - 1500 मी. - स्वर्ण
2017 - भुवनेश्वर - 1500 मी. - स्वर्ण
2019 - दोहा - 1500 मी. - रजत

दक्षिण एशियाई खेल
2016 - गुवाहटी - 1500 मी. - स्वर्ण
2016 - गुवाहटी - 800 मी. - कांस्य

एशियन इंडोर और मार्शल आर्ट गेम्स
2017 - अश्गाबात - 1500 मी. - स्वर्ण

एशियाई युवा खेल
2013 - नानजिंग - 1500 मी. - कांस्य

शहर के खिलाड़ी ने शानदार प्रदर्शन कर भारत का मान बढ़ाया है। यह बड़ी उपलब्धि है। अजय व उनके परिवार को इस पदक के लिए बधाई। खेल विभाग की ओर से अजय को भविष्य के लिए शुभकामनाएं देती हूं। - विमला सिंह, क्षेत्रीय क्रीड़ाधिकारी

अजय सरोज मदन मोहन मालवीय स्टेडियम के प्रशिक्षू रहे हैं। उन्होंने एशियाड में मेडल जीतकर पूरे शहर को गौरवान्वित किया है। स्टेडियम के सभी खिलाड़ी और प्रशिक्षकों की ओर से उन्हें बहुत-बहुत बधाई । -देवी प्रसाद, उपक्रीड़ाधिकारी
 

अजय कुमार सरोज ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने इससे पहले भी कई पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इस बार एशियाड में उन्होंने पदक जीतकर शहर के सभी लोगों को खुश करने का काम किया है। वह और आगे जाएं, मेरी यही शुभकामनाएं हैं। सत्येंद्र सिंह, एथलेटिक्स कोच

एथलेटिक्स की 1500 मी. की स्पर्धा में सिल्वर पदक जीतकर अजय ने बड़ी खुशखबरी दी है। उन्होंने यह मुकाम अपने संघर्ष और मेहनत की बदौलत हासिल किया है। खेल के क्षेत्र में यह शहर की बड़ी उपलब्धि है।- संदीप गुप्ता, क्रीड़ा प्रभारी, अमिताभ बच्चन स्पोर्ट्स कांप्लेक्स
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