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इविवि छात्रसंघ अध्यक्ष, चार कर्मचारी नेता निलंबित
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 13 Mar 2017 12:18 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : self
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हाईकोर्ट की सख्ती के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन छुट्टी के दिन जाग गया। 16 मार्च से वार्षिक परीक्षा हर हाल में शुरू कराने की कवायद के बीच रविवार को बड़ा निर्णय लिया गया। हड़ताली कर्मचारी यूनियन के चार पदाधिकारियों और छात्रसंघ अध्यक्ष को परिसर में आंदोलन करने, अराजकता फैलाने और छात्र विरोधी गतिविधियों के आरोप में निलंबित कर दिया गया। कुलपति ने मामले की जांच के लिए दो कमेटियों का गठन किया है। रिपोर्ट आने तक जिन पांच लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनका इविवि परिसर में प्रवेश भी प्रतिबंधित रहेगा।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय मिनिस्टीरियल एंड टेक्निकल स्टाफ यूनियन और वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर कर्मचारी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर 28 फरवरी से हड़ताल पर हैं। उनके समर्थन में छात्रसंघ अध्यक्ष व अन्य छात्र भी हैं। कर्मचारियों और छात्रों ने कुलपति के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए संयुक्त मोर्चा गठित किया। आंदोलन के कारण विश्वविद्यालय की वार्षिक परीक्षा शुरू होने पर संशय बना है। इस बीच हाईकोर्ट में एक छात्र ने याचिका दाखिल कर हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई और निर्धारित तिथि पर परीक्षा कराने संबंधी निर्देश देने की गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए इविवि प्रशासन को हड़ताल समाप्ति के लिए सख्ती करने के निर्देश दिए थे।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उहापोह की स्थिति में इविवि प्रशासन ने हड़ताली कर्मचारियों और आंदोलित छात्रों से वार्ता कर बीच का रास्ता निकालने का कई बार प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। कई बार की बैठक के बाद रविवार देर शाम कुलपति प्रो.रतन लाल हांगलू ने संघर्ष मोर्चा में शामिल कर्मचारियों और छात्र नेताओं के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया। कुलपति के अनुमोदन पर रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला ने देर शाम मिनिस्टीरियल यूनियन के अध्यक्ष डॉ. संतोष सहाय, महामंत्री हरेकृष्ण द्विवेदी, वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष छोटे लाल मौर्य, महामंत्री शहजादे को निलंबित कर दिया। वहीं प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे ने छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित कुमार मिश्र को भी निलंबित कर दिया। जांच समिति की रिपोर्ट आने व वार्षिक परीक्षा की समाप्ति तिथि 15 मई तक निलंबित सभी पांचों लोगों का विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश भी निषिद्ध कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद होली बाद विश्वविद्यालय खुलने पर हंगामा होने और आंदोलन तेज होने की भी संभावना है।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय मिनिस्टीरियल एंड टेक्निकल स्टाफ यूनियन और वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर कर्मचारी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर 28 फरवरी से हड़ताल पर हैं। उनके समर्थन में छात्रसंघ अध्यक्ष व अन्य छात्र भी हैं। कर्मचारियों और छात्रों ने कुलपति के खिलाफ आवाज बुलंद करने के लिए संयुक्त मोर्चा गठित किया। आंदोलन के कारण विश्वविद्यालय की वार्षिक परीक्षा शुरू होने पर संशय बना है। इस बीच हाईकोर्ट में एक छात्र ने याचिका दाखिल कर हड़ताली कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई और निर्धारित तिथि पर परीक्षा कराने संबंधी निर्देश देने की गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए इविवि प्रशासन को हड़ताल समाप्ति के लिए सख्ती करने के निर्देश दिए थे।
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हाईकोर्ट के निर्देश के बाद उहापोह की स्थिति में इविवि प्रशासन ने हड़ताली कर्मचारियों और आंदोलित छात्रों से वार्ता कर बीच का रास्ता निकालने का कई बार प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। कई बार की बैठक के बाद रविवार देर शाम कुलपति प्रो.रतन लाल हांगलू ने संघर्ष मोर्चा में शामिल कर्मचारियों और छात्र नेताओं के खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया। कुलपति के अनुमोदन पर रजिस्ट्रार प्रो. एनके शुक्ला ने देर शाम मिनिस्टीरियल यूनियन के अध्यक्ष डॉ. संतोष सहाय, महामंत्री हरेकृष्ण द्विवेदी, वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष छोटे लाल मौर्य, महामंत्री शहजादे को निलंबित कर दिया। वहीं प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे ने छात्रसंघ अध्यक्ष रोहित कुमार मिश्र को भी निलंबित कर दिया। जांच समिति की रिपोर्ट आने व वार्षिक परीक्षा की समाप्ति तिथि 15 मई तक निलंबित सभी पांचों लोगों का विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश भी निषिद्ध कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद होली बाद विश्वविद्यालय खुलने पर हंगामा होने और आंदोलन तेज होने की भी संभावना है।
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