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अंधेरी कोठरियों में सिसकते अरमान
अंकुर त्रिपाठी/अमर उजाला इलाहाबाद
Updated Sat, 02 May 2015 02:17 AM IST
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जाने कितनी युवतियों के अरमान मीरगंज की अंधेरी कोठरियों में दम तोड़ रहे
हैं। सिर्फ अरमान ही नहीं चकनाचूर हुए, जिस्म की इस मंडी में जबरन धकेली गई
तमाम लड़कियों और औरतों ने बीमारी या लगातार यातना के चलते खुद दम तोड़
दिया। नेपाल, बिहार, राजस्थान, पश्चिम बंगाल समेत देश भर से लाचार लड़कियों
को मीरगंज लाकर कोठे में बेच दिया जाता है। फिर वे इस नरक से कभी बाहर
नहीं निकल पातीं। शादी, परिवार, अपने घर का ख्वाब उन अंधेरी कोठरियों में
खत्म हो जाता है।
पचास साल से भी ज्यादा पुरानी है बदनाम मीरगंज की कहानी। वहां तवायफों के मुजरे के लिए बने कोठों में पिछले तीन दशक से भी ज्यादा वक्त से देह की तिजारत हो रही है। एसपी सिटी कार्यालय और कोतवाली से कुछ ही फलांग की दूरी पर बसे मीरगंज के कोठों में महज सौ रुपये में जिस्म की भूख शांत करने का गलीच धंधा चल रहा है। कहने को पुलिस ने सैकड़ों बार इन कोठों पर छापे मारकर देह का धंधा कर रही लड़कियों-औरतों को गिरफ्तार किया। मगर जमानत पर छूटते ही धंधेबाज उन्हें फिर कोठरियों में खींच ले जाते हैं। पुलिस की शह पर मीरगंज के कोठों में कैद लड़कियों को यातना देकर ग्राहकों के सामने परोसने का कई बार खुलासा हो चुका है।
तीन साल पहले मीरगंज के नरक से छुटकारा पाने के लिए 17 साल की एक लड़की ने कोठे से छलांग लगा दी थी। उसके पैर टूट गए। पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। कोलकाता के बेहद गरीब परिवार की उस लड़की ने बताया कि उसे अच्छी तनख्वाह और खाने-कपडे का भरोसा देकर लाने के बाद एक औरत ने इस कोठे में बेच दिया था। उसके पहले भी दो लड़कियों ने कोठे से भागकर पुलिस को बताया था कि राजस्थान और बिहार से अपहरण कर उनका सौदा कोठे वाली औरतों से कर दिया गया।
पूर्व मंडलीय महिला उद्धार अधिकारी कमला पाठक ने बताया कि पुलिस छापेमारी में बरामद लड़कियों से बात करने पर उन्हें दुखद दास्तां सुनने को मिली। जाने कितनी नाबालिग लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाने के बाद उनके आशिकों ने ही लाकर मीरगंज के कोठों में धकेल दिया। वे प्रेमी से शादी और घर बसाने का सुनहरा सपना देखकर घर से भागीं लेकिन बदले में मिली उन्हें मीरगंज के कोठे की जिल्लत भरी जिंदगी। पेट की भूख मिटाने के लिए उन्हें बदले नाम के साथ तब तक रोते-सिसकते इन कोठरियों में घिनौना धंधा करते रहना पड़ता है जब तक उन्हें उम्र ढलने के कारण बेकार करार देकर बाहर नहीं निकाल दिया जाता। उन्हें मुक्ति दिलाने के नाम पर सक्रिय कई एनजीओ भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। एनजीओ की टीम पुलिस के साथ जाकर लड़कियों को कोठे से निकालती है पर पुनर्वास जैसे ठोस कदम नहीं उठाए जाने से दुबारा उनकी वापसी अंधेरी दुनिया में हो जाती है।
मीरगंज की बदनाम गलियों में कत्ल की यह कोई पहली घटना नहीं है। वहां पिछले एक दशक के दौरान कत्ल की तीन घटनाएं हो चुकी हैं जबकि मारपीट तो आम बात है। एक फौजी ने मीरगंज में पकड़कर पीटे जाने के बाद कोतवाली के हवालात में फांसी लगा ली थी। कई बार चाकूबाजी हो चुकी है और यह सब तब जबकि वहां पुलिस चौकी भी है। मगर इसी धंधे के चलते यह कमाऊ चौकियों में गिनी जाती है।
देह व्यापार के लिए कई जिलों में बदनाम मीरगंज में सेक्स वर्कर्स के चक्कर में अक्सर झगड़े होते हैं। मगर सितंबर 2013 की घटना ने पुलिस अफसरों को भी स्तब्ध कर दिया था। रविवार की शाम आईटीबीपी के दो जवानों को मीरगंज की गली में दौडा़कर गोली से उड़ा दिया गया।
वे दोनों एक कोठे में तवायफ मुस्कान के पास आए थे। उससे सौदा नहीं पट सका तो वे अपशब्द बोलते हुए चले गए। मुस्कान ने इस बारे में करेली में रहने वाले अपने आशिक फैसल को बताया तो वह घर से राइफल लेकर आ गया। फिर उसने दोनों जवानों को गली में खोजकर गोली मार दी। पुलिस ने फैसल और उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया तो उसने बताया कि मुस्कान से बदसलूकी करने की वजह से उसने आईटीबीपी के जवानों का कत्ल कर दिया। इस घटना ने पुलिस चौकसी की पोल खोलकर रख दी थी लेकिन सुधार तब भी नहीं हुआ। इस घटना से कुछ साल पहले एक फौजी को भी कोठे पर मारपीट के बाद पुलिस के हवाले कर दिया गया था।
पुलिस ने उसे हवालात में डालकर सेना को खबर दी। मगर अफसरों के आने से पहले ही वह हवालात में फांसी पर लटक गया। उसी दौरान कोठे के दलालों से झगड़े में एक फौजी को चाकू से गोदकर जख्मी कर दिया गया था। करीब दो साल पहले मीरगंज की गली में एक युवक की रक्तरंजित लाश मिली थी। उसकी पहचान नहीं हो सकी मगर शक है कि कोठे के दलालों ने ही उसे मारकर फेंक दिया था। वहां स्थापित बादशाही मंडी चौकी के पुलिसवाले जिस्मफरोशी के धंधे पर लगाम लगाने की बजाय इसे धन उगाही का जरिया बनाए हुए हैं। कोठों से निकलने वाले ग्राहकों को जबरन पकड़कर सिपाही उन्हें चौकी ले जाकर धमकाकर पैसे वसूलते हैं।
मीरगंज में देह व्यापार का घिनौना धंधा बंद कराने के लिए लंबे समय से आंदोलन कर रहे समाजसेवी सुनील चौधरी ने कोठे में मीरा की गला रेतकर हत्या के बाद शनिवार सुबह बादशाही मंडी पुलिस चौकी पर प्रदर्शन किया। पुलिसवाले बाहर निकलकर भाग गए तो सुनील चौधरी के साथ मौजूद समाजसेवी सबीहा मोहानी, हुमा कमाल, अनीता श्रीवास्तवस रिनी येसू ने मिलकर पुलिस चौकी के दरवाजे में ताला लगा दिया। जनहित संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष प्रमिल केसरवानी ने मांग की है कि मीरगंज के कोठों में जिस्मफरोशी बंद कराकर लड़कियों का पुनर्वास कराया जाए।
पचास साल से भी ज्यादा पुरानी है बदनाम मीरगंज की कहानी। वहां तवायफों के मुजरे के लिए बने कोठों में पिछले तीन दशक से भी ज्यादा वक्त से देह की तिजारत हो रही है। एसपी सिटी कार्यालय और कोतवाली से कुछ ही फलांग की दूरी पर बसे मीरगंज के कोठों में महज सौ रुपये में जिस्म की भूख शांत करने का गलीच धंधा चल रहा है। कहने को पुलिस ने सैकड़ों बार इन कोठों पर छापे मारकर देह का धंधा कर रही लड़कियों-औरतों को गिरफ्तार किया। मगर जमानत पर छूटते ही धंधेबाज उन्हें फिर कोठरियों में खींच ले जाते हैं। पुलिस की शह पर मीरगंज के कोठों में कैद लड़कियों को यातना देकर ग्राहकों के सामने परोसने का कई बार खुलासा हो चुका है।
तीन साल पहले मीरगंज के नरक से छुटकारा पाने के लिए 17 साल की एक लड़की ने कोठे से छलांग लगा दी थी। उसके पैर टूट गए। पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। कोलकाता के बेहद गरीब परिवार की उस लड़की ने बताया कि उसे अच्छी तनख्वाह और खाने-कपडे का भरोसा देकर लाने के बाद एक औरत ने इस कोठे में बेच दिया था। उसके पहले भी दो लड़कियों ने कोठे से भागकर पुलिस को बताया था कि राजस्थान और बिहार से अपहरण कर उनका सौदा कोठे वाली औरतों से कर दिया गया।
पूर्व मंडलीय महिला उद्धार अधिकारी कमला पाठक ने बताया कि पुलिस छापेमारी में बरामद लड़कियों से बात करने पर उन्हें दुखद दास्तां सुनने को मिली। जाने कितनी नाबालिग लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाने के बाद उनके आशिकों ने ही लाकर मीरगंज के कोठों में धकेल दिया। वे प्रेमी से शादी और घर बसाने का सुनहरा सपना देखकर घर से भागीं लेकिन बदले में मिली उन्हें मीरगंज के कोठे की जिल्लत भरी जिंदगी। पेट की भूख मिटाने के लिए उन्हें बदले नाम के साथ तब तक रोते-सिसकते इन कोठरियों में घिनौना धंधा करते रहना पड़ता है जब तक उन्हें उम्र ढलने के कारण बेकार करार देकर बाहर नहीं निकाल दिया जाता। उन्हें मुक्ति दिलाने के नाम पर सक्रिय कई एनजीओ भी कुछ नहीं कर पा रहे हैं। एनजीओ की टीम पुलिस के साथ जाकर लड़कियों को कोठे से निकालती है पर पुनर्वास जैसे ठोस कदम नहीं उठाए जाने से दुबारा उनकी वापसी अंधेरी दुनिया में हो जाती है।
मीरगंज की बदनाम गलियों में कत्ल की यह कोई पहली घटना नहीं है। वहां पिछले एक दशक के दौरान कत्ल की तीन घटनाएं हो चुकी हैं जबकि मारपीट तो आम बात है। एक फौजी ने मीरगंज में पकड़कर पीटे जाने के बाद कोतवाली के हवालात में फांसी लगा ली थी। कई बार चाकूबाजी हो चुकी है और यह सब तब जबकि वहां पुलिस चौकी भी है। मगर इसी धंधे के चलते यह कमाऊ चौकियों में गिनी जाती है।
देह व्यापार के लिए कई जिलों में बदनाम मीरगंज में सेक्स वर्कर्स के चक्कर में अक्सर झगड़े होते हैं। मगर सितंबर 2013 की घटना ने पुलिस अफसरों को भी स्तब्ध कर दिया था। रविवार की शाम आईटीबीपी के दो जवानों को मीरगंज की गली में दौडा़कर गोली से उड़ा दिया गया।
वे दोनों एक कोठे में तवायफ मुस्कान के पास आए थे। उससे सौदा नहीं पट सका तो वे अपशब्द बोलते हुए चले गए। मुस्कान ने इस बारे में करेली में रहने वाले अपने आशिक फैसल को बताया तो वह घर से राइफल लेकर आ गया। फिर उसने दोनों जवानों को गली में खोजकर गोली मार दी। पुलिस ने फैसल और उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया तो उसने बताया कि मुस्कान से बदसलूकी करने की वजह से उसने आईटीबीपी के जवानों का कत्ल कर दिया। इस घटना ने पुलिस चौकसी की पोल खोलकर रख दी थी लेकिन सुधार तब भी नहीं हुआ। इस घटना से कुछ साल पहले एक फौजी को भी कोठे पर मारपीट के बाद पुलिस के हवाले कर दिया गया था।
पुलिस ने उसे हवालात में डालकर सेना को खबर दी। मगर अफसरों के आने से पहले ही वह हवालात में फांसी पर लटक गया। उसी दौरान कोठे के दलालों से झगड़े में एक फौजी को चाकू से गोदकर जख्मी कर दिया गया था। करीब दो साल पहले मीरगंज की गली में एक युवक की रक्तरंजित लाश मिली थी। उसकी पहचान नहीं हो सकी मगर शक है कि कोठे के दलालों ने ही उसे मारकर फेंक दिया था। वहां स्थापित बादशाही मंडी चौकी के पुलिसवाले जिस्मफरोशी के धंधे पर लगाम लगाने की बजाय इसे धन उगाही का जरिया बनाए हुए हैं। कोठों से निकलने वाले ग्राहकों को जबरन पकड़कर सिपाही उन्हें चौकी ले जाकर धमकाकर पैसे वसूलते हैं।
मीरगंज में देह व्यापार का घिनौना धंधा बंद कराने के लिए लंबे समय से आंदोलन कर रहे समाजसेवी सुनील चौधरी ने कोठे में मीरा की गला रेतकर हत्या के बाद शनिवार सुबह बादशाही मंडी पुलिस चौकी पर प्रदर्शन किया। पुलिसवाले बाहर निकलकर भाग गए तो सुनील चौधरी के साथ मौजूद समाजसेवी सबीहा मोहानी, हुमा कमाल, अनीता श्रीवास्तवस रिनी येसू ने मिलकर पुलिस चौकी के दरवाजे में ताला लगा दिया। जनहित संघर्ष समिति के प्रदेश अध्यक्ष प्रमिल केसरवानी ने मांग की है कि मीरगंज के कोठों में जिस्मफरोशी बंद कराकर लड़कियों का पुनर्वास कराया जाए।