फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Application to Governor to save Shabnam, who killed seven family members, from hanging

शबनम केस: महिला होने के नाते फांसी न देने की मांग, राज्यपाल को भेजी 'सात खून माफ' की अर्जी

Fri, 23 Jul 2021 09:14 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 23 Jul 2021 09:14 PM IST
सार

हाईकोर्ट की अधिवक्ता ने महिला होने के नाते फांसी नहीं देने की मांग उठाई है। अधिवक्ता ने आजाद भारत में अब तक किसी भी महिला को फांसी नहीं दिए जाने का दावा किया है।

विज्ञापन
Application to Governor to save Shabnam, who killed seven family members, from hanging
शबनम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपने ही पूरे परिवार की बेरहमी से हत्या कर देने वाली शबनम को फांसी की सजा से बचाने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की महिला अधिवक्ता ने पहल की है। परिवार के सात लोगों को मौत के घाट उतारने वाली शबनम की फांसी माफ करने और उसे उम्रकैद में तब्दील करने के लिए अधिवक्ता सहर नकवी ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को पत्र लिखा है।

विज्ञापन


पत्र में सहर नकवी ने शबनम की फांसी की सजा को मानवीय आधार पर उम्र कैद में बदले जाने की मांग की है। सहर नकवी की अर्जी में शबनम की फांसी को उम्र कैद में बदले जाने के लिए जो दलीलें दी गईं हैं, उनमें सबसे प्रमुख यह है कि आजाद भारत में आज तक किसी भी महिला को फांसी नहीं हुई है। इसके साथ ही जेल में जन्मे शबनम के 13 साल के बेटे के भविष्य को लेकर भी दुहाई दी गई है। 

विज्ञापन

Application to Governor to save Shabnam, who killed seven family members, from hanging
शबनम और सलीम - फोटो : अमर उजाला

सहर नकवी का कहना है कि शबनम को फांसी देना आजाद भारत में किसी महिला को फांसी देने का पहला वाकया होगा और यदि ऐसा होता है तो समूची दुनिया में भारत और यहां की महिलाओं की छवि खराब होगी, क्योंकि देश में महिलाओं को देवी की तरह पूजने व सम्मान देने की पुरानी परंपरा है। उनके मुताबिक वह शबनम के गुनाह या उसकी सजा को लेकर कोई सवाल नहीं खड़ी कर रही हैं, बल्कि यह चाहती हैं कि उसकी फांसी की सजा को सिर्फ उम्र कैद में तब्दील कर दिया जाए।

अर्जी में यह भी दलील दी गई कि शबनम को फांसी दिए जाने से जेल में जन्मे उसके इकलौते बेटे ताज उर्फ बिट्टू पर गलत और नकारात्मक असर पड़ सकता है। शबनम को फांसी होने पर समाज उसके बेटे को हमेशा ताना मारेगा, उसका मजाक उड़ाएगा और उससे दूरी बना सकता है। इस वजह से बेटे का मानसिक विकास प्रभावित हो सकता और उसका भविष्य खराब हो सकता है। अर्जी में दलील दी गई है कि मां के गुनाहों की सजा उसके बेटे को मिलना कतई ठीक नहीं होगा।

Application to Governor to save Shabnam, who killed seven family members, from hanging
शबनम - फोटो : अमर उजाला
इस अर्जी को गवर्नर आनंदी बेन पटेल ने नियमों के मुताबिक विचार करते हुए उचित फैसला लेने के लिए यूपी सरकार को भेज दिया है। गवर्नर सचिवालय ने इस बारे में सूबे के कारागार विभाग के प्रमुख सचिव को इस बारे में औपचारिक लेटर भी भेज दिया है। गवर्नर सचिवालय से अर्जी यूपी सरकार को ट्रांसफर किए जाने की जानकारी मिलने के बाद वकील सहर नकवी का कहना है कि वह जल्द ही कारागार विभाग के प्रमुख सचिव से मुलाकात कर उन्हें फाइल सौपेंगी और उनके यहां भी अपनी मांग को लेकर जोरदार पैरवी करेंगी।

उल्लेखनीय है कि अप्रैल 2008 में अमरोहा के बावनखेड़ी में शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने ही परिवार के सात लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी थी। अदालत ने इस मामले में शबनम और सलीम दोनों को फांसी की सजा सुनाई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed