इलाहाबाद विवि प्रशासन की चेतावनी : पंत हॉस्टल से हटें अवैध छात्र, नहीं तो कटेगा बिजली-पानी का कनेक्शन
पचास के दशक में पंत हॉस्टल की स्थापना हुई थी। इसमें सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को कमरे आवंटित किए जाते हैं। पहले सिर्फ एससीएसटी वर्ग के विद्यार्थियों को ही यह छात्रावास आवंटित किया जाता था।
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पंत हॉस्टल में रह रहे अवैध कब्जा धारक छात्रों पर शिकंजा कसेगा। हॉस्टल प्रशासन की ओर से बुधवार को नोटिस जारी कर कहा गया है कि अवैध रूप से रहे छात्र हॉस्टल खाली कर दें, अन्यथा शीघ्र ही हॉस्टल प्रशासन छात्रावास की बिजली-पानी का कनेक्शन काटने की कार्रवाई करेगा। वैध छात्रों को छात्रावास आवंटन करने के बाद बिजली-पानी की व्यवस्था बहाल की जाएगी।
पचास के दशक में पंत हॉस्टल की स्थापना हुई थी। इसमें सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को कमरे आवंटित किए जाते हैं। पहले सिर्फ एससीएसटी वर्ग के विद्यार्थियों को ही यह छात्रावास आवंटित किया जाता था। लेकिन बाद में ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों को भी छात्रावास आवंटित किया जाने लगा। हॉस्टल आवंटन के लिए अखिल भारतीय स्तर की परीक्षा होती है।
परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों को ही कमरा आवंटित किया जाता है। हॉस्टल में सौ सीटे हैं। इसमें से 80 सीटें छात्रों के लिए और 20 सीटें छात्राओं के लिए हैं। पहले छात्रावास को केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ओर से अनुदान मिलता रहा। 2013 में अनुदान मिलना बंद हुआ तो यहां के अधीक्षक और वार्डेन ने पत्र लिखकर अनुदान की मांग की। इस पर मंत्रालय ने इसे सेल्फ फाइनेंस मोड में संचालित करने का निर्देश दिया। इसके बाद छात्रावास की फीस बढ़ाई गई। लेकिन फीस वृद्धि के बाद छात्रों ने शुल्क जमा नहीं किया और कब्जा बनाए रखा।
2018 में तत्कालीन इविवि के कुलपति प्रोफेसर रतन लाल हांगलू ने छात्रावासों के वाशआउट की कार्रवाई शुरू की तो इसे भी खाली कराया गया। लेकिन 2018 की जनवरी में पूर्व में यहां रहने लोगों ने फिर से अवैध कब्जा कर लिया। सौ सीटों के इस छात्रावास में आधे से अधिक पर अवैध कब्जा है। ऐसे में हॉस्टल प्रशासन ने विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि हॉस्टल खाली कर दिया जाए। अन्यथा बिजली-पानी का कनेक्शन काट दिया जाएगा। नए सत्र से आवंटन के बाद फिर से आपूर्ति बहाल की जाएगी।
इविवि के शिक्षक होते रहे हैं अधीक्षक और वार्डेन
प्रयागराज। पंत छात्रावास के अधीक्षक और वार्डेन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के शिक्षक ही होते रहे हैं। वर्तमान में भी यह जिम्मेदारी विवि के शिक्षक ही निभा रहे हैं। वर्तमान में हॉस्टल के प्रधानाचार्य डॉ. आरएस यादव और अधीक्षक डॉ. सुधीर कुमार सिंह हैं।
हॉस्टल संचालन को लेकर बना हुआ है विवाद
साल 2005 से पहले जब इविवि को राज्य विवि का दर्जा प्राप्त था तब इस हॉस्टल के संचालन की जिम्मेदारी अधिकृत रूप से विवि प्रशासन के पास थी। 2005 के बाद इविवि केंद्रीय विवि का दर्जा मिलने पर इस हॉस्टल के संचालन को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। वित्तीय विवादों को लेकर इस हॉस्टल के संचालन एवं रखरखाव की स्थिति बिगड़ती गई। 2013 में केंद्र सरकार से अनुदान मिलना बंद हुआ तो इस हॉस्टल के अस्तित्व को लेकर संकट खड़ा हो गया।