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रेलवे अस्पताल में जिंदा को बता दिया मृत, हंगामा

Sun, 04 Aug 2019 01:00 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 04 Aug 2019 01:00 AM IST
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Aroused dead, commotion in railway hospital
Aroused dead, commotion in railway hospital
केंद्रीय रेलवे अस्पताल के डॉक्टरों ने पहले तो जिंदा बालिका को मृत घोषित कर दिया, बाद में अस्पताल के ही दूसरे डॉक्टर ने जब परीक्षण किया तो बालिका जिंदा मिली। आननफानन में रेलवे के डॉक्टर परिजनों के साथ बालिका को लेकर दूसरे अस्पताल गए और भर्ती कराया। फिलहाल उसकी हालत स्थिर है। मामले में डॉक्टरों की लापरवाही सामने आने के बाद शनिवार को रेलकर्मियों ने जमकर हंगामा किया। रेलवे अफसरों ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
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रेलवे कर्मचारी महेंद्र यादव की पुत्री को केंद्रीय अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया। कर्मचारियों का आरोप है कि डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद बालिका को मृत घोषित कर दिया। इससे पूरा परिवार शोक में डूब गया। इसके बाद महेंद्र के साथ अस्पताल पहुंचे मनोज यादव ने रेलवे अस्पताल के ही डॉ.अनुराग यादव को बुलाया। उन्होंने जांच के बाद बालिका को जीवित बताया। इसके बाद परिजन बालिका को सिविल लाइंस स्थित निजी अस्पताल ले गए, लेकिन वहां उसे एडमिट नहीं किया गया। इसके बाद उसे फाफामऊ स्थित नर्सिंगहोम में भर्ती कराया गया है। परिजनों के अनुसार बालिका की हालत स्थिर बनी हुई है।
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इस घटना को लेकर रेलवे कर्मचारियों में रोष है। अस्पताल में जुटे कर्मचारियों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया और चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कर्मचारियों ने कहा कि मांग नहीं मानी गई तो आंदोलन होगा। साथ में नार्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन के पदाधिकारियों से वार्ता की। जोनल महामंत्री आरडी यादव का कहना है कि रेलवे प्रशासन से वार्ता की गई है। अफसरों ने आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। प्रदर्शन करने वालों में राम सिंह, अक्षरवर मिश्रा, सईद अहमद, एसके सिंह, एके सिंह, मनोज यादव, दिवाकर शुक्ला, महेंद्र यादव, परीक्षित पांडेय, एसपी यादव, अरविंद पांडेय, विजेंद्र यादव, राजकुमार, नागेंद्र बहादुर सिंह आदि शामिल रहे।
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रेलवे अस्पताल में ऐसा कुछ नहीं हुआ है। डॉ.अनुराग खुद मरीज को लेकर निजी अस्पताल तक गए। फिर भी पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे कुछ कहा जा सकता है। अजीत कुमार सिंह, सीपीआरओ
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