{"_id":"664f65ba0a17d3d82c07139a","slug":"amar-ujala-samvad-competitive-girl-students-spoke-openly-on-the-issue-of-employment-and-security-2024-05-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"अमर उजाला संवाद : रोजगार और सुरक्षा के मुद्दे पर प्रतियोगी छात्राओं ने बेबाकी से रखी बात","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अमर उजाला संवाद : रोजगार और सुरक्षा के मुद्दे पर प्रतियोगी छात्राओं ने बेबाकी से रखी बात
Fri, 24 May 2024 11:37 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 24 May 2024 11:37 AM IST
सार
सरकार से रोजगार चाहिए। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी महज छह-सात हजार की नौकरी मिल रही है। चुनाव के मौके पर आश्वासन देते हैं कि हर समस्या का समाधान होगा। उसके बाद समस्या तो दूर कोई पूछता भी नहीं है।
विज्ञापन
अमर उजाला सेे बातचीत करतीं प्रतियोगी छात्राएं।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अमर उजाला की ओर से हर वर्ग के मुद्दे और उनकी उम्मीदों को जानने के लिए आयोजित कार्यक्रम में प्रतियोगी छात्राओं ने महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा के साथ ही बेरोजगारी के मुद्दे पर अपनी बेबाकी से राय रखी।
विज्ञापन
शिवकीर्ति ने कहा कि सरकार से रोजगार चाहिए। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी महज छह-सात हजार की नौकरी मिल रही है। चुनाव के मौके पर आश्वासन देते हैं कि हर समस्या का समाधान होगा। उसके बाद समस्या तो दूर कोई पूछता भी नहीं है।
विज्ञापन
पलक का मानना है कि जिले में शिक्षा व्यवस्था नाकाफी है। उच्च शिक्षा संस्थानों में परास्नातक और स्नातक की सीटें भी उतनी नहीं है। इस वजह से महंगे संस्थानों में दाखिला लेते है। साथ ही इतनी महंगी फीस भरने के बाद भी नौकरी के लिए सालों इंतजार करना पड़ता है।
विज्ञापन
अमीषा ने कहा कि आज भी महिलाएं समाज में सुरक्षित नहीं हैं। अक्सर महिलाओं के साथ हादसे हो रहे हैं। सुरक्षा का दावा किया जाता है, लेकिन व्यवस्था नाकाफी है। लड़कियों के स्कूल के बाहर कड़ी सुरक्षा का इंतजाम करवाना चाहिए।
खुशी ने बताया कि सरकार को महंगाई कम करना चाहिए। कुछ महीने में पेट्रोल के दाम बढ़ जाते हैं तो कहीं दूध में बढ़ोत्तरी हो जाती है। परिवार से पैसे लेकर आते हैं उसमें भी इतनी महंगाई की मार युवाओं को झेलनी पड़ती है।
सौम्या ने कहा कि युवाओं को रोजगार के लिए भटकना पड़ता है। पढ़े-लिखे होने के बाद भी रोजगार मिलना मुश्किल हो रहा है। मजबूरी में दूसरे प्रदेशों में नौकरी कम पैसे में करनी पड़ रही है। मेरा मत उसी को जाएगा जो रोजगार के तरफ ध्यान देगा।
उन्नति का मानना है कि हम ऐसे देश में रह रहे हैं जिसकी 65 प्रतिशत से ज्यादा की आबादी युवा है। मुद्दा चाहे रोजगार का हो, उच्च शैक्षणिक संस्थानों में सकारात्मक परिदृश्य को गढ़ने का हो या फिर मुख्य धारा की राजनीति में भागीदारी का हो। हर जगह नाम तो लिस्ट में आ रहा है लेकिन सबसे पीछे से। इसलिए मुखर आवाज को बुलंद करने का काम करना चाहिए न की लॉन्चिंग पैड से लॉन्च किए जा रहे वारिसों को चुनकर आगामी पांच सालों को गर्त में छोड़ देना।