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Allahabad University : सेंट्रल लाइब्रेरी में चार साल से ई-बुक की खरीद बंद, बजट में कर दी गई है कटौती

Wed, 12 Mar 2025 01:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 12 Mar 2025 01:50 PM IST
सार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) की सेंट्रल लाइब्रेरी में चार साल से ई-बुक की खरीद ही नहीं हो रही। वर्ष 2018 से 2021 के बीच खरीदी गईं 4000 ई-बुक ही यहां ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

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Allahabad University: Purchase of e-books stopped in Central Library for four years, budget has been cut
ई बुक्स। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) की सेंट्रल लाइब्रेरी में चार साल से ई-बुक की खरीद ही नहीं हो रही। वर्ष 2018 से 2021 के बीच खरीदी गईं 4000 ई-बुक ही यहां ऑनलाइन उपलब्ध हैं। ई-बुक की खरीद न हो पाने की मूल वजह लाइब्रेरी के बजट में कटौती करना है। सेंट्रल लाइब्रेरी के प्रभारी डॉ. बीके सिंह बताते हैं कि उनके यहां कुल 4000 पुस्तकें और 13,000 से अधिक जर्नल ऑनलाइन उपलब्ध हैं। यह किताबें साहित्य, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इतिहास, दर्शनशास्त्र आदि विषयों से जुड़ी हैं।

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7.70 लाख से अधिक प्रिंटेड किताबें भी मौजूद हैं। विद्यार्थी या शिक्षक इन्हें लेकर पढ़ाई कर सकते हैं। इंटरनेट की दुनिया में ई-बुक की खरीद क्यों बंद... के सवाल पर डॉ. सिंह कहते हैं कि फंड ही नहीं है। पहले किताबें खरीदने के लिए पांच करोड़ रुपये तक सालाना बजट मिल जाता था। 2021 से यह एक करोड़ हो चुका है। इससे 6000 प्रिंटेड किताबें खरीदी जाती हैं।
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डॉ. सिंह के मुताबिक, ई-बुक खरीदने के लिए पैसा ही नहीं बचता। इसी कारण चार साल से खरीद नहीं हो सकी है। यूनिवर्सिटी से बजट मिलेगा, तभी इनकी खरीद संभव हो सकेगी। वहीं, नाम न छापने की शर्त पर एक छात्र कहते हैं, ई-बुक के बारे में लाइब्रेरी या यूनिवर्सिटी में कुछ नहीं बताया जाता। कारण यही है कि किताबें ही नहीं हैं तो बताएं भी क्या? इस कारण 95 फीसदी विद्यार्थियों को नहीं मालूम कि ई-बुक का एक्सेस कैसे और कहां से हासिल करें। 

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