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आनंद भवन राष्ट्रीय धरोहर तो शासन तय करेगा गृहकर मामला
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जवाहर लाल नेहरू स्मारक निधि के प्रशासक
ने दिए कागजात, नगर निगम लेगा कानूनी सलाह
प्रयागराज। आनंद भवन को भारी भरकम गृहकर से मुक्त करने की मांग के क्रम में जवाहर लाल नेहरू स्मारक निधि के प्रशासक ने नगर निगम को कागजात सौंपे हैं। इसके तहत आनंद भवन को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किए जाने की जानकारी दी गई है। इससे स्पष्ट है कि ऐसे पेचीदा मामले में शासन स्तर से ही निर्णय लिया जाएगा।
नगर निगम ने आनंद भवन, स्वराज भवन, संग्रहालय, तारामंडल पर गृहकर के मद में 4.35 करोड़ बकाया का नोटिस जारी किया है। निगम के अफसरों का मानना है कि आनंद भवन में स्वयंसेवी नहीं व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। वहीं जवाहर लाल नेहरू स्मारक निधि के प्रशासक कहना है कि यह संस्था व्यावसायिक गतिविधियां में लिप्त नहीं है।
नोटिस जारी होने के करीब 25 दिन बाद प्रशासक ने महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी को एक पत्र दिया। उसमें बताया गया है कि आनंद भवन राष्ट्रीय धरोहर घोषित है। एक नवंबर 1970 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आनंद भवन को राष्ट्र को समर्पित करते हुए धरोहर घोषित कराया था। साथ ही ट्रस्ट से जुड़े लोगों के बारे में भी जानकारियां दी गई हैं।
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जवाहर लाल नेहरू स्मारक निधि के प्रशासक की ओर से दिए गए आग्रह पत्र और कागजात के बाद नगर निगम अफसरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसे मामलों का निस्तारण कमेटी करती है, लेकिन राष्ट्रीय धरोहरों से जुड़े कर संबंधी विवादों पर शासन स्तर से निर्णय होता है।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी स्तर से यह पत्र जांच के लिए जोनल कार्यालय अल्लापुर भेजा गया है, लेकिन अफसर इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हैं। जानकारों को मानना है कि जांच रिपोर्ट तैयार तो की जाएगी लेकिन उसे निर्णय के लिए शासन के पास ही भेजना होगा।
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ने दिए कागजात, नगर निगम लेगा कानूनी सलाह
प्रयागराज। आनंद भवन को भारी भरकम गृहकर से मुक्त करने की मांग के क्रम में जवाहर लाल नेहरू स्मारक निधि के प्रशासक ने नगर निगम को कागजात सौंपे हैं। इसके तहत आनंद भवन को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किए जाने की जानकारी दी गई है। इससे स्पष्ट है कि ऐसे पेचीदा मामले में शासन स्तर से ही निर्णय लिया जाएगा।
नगर निगम ने आनंद भवन, स्वराज भवन, संग्रहालय, तारामंडल पर गृहकर के मद में 4.35 करोड़ बकाया का नोटिस जारी किया है। निगम के अफसरों का मानना है कि आनंद भवन में स्वयंसेवी नहीं व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। वहीं जवाहर लाल नेहरू स्मारक निधि के प्रशासक कहना है कि यह संस्था व्यावसायिक गतिविधियां में लिप्त नहीं है।
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नोटिस जारी होने के करीब 25 दिन बाद प्रशासक ने महापौर अभिलाषा गुप्ता नंदी को एक पत्र दिया। उसमें बताया गया है कि आनंद भवन राष्ट्रीय धरोहर घोषित है। एक नवंबर 1970 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आनंद भवन को राष्ट्र को समर्पित करते हुए धरोहर घोषित कराया था। साथ ही ट्रस्ट से जुड़े लोगों के बारे में भी जानकारियां दी गई हैं।
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जवाहर लाल नेहरू स्मारक निधि के प्रशासक की ओर से दिए गए आग्रह पत्र और कागजात के बाद नगर निगम अफसरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थानीय स्तर पर ऐसे मामलों का निस्तारण कमेटी करती है, लेकिन राष्ट्रीय धरोहरों से जुड़े कर संबंधी विवादों पर शासन स्तर से निर्णय होता है।
मुख्य कर निर्धारण अधिकारी स्तर से यह पत्र जांच के लिए जोनल कार्यालय अल्लापुर भेजा गया है, लेकिन अफसर इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हैं। जानकारों को मानना है कि जांच रिपोर्ट तैयार तो की जाएगी लेकिन उसे निर्णय के लिए शासन के पास ही भेजना होगा।