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Prayagraj News: गबन के आरोपी ग्राम पंचायत अधिकारी की अग्रिम जमानत मंजूर
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीएम आवास योजना की धनराशि लाभार्थी से भिन्न व्यक्ति के खाते में स्थानांतरित कराने के आरोपी ग्राम पंचायत अधिकारी की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली है। यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की अदालत ने याची राकेश कुमार उर्फ राकेश कटियार की ओर से दाखिल अग्रिम जमानत अर्जी पर अधिवक्ता सुनील चौधरी को सुनकर दिया।
मामला कानपुर देहात के राजपुर थाना क्षेत्र का है। कमलापुर गांव निवासी आलोक ने ग्राम प्रधान अनिल कुमार, ग्राम पंचायत सचिव रिंकल और अन्य एक अन्य रामचंद्र के खिलाफ पीएम आवास योजना वर्ष 2018-19 में शासन से आए रुपये के गबन का मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद खंड विकास अधिकारी ने मामले की जांच की तो याची ग्राम पंचायत अधिकारी का नाम प्रकाश में आया। आरोप लगा कि आलोक के नाम से आए धन को धोखाधड़ी कर रामचंद्र के खाते में यह कहते हुए स्थानांतरित करवा दिया गया कि रामचंद्र और आलोक एक ही व्यक्ति है। आलोक का उपनाम रामचंद्र है।
अधिवक्ता सुनील चौधरी ने दलील दी कि याची सेवानिवृत हो चुका है। रामचंद्र के आवेदन को सत्यापन के स्तर पर ही खारिज किया जा चुका था। योजना में तहत धनराशि स्थानांतरण का काम खंड विकास अधिकारी कार्यालय के स्तर से होता है। खंड विकास अधिकारी को याची के खिलाफ दिया गया शिकायती पत्र हलफनामे से समर्थित नहीं था। इस मामले में याची की कोई भूमिका नहीं है, उसे साजिशन फंसाया जा रहा है। कोर्ट ने याची की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली।
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मामला कानपुर देहात के राजपुर थाना क्षेत्र का है। कमलापुर गांव निवासी आलोक ने ग्राम प्रधान अनिल कुमार, ग्राम पंचायत सचिव रिंकल और अन्य एक अन्य रामचंद्र के खिलाफ पीएम आवास योजना वर्ष 2018-19 में शासन से आए रुपये के गबन का मुकदमा दर्ज कराया था। इसके बाद खंड विकास अधिकारी ने मामले की जांच की तो याची ग्राम पंचायत अधिकारी का नाम प्रकाश में आया। आरोप लगा कि आलोक के नाम से आए धन को धोखाधड़ी कर रामचंद्र के खाते में यह कहते हुए स्थानांतरित करवा दिया गया कि रामचंद्र और आलोक एक ही व्यक्ति है। आलोक का उपनाम रामचंद्र है।
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अधिवक्ता सुनील चौधरी ने दलील दी कि याची सेवानिवृत हो चुका है। रामचंद्र के आवेदन को सत्यापन के स्तर पर ही खारिज किया जा चुका था। योजना में तहत धनराशि स्थानांतरण का काम खंड विकास अधिकारी कार्यालय के स्तर से होता है। खंड विकास अधिकारी को याची के खिलाफ दिया गया शिकायती पत्र हलफनामे से समर्थित नहीं था। इस मामले में याची की कोई भूमिका नहीं है, उसे साजिशन फंसाया जा रहा है। कोर्ट ने याची की अग्रिम जमानत अर्जी मंजूर कर ली।
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