प्रयागराज : इलाहाबाद विवि कर्मियों के दुर्व्यवहार से क्षुब्ध पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर पहुंचे अदालत
सीजीएम के समक्ष दाखिल अर्जी में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने कहा है कि वह इविवि में छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के मामले में 25 जुलाई 2023 को उनसे मिलने जा रहे थे। चीफ प्रॉक्टर और अन्य कर्मियों ने उन्हें विश्वविद्यालय के बाहर ही सड़क पर गैर कानूनी ढंग से रोक दिया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया।
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आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के चीफ प्रॉक्टर और कर्मचारियों द्वारा किए गए दुर्व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। इसके लिए उन्होंने इलाहाबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजीएम) के समक्ष अर्जी देकर कार्रवाई की मांग की है। उनकी अर्जी पर सीजीएम कोर्ट ने कर्नलगंज थाने से आख्या मांगी है और सुनवाई के लिए तीन दिसंबर की तारीख तय की है।
सीजीएम के समक्ष दाखिल अर्जी में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने कहा है कि वह इविवि में छात्रों के खिलाफ कार्रवाई के मामले में 25 जुलाई 2023 को उनसे मिलने जा रहे थे। चीफ प्रॉक्टर और अन्य कर्मियों ने उन्हें विश्वविद्यालय के बाहर ही सड़क पर गैर कानूनी ढंग से रोक दिया और उनके साथ दुर्व्यवहार किया। शिकायत उन्होंने कर्नलगंज थाने में की, लेकिन दर्ज नहीं की गई। लिहाजा, वह यहां आएं हैं। पूर्व आईपीएस की अर्जी पर सुनवाई करते हुए सीजीएम डॉ.लकी ने कर्नलगंज थाने से आख्या मांगते हुए सुनवाई की अगली तिथि तीन दिसंबर तय की है।
आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने छात्र नेताओं से की मुलाकात
आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ने बृहस्पतिवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय जाकर छात्र नेता अजय यादव और उनके साथ कई महीने बाद जेल से छूट कर आने वाले छात्रों से मुलाकात की। अमिताभ ठाकुर ने विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर को पत्र लिखकर परिसर प्रवेश की अनुमति भी मांगी, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं दी गई।
अमिताभ ठाकुर ने छात्रों से मुलाकात की और उनसे जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की। वह इविवि परिसर में जाना चाहते थे, सो उन्होंने गेट से ही पत्र भेजकर परिसर में प्रवेश की अनुमति मांगी, लेकिन उन्हें प्रवेश से रोक दिया गया। चीफ प्रॉक्टर डॉ.राकेश कुमार सिंह ने बताया कि परिसर में प्रवेश के लिए अमिताभ ठाकुर से उनका पहचान पत्र मांगा गया था, लेकिन उन्होंने उपलब्ध नहीं कराया। विश्वविद्यालय
परिसर का अपना अनुशासन है।
चीफ प्रॉक्टर की ओर से दिए गए जवाबी पत्र में यह भी कहा गया है कि अमिताभ ठाकुर की इच्छा मात्र से परिसर को निगरानी मुक्त किया जाना संभव नहीं है। बार-बार पत्र भेज कर और विश्वविद्यालय गेट पर आकर विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य अधिकारियों सहित विश्वविद्यालय के कार्यों को बाधित न किया जाए। विश्वविद्यालय के पास इन निरर्थक पत्रों का बार-बार उत्तर देने का समय नहीं है।