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Allahabad University : जस्टिस विक्रमनाथ बोले- कानून केवल किताबों में ही नहीं, आपके जीवन में भी है

Sun, 27 Jul 2025 09:18 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 27 Jul 2025 09:18 AM IST
सार

कानून केवल किताबों में नहीं बल्कि आपके जीवन में भी है। समाज को समझकर ही कानून को सही तरीके से समझा जा सकता है। यह सलाह सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कानून के विद्यार्थियों को दी।

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Allahabad University: Justice Vikram Nath said- Law is not only in books but also in your life
इविवि पूर्व छात्र संघ द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में बोलते न्यायमूर्ति विक्रम नाथ। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कानून केवल किताबों में नहीं बल्कि आपके जीवन में भी है। समाज को समझकर ही कानून को सही तरीके से समझा जा सकता है। यह सलाह सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कानून के विद्यार्थियों को दी। वह शनिवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के ईश्वर टोपा भवन सभागार में आयोजित विशिष्ट पुराछात्र सम्मान समारोह में बोल रहे थे।

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इविवि के यूनिवर्सिटी ऑफ इलाहाबाद एल्युमनाई एसोसिएशन की ओर से शनिवार को चार विशिष्ट पुराछात्र सर्वोच्च न्यायालय के वर्तमान न्यायाधीशों को सम्मानित किया गया। इनमें न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया, न्यायमूर्ति पंकज मित्थल और न्यायमूर्ति मनोज मिश्र शामिल रहे।

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न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कानून के छात्रों से कहा कि समाचार पढ़ें और कोर्ट रूम में होने वाली चर्चाओं का हिस्सा बनें, इससे सीखने को मिलेगा। विधि के क्षेत्र में भविष्य बनाने का कोई शार्टकट रास्ता नहीं है।

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शॉर्टकट से मिली सफलता लंबे समय तक नहीं चलती है। मंच पर कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव भी मौजूद रहीं। एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. हेरंब चतुर्वेदी ने स्वागत भाषण दिया। संचालन प्रो. जया कपूर और धन्यवाद ज्ञापन प्रो. कुमार वीरेंद्र ने किया। इस दौरान रजिस्ट्रार प्रो. आशीष खरे सहित सभी संकायों के डीन व अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

 

समाज में हो रहे घटनाक्रम पर नजर रखें विद्यार्थी : न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने कहा, देश में विविधता में एकता के लिए एक-दूसरे को समझने की जरूरत है। सहिष्णुता ही भारत की नींव है। वर्तमान में छात्रों के अंदर से बाहर की दुनिया खो गई है। दूसरे विश्वविद्यालयों और समाज में हो रहे घटनाक्रमों से आज के विद्यार्थी स्वयं को अलग कर रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि समाज में हो रहे घटनाक्रम पर भी नजर रखें।

अनुभव भी विद्यार्थियों को बहुत कुछ सिखाते हैं : न्यायमूर्ति पंकज मित्थल

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पंकज मित्थल ने इविवि में पढ़ने के दौरान के अनुभवों को याद किया। उन्होंने कहा कि क्लासरूम में ज्ञानवर्धन के साथ ही स्वयं के अनुभव भी विद्यार्थियों को बहुत कुछ सिखाते हैं। हम अपने अनुभवों से ही आगे बढ़ते हैं। इविवि के कैंपस का माहौल और यहां होने वाली चर्चाओं से मेरा जुड़ाव कला एवं साहित्य से हुआ। उन्होंने अपने शिक्षक डॉ. बीबी सक्सेना के साथ बिताए लम्हों को याद किया।

तकनीक के साथ सामाजिक विज्ञान को भी समझें : न्यायमूर्ति मनोज मिश्र

 

सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मनोज मिश्र ने विश्वविद्यालय शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर और एआई तकनीक पढ़ने से विद्यार्थियों में मानवता नहीं आ सकती। हमें बेहतरीन इंसान बनाने के लिए कला, सामाजिक विज्ञान और साहित्य के शिक्षण पर भी जोर देना होगा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ने के दौरान जो सीख मिली, वह पूरे जीवन काम आई है।

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