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इलाहाबाद विवि : विभागाध्यक्ष पद से भी हटाए गए प्रो. डीके गुप्ता

Sat, 30 Jan 2021 12:29 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 30 Jan 2021 12:29 AM IST
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Allahabad University: Prof. also removed from the post of Head of Department. DK Gupta
इलाहाबाद विश्वविद्यालय
इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के बायोकेमेस्ट्री के विभागाध्यक्ष प्रो. डीके गुप्ता विभागाध्यक्ष के पद से हटा दिया गया है। विभाग के ही तमाम शोधार्थियों और कुछ शिक्षकों ने उनके खिलाफ कुलपति कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिक्षा मंत्रालय को भी शिकायत भेजी गई थी। मामले में इविवि प्रशासन ने प्रो. गुप्ता को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। अब कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए प्रो. गुप्ता को विभागाध्यक्ष के पद से हटा दिया है। उनकी जगह डीन साइंस प्रो. शेखर श्रीवास्तव को विभागाध्यक्ष का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
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प्रो. डीके गुप्ता वर्ष 2014 से 2016 तक बिहार की छपरा यूनिवर्सिटी के कुलपति भी रह चुके हैं। कुलपति रहते हुए उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे और उन्हें बिहार के तत्कालीन राज्यपाल ने कुलपति के पद से हटा दिया था। इसके बाद इविवि में उनकी वापसी हुई। पूर्व कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू ने पहले तो प्रो. गुप्ता को निलंबित करने का आदेश दिया और बाद में उन्हें निलंबन से बहाल करते हुए दिसंबर-2019 में विभागाध्यक्ष बना दिया।
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इसके बाद प्रो. डीके गुप्ता को लेकर शोधार्थियों और शिक्षकों में अंसतोष फैलने लगा। उनकी कार्यप्रणाली से शोधार्थी और शिक्षक नाराज थे। शोधार्थियों ने आरोप लगाए कि प्रो. गुप्ता ने पिछले साल विभाग में वाटर प्यूरीफायर लगवाने के लिए शिक्षकों और शोधार्थियों से अंशदान करने के लिए कहा, जबकि शोधार्थियों का कहना था कि यह जिम्मेदारी इविवि प्रशासन की है तो वे अपने जेब से पैसा क्यों खर्च करें।
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इस मसले पर सवाल उठाने वाले एक शोधार्थी को प्रो. गुप्ता ने कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। साथ ही उस नोटिस में इविवि प्रशासन के लिए ‘लाल फीताशाही’ जैसे शब्द का प्रयोग किया। प्रो. गुप्ता पर यह आरोप भी है कि उन्होंने शिक्षकों पर दबाव बनाया कि अपने शोधार्थियों से शिकायत वापस लेने को कहें और जब कुछ शिक्षकों ने जब ऐसा करने से इनकार कर दिया तो उन्हें भी प्रताड़ित किया गया।

वहीं, एक शोधार्थी ने आरोप लगाया है कि वह जहां भी नौकरी के लिए गया, विभागाध्यक्ष ने उसके खिलाफ रिपोर्ट लगा दी और उसका चयन नहीं हो सका। ऐसी ही तमाम शिकायतें कुलपति के पास पहुंची तो कुछ दिनों पहले प्रो. गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया और जांच कमेटी भी गठित कर दी गई। अब उन्हें पद से हटा दिया गया है।

 
  • ‘कुलपति ने अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए प्रो. डीके गुप्ता को बायोकेमेस्ट्री के विभागाध्यक्ष के पद से हटा दिया है। उनके खिलाफ आई शिकायतों की जांच के लिए पहले से कमेटी गठित है। जांच अभी चल रही है। डीन साइंस को विभागाध्यक्ष पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।’ डॉ. जया कपूर, पीआरओ, इविवि
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