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अर्जित अवकाश्ा पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शिक्षकों को राहत के आसार
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) और संघटक महाविद्यालयों के शिक्षकों को अर्जित अवकाश के भुगतान के मामले में जल्द ही राहत मिल सकती है। शिक्षकों को वर्ष 2008 से अर्जित अवकाश का भुगतान नहीं हो रहा है जबकि देश के अन्य सभी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों को यह लाभ मिल रहा है। इस मुद्दे को अब इविवि कार्य परिषद की अगली बैठक के लिए एजेंडा में शामिल कर लिया गया है। उम्मीद जताई जा रही है कि कार्य परिषद की बैठक में इस पर अंतिम मुहर लग सकती है।
केंद्र एवं राजकीय विभाग के कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर अधिकतम तीन सौ दिनों के अर्जित अवकाश का भुगतान किया जाता है। देश के सभी विश्वविद्यालयों में भी इसी आधार पर भुगतान किया जाता है लेकिन इविवि एवं संघटक महाविद्यालयों के शिक्षकों को वर्ष 2008 से भुगतान नहीं किया जा रहा है। इस मामले में ऑटा के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राम किशोर शास्त्री ने देश के कई विश्वविद्यालयों से जनसूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी और जगह जगह से यही सूचना मिली कि वहां अर्जित अवकाश का भुगतान किया जा रहा है। केवल विश्वभारती केंद्रीय विश्वविद्यालय, बंगाल में अर्जित अवकाश का भुगतान नहीं हो रहा।
मामले में प्रो. शास्त्री ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी और कोर्ट ने यूजीसी को आदेश दिया था कि दो माह के भीतर इस मामले में निर्णय लें। इसके बाद भी फाइल लंबे समय तक यूजीसी में अटकी रही। यूजीसी से केवल यही जवाब आया था कि छठवें वेतन आयोग में अर्जित अवकाश के भुगतान की व्यवस्था नहीं है और इसी आधार पर जब वर्ष 2008 से छठवें वेतन आयोग को लागू किया गया तो इविवि में अर्जित अवकाश का भुगतान भी रोक दिया गया। हालांकि अन्य विश्वविद्यालयों, कॉलेजों में शिक्षकों को नियमित रूप से भुगतान किया जा रहा है।
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ऐसे में वर्ष 2008 से अब तक इविवि और संघटक महाविद्यालयों में जितने शिक्षक रिटायर हुए हैं, उन्हें अर्जित अवकाश का भुगतान नहीं किया गया। भुगतान की मांग को लेकर शिक्षकों की लड़ाई लंबे समय से जारी है और अब राहत मिलने के आसार नजर आ रहे हैं। अर्जित अवकाश का मुद्दा कार्य परिषद की आगामी बैठक के एजेंडे में शामिल कर लिया गया है। बैठक में इस पर निर्णय लिया जा सकता है।
यूजीसी को फिर भेजा जा सकता है मामला
अगर कार्य परिषद में अर्जित अवकाश के भुगतान को लेकर कोई निर्णय होता भी है तो भुगतान के लिए अंतिम मंजूरी यूजीसी से ही लेनी होगी, क्योंकि इसके लिए बजट यूजीसी देगा। फाइल पहले से ही यूजीसी में लंबित है। ऐसे में अंतिम मंजूरी मिलने तक इस मामले में उहापोह की स्थिति बनी रहेगी।
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केंद्र एवं राजकीय विभाग के कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर अधिकतम तीन सौ दिनों के अर्जित अवकाश का भुगतान किया जाता है। देश के सभी विश्वविद्यालयों में भी इसी आधार पर भुगतान किया जाता है लेकिन इविवि एवं संघटक महाविद्यालयों के शिक्षकों को वर्ष 2008 से भुगतान नहीं किया जा रहा है। इस मामले में ऑटा के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राम किशोर शास्त्री ने देश के कई विश्वविद्यालयों से जनसूचना अधिकार के तहत जानकारी मांगी थी और जगह जगह से यही सूचना मिली कि वहां अर्जित अवकाश का भुगतान किया जा रहा है। केवल विश्वभारती केंद्रीय विश्वविद्यालय, बंगाल में अर्जित अवकाश का भुगतान नहीं हो रहा।
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मामले में प्रो. शास्त्री ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी और कोर्ट ने यूजीसी को आदेश दिया था कि दो माह के भीतर इस मामले में निर्णय लें। इसके बाद भी फाइल लंबे समय तक यूजीसी में अटकी रही। यूजीसी से केवल यही जवाब आया था कि छठवें वेतन आयोग में अर्जित अवकाश के भुगतान की व्यवस्था नहीं है और इसी आधार पर जब वर्ष 2008 से छठवें वेतन आयोग को लागू किया गया तो इविवि में अर्जित अवकाश का भुगतान भी रोक दिया गया। हालांकि अन्य विश्वविद्यालयों, कॉलेजों में शिक्षकों को नियमित रूप से भुगतान किया जा रहा है।
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ऐसे में वर्ष 2008 से अब तक इविवि और संघटक महाविद्यालयों में जितने शिक्षक रिटायर हुए हैं, उन्हें अर्जित अवकाश का भुगतान नहीं किया गया। भुगतान की मांग को लेकर शिक्षकों की लड़ाई लंबे समय से जारी है और अब राहत मिलने के आसार नजर आ रहे हैं। अर्जित अवकाश का मुद्दा कार्य परिषद की आगामी बैठक के एजेंडे में शामिल कर लिया गया है। बैठक में इस पर निर्णय लिया जा सकता है।
यूजीसी को फिर भेजा जा सकता है मामला
अगर कार्य परिषद में अर्जित अवकाश के भुगतान को लेकर कोई निर्णय होता भी है तो भुगतान के लिए अंतिम मंजूरी यूजीसी से ही लेनी होगी, क्योंकि इसके लिए बजट यूजीसी देगा। फाइल पहले से ही यूजीसी में लंबित है। ऐसे में अंतिम मंजूरी मिलने तक इस मामले में उहापोह की स्थिति बनी रहेगी।