{"_id":"57f803414f1c1b6d5326fcc4","slug":"antu-not-relieve-parents-of-former-minister","type":"story","status":"publish","title_hn":"पूर्व मंत्री अंटू के माता-पिता को राहत नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पूर्व मंत्री अंटू के माता-पिता को राहत नहीं
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 08 Oct 2016 02:03 AM IST
विज्ञापन
कोर्ट
- फोटो : डेमो फोटो
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद। एनआरएचएम घोटाले में आरोपी पूर्व मंत्री अनंत कुमार मिश्र उर्फ अंटू मिश्र और उनके माता-पिता विमला मिश्रा और दिनेश चंद्र मिश्र को हाईकोर्ट ने राहत नहीं दी है। सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद द्वारा जारी गैरजमानती वारंट और कुर्की के नोटिस को चुनौती देने वाली उनकी याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने चार नवंबर तक सीबीआई अदालत में सरेंडर करने का निर्देश दिया है। याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अरुण टंडन ने कहा कि विचारण न्यायालय के क्षेत्राधिकार पर जो सवाल उठाए गए हैं उसकी अर्जी पर सीबीआई अदालत विचार कर निस्तारण करे।
याचिका में आधार लिया गया कि सीबीआई कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल होने के पहले ही दिन उस पर संज्ञान लेते हुए गैरजमानती वारंट जारी कर दिया। याची की ओर से सीबीआई कोर्ट के क्षेत्राधिकार पर आपत्ति करते हुए अर्जी दाखिल की गई। इसका निस्तारण करने से पूर्व ही उनको कुर्की का नोटिस जारी कर दिया गया। वकीलों ने शिवकुमार परियार केस की नजीर पेश करते हुए कहा कि क्षेत्राधिकार पर आपत्ति का निस्तारण किए बिना उनके खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई करना अनुचित है।
यह भी कहा गया कि अंटू मिश्र एनआरएचएम से संबंधित विभाग के मंत्री नहीं थे। उनका इस घोटाले से कोई लेना देना नहीं है। उनके माता-पिता पर घोटाले में शामिल होने का आरोप नहीं है। दोनों पर आपराधिक उत्प्रेरण का आरोप है। सीबीआई का आरोप है कि छह मुख्य चिकित्साधिकारियों से 22 करोड़ रुपये की रिश्वत लेकर अपने माता-पिता की कंपनी में लगाया है जबकि कंपनी 50 लाख रुपये की भी नहीं है। बिना पर्याप्त सबूत के सीबीआई ने पूरे परिवार को फंसा दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
याचिका में आधार लिया गया कि सीबीआई कोर्ट ने चार्जशीट दाखिल होने के पहले ही दिन उस पर संज्ञान लेते हुए गैरजमानती वारंट जारी कर दिया। याची की ओर से सीबीआई कोर्ट के क्षेत्राधिकार पर आपत्ति करते हुए अर्जी दाखिल की गई। इसका निस्तारण करने से पूर्व ही उनको कुर्की का नोटिस जारी कर दिया गया। वकीलों ने शिवकुमार परियार केस की नजीर पेश करते हुए कहा कि क्षेत्राधिकार पर आपत्ति का निस्तारण किए बिना उनके खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई करना अनुचित है।
विज्ञापन
यह भी कहा गया कि अंटू मिश्र एनआरएचएम से संबंधित विभाग के मंत्री नहीं थे। उनका इस घोटाले से कोई लेना देना नहीं है। उनके माता-पिता पर घोटाले में शामिल होने का आरोप नहीं है। दोनों पर आपराधिक उत्प्रेरण का आरोप है। सीबीआई का आरोप है कि छह मुख्य चिकित्साधिकारियों से 22 करोड़ रुपये की रिश्वत लेकर अपने माता-पिता की कंपनी में लगाया है जबकि कंपनी 50 लाख रुपये की भी नहीं है। बिना पर्याप्त सबूत के सीबीआई ने पूरे परिवार को फंसा दिया है।
विज्ञापन