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इलाहाबाद विश्वविद्यालय संग्रहालय को सौंपेगा गदर के जमाने की बंदूक
Mon, 03 Feb 2020 01:24 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 03 Feb 2020 01:24 AM IST
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- फोटो : प्रयागराज
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के तहखाने में मिली गदर के जमाने की बंदूक संग्रहालय को सौंप दी जाएगी। विभागाध्यक्ष प्रो. योगेश्वर तिवारी सोमवार को यह बंदूक संग्रहालय के निदेशक सुनील गुप्ता को सौंपेंगे। 40 किलो की वजन वाली यह बंदूक ईस्ट इंडिया कंपनी के समय की है।
मध्यकालीन इतिहास विभाग के स्टोर में यह बंदूक काफी समय से जंग खा रही है। इविवि परिसर के जिस हिस्से में यह बंदूक मिली थी, वहां किसी जमाने में पायनियर प्रेस हुआ करता था। कुछ समय पहले विभागाध्यक्ष प्रो. योगेश्वर तिवारी ने जब स्टोर की साफ-सफाई कराई तो वहां यह ऐतिहासिक बंदूक मिली। तकरीबन डेढ़ सौ साल पुरानी बंदूक की लोहे की नाल अब भी काफी मजबूत है। लकड़ी का बना बट भी ठीक हालत में है लेकिन, उसका कुछ हिस्सा खराब हो चुका है।
बंदूक पर फारसी के कुछ शब्द लिखे हुए हैं, जिसे पढ़ने की कोशिश की गई लेकिन, शब्द अस्पष्ट है। इससे केवल यही अनुमान लगाया जा रहा है कि यह बंदूक 1857 के आसपास की हो सकती है। पहले योजना थी कि इसका रखरखाव विभाग के संग्रहालय में ही किया जाएगा लेकिन, विभाग के पास इसके रखरखाव के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं थीं। ऐसे में विभागाध्यक्ष ने पूर्व कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू को पत्र लिखकर इसे बंदूक को संग्रहालय को सौंपे जाने की अनुमति मांगी थी लेकिन, प्रो. हांगलू ने पत्र का कोई जवाब नहीं दिया।
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प्रो. हांगलू के जाने के बाद प्रो. योगेश्वर तिवारी ने फिर से प्रयास शुरू किए और नए कार्यवाहक कुलपति प्रो. आरआर तिवारी से इस बारे में बात की। कार्यवाहक कुलपति ने बंदूक संग्रहालय को सौंपे जाने की अनुमति प्रदान कर दी है। प्रो. योगेश्वर तिवारी का कहना है कि सोमवार को यह ऐतिहासिक बंदूक संग्रहालय को सौंप दी जाएगी। इसके लिए संग्रहालय की टीम इलाहाबाद विश्वविद्यालय आएगी। संग्रहालय में इस बंदूक का बेहतर तरीके से रखरखाव किया जा सकेगा।
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मध्यकालीन इतिहास विभाग के स्टोर में यह बंदूक काफी समय से जंग खा रही है। इविवि परिसर के जिस हिस्से में यह बंदूक मिली थी, वहां किसी जमाने में पायनियर प्रेस हुआ करता था। कुछ समय पहले विभागाध्यक्ष प्रो. योगेश्वर तिवारी ने जब स्टोर की साफ-सफाई कराई तो वहां यह ऐतिहासिक बंदूक मिली। तकरीबन डेढ़ सौ साल पुरानी बंदूक की लोहे की नाल अब भी काफी मजबूत है। लकड़ी का बना बट भी ठीक हालत में है लेकिन, उसका कुछ हिस्सा खराब हो चुका है।
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बंदूक पर फारसी के कुछ शब्द लिखे हुए हैं, जिसे पढ़ने की कोशिश की गई लेकिन, शब्द अस्पष्ट है। इससे केवल यही अनुमान लगाया जा रहा है कि यह बंदूक 1857 के आसपास की हो सकती है। पहले योजना थी कि इसका रखरखाव विभाग के संग्रहालय में ही किया जाएगा लेकिन, विभाग के पास इसके रखरखाव के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं थीं। ऐसे में विभागाध्यक्ष ने पूर्व कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू को पत्र लिखकर इसे बंदूक को संग्रहालय को सौंपे जाने की अनुमति मांगी थी लेकिन, प्रो. हांगलू ने पत्र का कोई जवाब नहीं दिया।
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प्रो. हांगलू के जाने के बाद प्रो. योगेश्वर तिवारी ने फिर से प्रयास शुरू किए और नए कार्यवाहक कुलपति प्रो. आरआर तिवारी से इस बारे में बात की। कार्यवाहक कुलपति ने बंदूक संग्रहालय को सौंपे जाने की अनुमति प्रदान कर दी है। प्रो. योगेश्वर तिवारी का कहना है कि सोमवार को यह ऐतिहासिक बंदूक संग्रहालय को सौंप दी जाएगी। इसके लिए संग्रहालय की टीम इलाहाबाद विश्वविद्यालय आएगी। संग्रहालय में इस बंदूक का बेहतर तरीके से रखरखाव किया जा सकेगा।