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एपीओ-2015 मेंस का परिणाम घोषित
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 21 Jan 2017 01:32 AM IST
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लिखित परीक्षा 28 फरवरी को ली गई थी।
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उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने सहायक अभियोजन अधिकारी (एपीओ) मुख्य परीक्षा-2015 का परिणाम शुक्रवार को घोषित कर दिया। कुल 372 पदों के लिए 1244 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए हैं। साक्षात्कार फरवरी के दूसरे सप्ताह के बाद शुरू होगा।
मुख्य परीक्षा 2015 में 27 और 28 दिसंबर को इलाहाबाद तथा लखनऊ में हुई थी। इसमें कुल 7196 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। सचिव अटल कुमार राय ने बताया कि अभ्यर्थियों के प्राप्तांक और कटऑफ अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही जारी किए जाएंगे। इसलिए इस संबंध में जनसूचना अधिकार के अंतर्गत कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
पीसीएस-2017 के परीक्षा प्रारूप को लेकर बने असमंजस पर प्रतियोगियों का धैर्य भी जवाब देने लगा है। स्थिति स्पष्ट करने के लिए उन्होंने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का घेराव किया और ज्ञापन सौंपा। वे जल्द से जल्द विज्ञापन जारी करने की भी मांग कर रहे थे।
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आयोग की प्राथमिकता में है कि पीसीएस मुख्य परीक्षा सिविल सेवा की तर्ज पर कराई जाएगा। यह व्यवस्था 2017 से ही लागू करने की तैयारी है, लेकिन विधान सभा चुनाव के मद्देनजर आचार संहिता लागू होने की वजह से इस प्रस्ताव लेकर गतिरोध बन गया है। ऐसे में आयोग के अफसरों का एक वर्ग इस बार पुराने पैटर्न पर ही परीक्षा कराने की बात कर रहा है, जिससे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अंतर्गत 19 मार्च को प्रारंभिक तथा जुलाई में मुख्य परीक्षा कराई जा सके। हालांकि अध्यक्ष डॉ.अनुरुद्ध यादव का कहना है कि 2017 से ही सिविल सेवा का पैटर्न लागू करने के लिए विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। चूंकि इसी महीने में विज्ञापन संभावित है। ऐसे में यह भी चर्चा है कि मुख्य परीक्षा के प्रारूप पर दोबारा नोटिफिकेशन जारी किया जा सकता है।
असमंजस की इस स्थिति को दूर करने की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के बैनर तले प्रतियोगियों का आयोग पर जमावड़ा हुआ। संयुक्त सचिव को ज्ञापन सौंपने वाले प्रतियोगियाें ने पीसीएस में सिविल सेवा का प्रारूप लागू करने की मांग दोहराई, लेकिन साथ में यह भी कहा कि इसकी सूचना समय रहते दे दी जाए। ताकि, उन्हें तैयारी का मौका मिल सके। वे एक ही भर्ती के लिए दो बार नोटिफिकेशन के भी विरोध में थे। उनका कहना था कि स्थिति स्पष्ट करते हुए आयोग जल्द से जल्द विज्ञापन जारी करे। ज्ञापन सौंपने वालों में अवनीश पांडेय, सोनू श्रीवास्तव, देवेंद्र सोनतिया, संतोष उपाध्याय, केदारनाथ मिश्र, विजय सिंह आदि शामिल रहे।
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मुख्य परीक्षा 2015 में 27 और 28 दिसंबर को इलाहाबाद तथा लखनऊ में हुई थी। इसमें कुल 7196 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। सचिव अटल कुमार राय ने बताया कि अभ्यर्थियों के प्राप्तांक और कटऑफ अंतिम परिणाम घोषित होने के बाद ही जारी किए जाएंगे। इसलिए इस संबंध में जनसूचना अधिकार के अंतर्गत कोई आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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पीसीएस-2017 के परीक्षा प्रारूप को लेकर बने असमंजस पर प्रतियोगियों का धैर्य भी जवाब देने लगा है। स्थिति स्पष्ट करने के लिए उन्होंने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग का घेराव किया और ज्ञापन सौंपा। वे जल्द से जल्द विज्ञापन जारी करने की भी मांग कर रहे थे।
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आयोग की प्राथमिकता में है कि पीसीएस मुख्य परीक्षा सिविल सेवा की तर्ज पर कराई जाएगा। यह व्यवस्था 2017 से ही लागू करने की तैयारी है, लेकिन विधान सभा चुनाव के मद्देनजर आचार संहिता लागू होने की वजह से इस प्रस्ताव लेकर गतिरोध बन गया है। ऐसे में आयोग के अफसरों का एक वर्ग इस बार पुराने पैटर्न पर ही परीक्षा कराने की बात कर रहा है, जिससे पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अंतर्गत 19 मार्च को प्रारंभिक तथा जुलाई में मुख्य परीक्षा कराई जा सके। हालांकि अध्यक्ष डॉ.अनुरुद्ध यादव का कहना है कि 2017 से ही सिविल सेवा का पैटर्न लागू करने के लिए विकल्पों पर विचार किया जा रहा है। चूंकि इसी महीने में विज्ञापन संभावित है। ऐसे में यह भी चर्चा है कि मुख्य परीक्षा के प्रारूप पर दोबारा नोटिफिकेशन जारी किया जा सकता है।
असमंजस की इस स्थिति को दूर करने की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के बैनर तले प्रतियोगियों का आयोग पर जमावड़ा हुआ। संयुक्त सचिव को ज्ञापन सौंपने वाले प्रतियोगियाें ने पीसीएस में सिविल सेवा का प्रारूप लागू करने की मांग दोहराई, लेकिन साथ में यह भी कहा कि इसकी सूचना समय रहते दे दी जाए। ताकि, उन्हें तैयारी का मौका मिल सके। वे एक ही भर्ती के लिए दो बार नोटिफिकेशन के भी विरोध में थे। उनका कहना था कि स्थिति स्पष्ट करते हुए आयोग जल्द से जल्द विज्ञापन जारी करे। ज्ञापन सौंपने वालों में अवनीश पांडेय, सोनू श्रीवास्तव, देवेंद्र सोनतिया, संतोष उपाध्याय, केदारनाथ मिश्र, विजय सिंह आदि शामिल रहे।