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जामताड़ा गिरोह का एक और मददगार गिरफ्तार
Tue, 27 Jul 2021 12:52 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Tue, 27 Jul 2021 12:52 AM IST
सार
- फर्जी आईडी पर सिम लेकर उपलब्ध कराता था नंबर, इसी नंबर पर खुलते थे फर्जी पेमेंट अकाउंट
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arrested
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जामताड़ा में बैठकर लोगों केखाते खाली करने वाले गिरोह का एक और मददगार सोमवार को पकड़ा गया। पुलिस ने अवनीश सिंह नाम के इस आरोपी को करेली से गिरफ्तार किया। पुलिस का दावा है कि पेमेंट सर्विस सेंटर चलाने वाला यह आरोपी अपनी दुकान पर आने वाले ग्राहकों के थंब इंप्रेशन व आईडी पर फर्जी तरीकेसे सिम जारी कराता था। इसके बाद इन नंबरों को पूर्व में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए धीरज पांडेय व राहुल को दे देता था जो पेमेंट एप पर फर्जी अकाउंट खोलकर इन्हीं खातों में जालसाजी कर उड़ाए गए रुपये मंगवाते थे।
पकड़ा गया अवनीश गाजीपुर के भुडकुड़ा स्थित रामपुर बलभद्र का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक वह मामले में वांछित चल रहे नारायण सिंह का भाई है जिसने धीरज व राहुल को एक लाख लोगों का डेटा बेस उपलब्ध कराया था। जिसका इस्तेमाल फर्जीवाड़े के लिए किया जाता था। अवनीश ने पूछताछ में बताया है कि उसका भाई नारायण सॉफ्टवेयर डेवलपर कंपनी में काम करने वाले कुछ लोगों से जुड़ा था और उनसे ही उसकेपास डाटा बेस आय था। पुलिस ने बताया कि मामले में वांछित नारायण की तलाश करते हुए उसकेनंबर की डिटेल निकाली गई तो पता चला कि वह मूल रूप से गाजीपुर का रहने वाला है।
वहां पहुंचकर पड़ताल की गई तो वह गायब मिला लेकिन उसका भाई अवनीश मिला। अवनीश केमोबाइल नंबर की पड़ताल की गई तो पता चला कि वह धीरज व राहुल केलगातार संपर्क में था। कड़ाई से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि पेमेंट एप अकाउंट खोलने के लिए धीरज व राहुल को फर्जी आईडी पर जारी कराए गए सिम का नंबर वह ही उपलब्ध कराता था। जिसकेबाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। खुल्दाबाद इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि फिलहाल उसके पांच व नारायण के आठ बैंक खातों का पता चला है। जानकारी की जा रही है कि इन खातों में हाल-फिलहाल कितने क ट्रांजक्शन हुआ। उसकेकब्जे से तीन मोबाइल फोन व चार सिम कार्ड बरामद किए गए हैं।
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क्या था मामला
जामताड़ा में बैठे साइबर धोखाधड़ी गिरोह के दो मददगारों को जून में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इनमें प्रतापगढ़ केफतनपुर निवासी धीरज पांडेय व रानीगंज केदरियापुर पॉवर हाउस निवासी राहुल पांडेय शामिल थे। दोनों भोले- भाले लोगों का विभिन्न डिजिटल पेमेंट बैंक प्लेटफार्म पर अकाउंट खोलवाते थे। फिर इसकी जानकारी जामताड़ा गिरोह को देते थे जिसकेसदस्य जालसाजी कर लोगों केखाते से उड़ाई गई रकम इन्हीं मनी वालेट अकाउंट में ट्रांसफर करते थे। इसके बाद कमीशन काटकर यह रकम दोनों जामताड़ा गिरोह केसदस्यों केपास भेज देते थे।
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पकड़ा गया अवनीश गाजीपुर के भुडकुड़ा स्थित रामपुर बलभद्र का रहने वाला है। पुलिस के मुताबिक वह मामले में वांछित चल रहे नारायण सिंह का भाई है जिसने धीरज व राहुल को एक लाख लोगों का डेटा बेस उपलब्ध कराया था। जिसका इस्तेमाल फर्जीवाड़े के लिए किया जाता था। अवनीश ने पूछताछ में बताया है कि उसका भाई नारायण सॉफ्टवेयर डेवलपर कंपनी में काम करने वाले कुछ लोगों से जुड़ा था और उनसे ही उसकेपास डाटा बेस आय था। पुलिस ने बताया कि मामले में वांछित नारायण की तलाश करते हुए उसकेनंबर की डिटेल निकाली गई तो पता चला कि वह मूल रूप से गाजीपुर का रहने वाला है।
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वहां पहुंचकर पड़ताल की गई तो वह गायब मिला लेकिन उसका भाई अवनीश मिला। अवनीश केमोबाइल नंबर की पड़ताल की गई तो पता चला कि वह धीरज व राहुल केलगातार संपर्क में था। कड़ाई से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि पेमेंट एप अकाउंट खोलने के लिए धीरज व राहुल को फर्जी आईडी पर जारी कराए गए सिम का नंबर वह ही उपलब्ध कराता था। जिसकेबाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। खुल्दाबाद इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि फिलहाल उसके पांच व नारायण के आठ बैंक खातों का पता चला है। जानकारी की जा रही है कि इन खातों में हाल-फिलहाल कितने क ट्रांजक्शन हुआ। उसकेकब्जे से तीन मोबाइल फोन व चार सिम कार्ड बरामद किए गए हैं।
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क्या था मामला
जामताड़ा में बैठे साइबर धोखाधड़ी गिरोह के दो मददगारों को जून में पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इनमें प्रतापगढ़ केफतनपुर निवासी धीरज पांडेय व रानीगंज केदरियापुर पॉवर हाउस निवासी राहुल पांडेय शामिल थे। दोनों भोले- भाले लोगों का विभिन्न डिजिटल पेमेंट बैंक प्लेटफार्म पर अकाउंट खोलवाते थे। फिर इसकी जानकारी जामताड़ा गिरोह को देते थे जिसकेसदस्य जालसाजी कर लोगों केखाते से उड़ाई गई रकम इन्हीं मनी वालेट अकाउंट में ट्रांसफर करते थे। इसके बाद कमीशन काटकर यह रकम दोनों जामताड़ा गिरोह केसदस्यों केपास भेज देते थे।