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Prayagraj : अनूप जलोटा बोले- सफलता का एक मंत्र शास्त्रीय संगीत का करें अध्ययन

Fri, 27 Mar 2026 07:14 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 27 Mar 2026 07:14 PM IST
सार

भजन सम्राट, प्रसिद्ध संगीतकार और गजल गायक पद्मश्री अनूप जलोटा प्रयाग संगीत समिति के 86वें संगीत सम्मेलन में प्रस्तुति देने प्रयागराज पहुंचे। इस दौरान अमर उजाला के लिए संवाद न्यूज एजेंसी से खास बातचीत में उन्होंने संगीत के क्षेत्र में सफलता के लिए युवाओं को शास्त्रीय संगीत का अध्ययन करने की सलाह दी।

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Anup Jalota said – one mantra for success is to study classical music
अनूप जलोटा। - फोटो : संवाद।

विस्तार

भजन सम्राट, प्रसिद्ध संगीतकार और गजल गायक पद्मश्री अनूप जलोटा प्रयाग संगीत समिति के 86वें संगीत सम्मेलन में प्रस्तुति देने प्रयागराज पहुंचे। इस दौरान अमर उजाला के लिए संवाद न्यूज एजेंसी से खास बातचीत में उन्होंने संगीत के क्षेत्र में सफलता के लिए युवाओं को शास्त्रीय संगीत का अध्ययन करने की सलाह दी।

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प्रश्न-आपकी संगीत यात्रा की शुरुआत कैसे हुई?

उत्तर- मेरा जन्म जिस परिवार में हुआ, वहां संगीत ही संगीत है। पिताजी पुरुषोत्तम दास जलोटा को शास्त्रीय गायन के लिए भारत सरकार से पद्मश्री मिला। पिताजी से सीखते-सीखते मैं खुद भी संगीत के रंग में रंग गया।
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प्रश्न- आज के समय में भजन में क्या बदलाव देख रहे हैं?

उत्तर- आज जो लोग भजन गा रहे हैं, उसमें शास्त्रीय संगीत का उपयोग नहीं कर रहे हैं। यह अच्छा नहीं है। शास्त्रीय संगीत रागों में गाया जाता है, जो इसमें गाएंगे प्रसिद्ध हो जाएंगे।
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प्रश्न- आपको कई पुरस्कार मिले, इनमें सबसे खास कौन सा है?

उत्तर- पद्मश्री बहुत विशेष है। पिताजी को भी भारत सरकार की ओर से पद्मश्री दिया गया। हम दोनों अकेले पिता-पुत्र हैं, जिन्हें गायन में पद्मश्री मिला है।

प्रश्न- क्या आज की युवा पीढ़ी भजन गायन की ओर आकर्षित हो रही है?

उत्तर- बहुत, अब तो भजन क्लबिंग शुरू हो गई है। इस समय भजन जैमिंग का युवाओं में बहुत क्रेज है।

प्रश्न- क्या संगीत बनाने में एआई का प्रयोग हो रहा है?

उत्तर- हां, एआई का प्रयोग हो रहा है। इसमें कोई बुराई नहीं है। इससे संगीत का नियोजन होता है, जिसका प्रयोग संगीत के बीच-बीच में किया जाता है।

प्रश्न- क्या आपको लगता है कि एआई भविष्य में पारंपरिक गायकों के लिए चुनौती बन सकता है?

उत्तर- चुनौती नहीं, मदद है। कम समय में वही काम हो सकता है, जिसमें पहले चार गुना समय लगता था।

प्रश्न- क्या आपने भक्ति संगीत में नए प्रयोग किए हैं?

उत्तर- बहुत से प्रयोग किए हैं, उन्हीं प्रयोगों के कारण भक्ति संगीत प्रसिद्ध हुआ है। मैंने अपने भक्ति संगीत में सरल शब्दों का प्रयोग किया है।

प्रश्न- युवा कलाकारों को क्या संदेश देना चाहेंगे?

उत्तर- विशेष संदेश है कि जिनको संगीत के क्षेत्र में सफलता पानी है, उन्हें शास्त्रीय संगीत का अध्ययन करना चाहिए।

प्रश्न- नए कलाकारों के लिए इस क्षेत्र में कितनी चुनौती है?

उत्तर- यह प्रेम का क्षेत्र है, इससे प्रेम करें। शास्त्रीय संगीत से सभी चुनौतियां समाप्त हो जाएंगी।

प्रश्न- प्रयागराज आकर आपको कैसा लग रहा है, यहां के लोगों को क्या कहना चाहेंगे?

उत्तर- मैं प्रयागराज पिछले 60 वर्षों से आ रहा हूं। यहां आकर आनंद मिलता है। यहां के लोगों में भक्ति और संगीत दोनों है। यहां लेटे हनुमान जी के दर्शन से बैटरी चार्ज हो जाती है।


प्रश्न- प्रयाग संगीत समिति के सुधार के लिए आप क्या सुझाव देंगे?

उत्तर- उत्तर प्रदेश सरकार को प्रयाग संगीत समिति की बागडोर अपने हाथों में ले लेनी चाहिए, जिससे यहां की संगीत शिक्षा से लेकर सुविधाओं में सुधार हो सके। जैसे लखनऊ में भातखंडे

स्कृति विश्वविद्यालय की स्थिति में सुधार किया गया है। वैसे ही प्रयाग संगीत समिति में भी सुधार की आवश्यकता है।

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