इलाहाबाद विवि : डेढ़ सौ से अधिक शिक्षकों के एरियर पर संकट, जानें क्या फंसा है पेच
शिक्षकों को वर्ष 2017 में प्रोन्नत किया गया था और अर्हता तिथि से वेतन के एरियर का भुगतान किया जाना था, लेकिन सीएजी की ऑडिट आपत्ति के कारण अब तक उनका भुगतान फंसा हुआ है।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) एवं संघटक महाविद्यालयों में तकरीबन डेढ़ सौ शिक्षकों की प्रोन्नति के बाद अर्हता तिथि से वेतन का एरियर चार साल से फंसा हुआ है।
शिक्षकों को वर्ष 2017 में प्रोन्नत किया गया था और अर्हता तिथि से वेतन के एरियर का भुगतान किया जाना था, लेकिन सीएजी की ऑडिट आपत्ति के कारण अब तक उनका भुगतान फंसा हुआ है। शिक्षकों ने यूजीसी को कई पत्र लिखे और सूचना के अधिकार के तहत भी जानकारी मांगी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
इस मसले पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय संघटक महाविद्यालय शिक्षक संघ (ऑक्टा) के पदाधिकारियों ने रविवार को बैठक की, जिसमें प्रोन्नति के एरियर सहित एचआरए, पीएचडी इंक्रीमेंट के एरियर एवं मेडिकल बिलों के लिए यूजीसी की ओर से बजट न दिए जाने की निंदा की गई।
ऑक्टा अध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय एवं संघटक महाविद्यालयों में वर्ष 2017 में शिक्षकों को प्रोन्नत किया गया था। यूजीसी रेगुलेशन में प्रावधान है कि प्रोन्नति की अर्हता तिथि से एरियर का भुगतान किया जाएगा, लेकिन सीएजी टीम की ऑडिट आपत्ति के कारण भुगतान फंसा हुआ है।
यूजीसी की ओर से नहीं जारी किया गया बजट
सीएजी की टीम ने आपत्ति की थी कि नेशनल इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी संस्थानों में सेलेक्शन कमेटी की तिथि से प्रोन्नत वेतनमान दिए जाने का प्रावधान है तो विश्वविद्यालय एवं संघटक महाविद्यालयों में प्रोन्नति की अर्हता तिथि से एरियर का भुगतान क्यों किया जा रहा है।
डॉ. सिंह का कहना है कि जब यूजीसी रेगुलेशन में इसका प्रावधान है तो सीएजी की आपत्ति के कोई मायने नहीं, लेकिन यूजीसी और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय इस आपत्ति की आड़ में बजट नहीं दे रहा है।
बैठक में निर्णय लिया गया कि शिक्षा मंत्री के प्रयागराज आगमन पर उनका घेराव कर ज्ञापन सौंपा जाएगा। बैठक में डॉ. अर्चना त्रिपाठी, वेद प्रकाश मिश्र, डॉ. शिवराज सिंह, डॉ. उमेश सिंह, डॉ. प्रवीण सिंह, डॉ. संजय सिंह, डॉ. मनीष सिन्हा आदि मौजूद रहे। संचालन ऑक्टा महासिचव अमित सिंह ने किया।