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एपीएस भर्ती में आयोग ने बदल दिया शासनादेश
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APS 2010 recruitment dispute
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सीबीआई जांच में हुआ खुलासा, एपीएस भर्ती में भी फंसे पूर्व सचिव
कसा शिकंजा, सीबीआई अपने साथ ले गई दिल्ली
प्रयागराज। अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती-2010 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने शासनादेश को ही बदल दिया था और इसके बाद मनमाने तरीके से भर्ती भी कर ली। सीबीआई जांच में यह खुलासा हुआ है। इस मामले भी आयोग के वही पूर्व सचिव फंसे हैं, जिन पर पीसीएस-2015 में हुई गड़बड़ी को लेकर सीबीआई ने शिकंजा कसा है। मंगलवार को सीबीआई की टीम दिल्ली लौट गई और अपने साथ पूर्व सचिव को भी ले गई।
सूत्रों के मुताबिक एपीएस-2010 के तहत 250 पदों पर हुई भर्ती के लिए मई 2015 में आयोग के तत्कालीन सचिव ने शासन को पत्र भेजकर अनुरोध किया था कि सर्विस रूल्स में निर्धारित कंप्यूटर सर्टिफिकेट (ट्रिपल सी) की अर्हता को समाप्त करते हुए केवल कंप्यूटर ज्ञान की अर्हता को लागू कर दिया जाए। यानी अभ्यर्थी ने कंप्यूटर से कोई भी कोर्स किया है, उसे परीक्षा में शामिल होने दिया जाए। शासन को यह अनुरोध पत्र तब भेजा गया था, जब एपीएस-2010 की चार चरणों में परीक्षा हो चुकी थी। ऐसे में शासन ने चयन प्रक्रिया के बीच अर्हता में बदलाव किए जाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
सूत्रों का कहना है कि इसके बाद भी तत्कालीन सचिव और परीक्षा नियंत्रक ने कंप्यूटर विशेषज्ञों की समिति से शासनादेश और सर्विस रूल्स के विपरीत एक ऐसा प्रस्ताव पारित करा लिया, जिसके तहत कंप्यूटर सर्टिफिकेट की अर्हता पूरी न करने वाले तमाम अभ्यर्थियों को पात्र घोषित कर दिया गया और इनमें से कई अभ्यर्थियों को अंतिम रूप से चयनित भी घोषित कर दिया गया। सीबीआई जांच के दौरान यह खुलासा होने के बाद इस मामले में भी वह पूर्व सचिव फंस रहे हैं, जो पीसीएस-2015 की ओएमआर शीट को नष्ट किए जाने के मामले में जांच के घेरे में हैं।
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सीबीआई की टीम मंगलवार को दिल्ली लौट गई और पूछताछ के लिए अपने साथ पूर्व सचिव को भी ले गई। इसके अलावा आयोग के तकरीबन एक दर्जन अधिकारियों और कर्मचारियों को भी दिल्ली बुलाया गया है। गौरतलब है कि सीबीआई ने जब आयोग की परीक्षाओं की जांच शुरू की थी, उस वक्त एपीएस भर्ती-2010 सीबीआई की जांच के दायरे में नहीं थे लेकिन, इसमें गड़बड़ी को लेकर सीबीआई के पास तमाम शिकायतें पहुंचीं। शुरुआत जांच में सीबीआई को कई गड़बड़ियां मिलीं तो इस भर्ती की आधिकारिक रूप से जांच के लिए सीबीआई ने शासन से विशेष अनुमति ली। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए मामलों का भी खुलासा होता जा रहा है।
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कसा शिकंजा, सीबीआई अपने साथ ले गई दिल्ली
प्रयागराज। अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती-2010 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने शासनादेश को ही बदल दिया था और इसके बाद मनमाने तरीके से भर्ती भी कर ली। सीबीआई जांच में यह खुलासा हुआ है। इस मामले भी आयोग के वही पूर्व सचिव फंसे हैं, जिन पर पीसीएस-2015 में हुई गड़बड़ी को लेकर सीबीआई ने शिकंजा कसा है। मंगलवार को सीबीआई की टीम दिल्ली लौट गई और अपने साथ पूर्व सचिव को भी ले गई।
सूत्रों के मुताबिक एपीएस-2010 के तहत 250 पदों पर हुई भर्ती के लिए मई 2015 में आयोग के तत्कालीन सचिव ने शासन को पत्र भेजकर अनुरोध किया था कि सर्विस रूल्स में निर्धारित कंप्यूटर सर्टिफिकेट (ट्रिपल सी) की अर्हता को समाप्त करते हुए केवल कंप्यूटर ज्ञान की अर्हता को लागू कर दिया जाए। यानी अभ्यर्थी ने कंप्यूटर से कोई भी कोर्स किया है, उसे परीक्षा में शामिल होने दिया जाए। शासन को यह अनुरोध पत्र तब भेजा गया था, जब एपीएस-2010 की चार चरणों में परीक्षा हो चुकी थी। ऐसे में शासन ने चयन प्रक्रिया के बीच अर्हता में बदलाव किए जाने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था।
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सूत्रों का कहना है कि इसके बाद भी तत्कालीन सचिव और परीक्षा नियंत्रक ने कंप्यूटर विशेषज्ञों की समिति से शासनादेश और सर्विस रूल्स के विपरीत एक ऐसा प्रस्ताव पारित करा लिया, जिसके तहत कंप्यूटर सर्टिफिकेट की अर्हता पूरी न करने वाले तमाम अभ्यर्थियों को पात्र घोषित कर दिया गया और इनमें से कई अभ्यर्थियों को अंतिम रूप से चयनित भी घोषित कर दिया गया। सीबीआई जांच के दौरान यह खुलासा होने के बाद इस मामले में भी वह पूर्व सचिव फंस रहे हैं, जो पीसीएस-2015 की ओएमआर शीट को नष्ट किए जाने के मामले में जांच के घेरे में हैं।
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सीबीआई की टीम मंगलवार को दिल्ली लौट गई और पूछताछ के लिए अपने साथ पूर्व सचिव को भी ले गई। इसके अलावा आयोग के तकरीबन एक दर्जन अधिकारियों और कर्मचारियों को भी दिल्ली बुलाया गया है। गौरतलब है कि सीबीआई ने जब आयोग की परीक्षाओं की जांच शुरू की थी, उस वक्त एपीएस भर्ती-2010 सीबीआई की जांच के दायरे में नहीं थे लेकिन, इसमें गड़बड़ी को लेकर सीबीआई के पास तमाम शिकायतें पहुंचीं। शुरुआत जांच में सीबीआई को कई गड़बड़ियां मिलीं तो इस भर्ती की आधिकारिक रूप से जांच के लिए सीबीआई ने शासन से विशेष अनुमति ली। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नए मामलों का भी खुलासा होता जा रहा है।