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गुमनाम फाइलों से ‘जिंदा’ होगा इतिहास
सुरभि गुप्ता, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 14 Aug 2016 02:24 AM IST
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झंडा
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जिला प्रशासन के स्टोर में अरसे से दबे सैकड़ों गुमनाम दस्तावेज अब सामने आ सकेंगे। ये दस्तावेज इलाहाबाद के उस इतिहास को जिंदा करेंगे जो अब तक दफन था। प्रशासन की ओर से क्षेत्रीय अभिलेखागार को जल्द ही सुपुर्द की जाने वाली 510 फाइलों में 1857 से 1968 तक का इतिहास दर्ज है। इसमें स्वतंत्रता आंदोलन में इलाहाबाद के लोगों के योगदान सहित प्रमुख घटनाएं दर्ज हैं।
जिला प्रशासन स्टोर में अभिलेखागार की टीम बीते एक वर्ष से दस्तावेजों को खंगाल रही थी। वर्ष भर की मेहनत के बाद 510 फाइलों का पता चल सका है जिसमें सविनय अवज्ञा आंदोलन, किसान आंदोलन, लगान आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन, सत्याग्रहों में संगम नगरी के योगदान सहित अन्य प्रमुख घटनाओं का जिक्र है।
माना जा रहा है कि इन फाइलों में नवाबगंज, शंकरगढ़, सरायअकिल, हंडिया, मुट्ठीगंज, फूलपुर, सराय ममरेज, कर्नलगंज, करछना, घूरपुर, दारागंज, मांडा, मेजा थानों में दर्ज मुकदमों का विवरण है। इनसे ग्रामीण क्षेत्रों में हुए आंदोलनों के दौरान महिलाओं और पुरुषों की सहभागिता का पता भी चल सकेगा। इसके अतिरिक्त कई फाइलें माघ मेले की तैयारियों से जुड़ी जानकारी दे सकेंगी। क्षेत्रीय अभिलेख अधिकारी अमित कुमार अग्निहोत्री के मुताबिक फाइलें अभिलेखागार तक लाने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा जा चुका है। अभिलेखागार में इन फाइलों के आने के बाद शोध विद्यार्थियों को शोध कार्य में मदद मिल सकेगी। इन फाइलों में आजादी के आंदोलन से जुड़े काफी अहम संदर्भ शामिल हैं।
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00 खास-खास
0 1942 के आंदोलन से जुड़ीं 72 फाइलें
0 1857 के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ीं पांच फाइलें
0 शेष फाइलें विभिन्न आंदोलनों में देशभक्तों, क्रांतिकारियों पर चले मुकदमों से संबंधित
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जिला प्रशासन स्टोर में अभिलेखागार की टीम बीते एक वर्ष से दस्तावेजों को खंगाल रही थी। वर्ष भर की मेहनत के बाद 510 फाइलों का पता चल सका है जिसमें सविनय अवज्ञा आंदोलन, किसान आंदोलन, लगान आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन, सत्याग्रहों में संगम नगरी के योगदान सहित अन्य प्रमुख घटनाओं का जिक्र है।
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माना जा रहा है कि इन फाइलों में नवाबगंज, शंकरगढ़, सरायअकिल, हंडिया, मुट्ठीगंज, फूलपुर, सराय ममरेज, कर्नलगंज, करछना, घूरपुर, दारागंज, मांडा, मेजा थानों में दर्ज मुकदमों का विवरण है। इनसे ग्रामीण क्षेत्रों में हुए आंदोलनों के दौरान महिलाओं और पुरुषों की सहभागिता का पता भी चल सकेगा। इसके अतिरिक्त कई फाइलें माघ मेले की तैयारियों से जुड़ी जानकारी दे सकेंगी। क्षेत्रीय अभिलेख अधिकारी अमित कुमार अग्निहोत्री के मुताबिक फाइलें अभिलेखागार तक लाने के लिए जिलाधिकारी को पत्र लिखा जा चुका है। अभिलेखागार में इन फाइलों के आने के बाद शोध विद्यार्थियों को शोध कार्य में मदद मिल सकेगी। इन फाइलों में आजादी के आंदोलन से जुड़े काफी अहम संदर्भ शामिल हैं।
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00 खास-खास
0 1942 के आंदोलन से जुड़ीं 72 फाइलें
0 1857 के प्रथम स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ीं पांच फाइलें
0 शेष फाइलें विभिन्न आंदोलनों में देशभक्तों, क्रांतिकारियों पर चले मुकदमों से संबंधित