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इलाहाबाद विवि : पिछड़ी प्रवेश प्रक्रिया को नए सत्र में भी पटरी पर लाना बड़ी चुनौती

Sat, 05 Jun 2021 01:20 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 05 Jun 2021 01:20 AM IST
सार

  • एनटीए को करानी है प्रवेश परीक्षा, मौजूदा परिस्थितियों परीक्षा के आयोजन पर असमंजस
  • प्रवेश प्रक्रिया में देरी के कारण इविवि प्रशासन के लिए सत्र को पटरी पर लाना बड़ी चुनौती

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Allahabad University: Big challenge to bring backward admission process back on track in new session
prayagraj news : इलाहाबाद विश्वविद्यालय। - फोटो : prayagraj

विस्तार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) एवं संघटक महाविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया के साथ नए सत्र पर भी संकट मंडराने लगा है। इस बार प्रवेश परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को सौंपी गई है। वहीं, कोविड के कारण सीबीएसई, यूपी बोर्ड की परीक्षाएं निरस्त कर दी गई हैं। ऐसे में एनटीए के लिए सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों की संयुक्त रूप से प्रवेश परीक्षा का आयोजन करा पाना बड़ी चुनौती होगी।

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अब तक इविवि प्रशासन अपने स्तर से प्रवेश परीक्षा का आयोजन कराता था, लेकिन इस बार केंद्र सरकार ने एनटीए के माध्यम से सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों की संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए इविवि प्रशासन की ओर से यूजीसी को काफी पहले ही छात्र-छात्राओं, पाठ्यक्रमों और सीटों का विवरण भेजा जा चुक है, लेकिन प्रवेश परीक्षा के आयोजन को लेकर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। यहां तक कि प्रवेश परीक्षा के लिए आवेदन की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो सकी है। ऐसे में नए सत्र के पिछड़ने के पूरे आसार हैं और ऐसा हुआ तो इविवि प्रशासन को अगले साल भी सत्र को पटरी पर लाने के लिए पाठ्यक्रमों में कटौती करनी पड़ जाएगी।

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Allahabad University: Big challenge to bring backward admission process back on track in new session
prayagraj news : इलाहाबाद विश्वविद्यालय। - फोटो : prayagraj
इविवि प्रशासन की ओर से यूजीसी को पत्र भेजकर प्रवेश परीक्षा के बार में दिशा-निर्देश मांगे गए थे। कोई जवाब न मिलने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने रिमाइंडर भेजा, लेकिन इसका जवाब भी नहीं मिला। अब प्रवेश परीक्षा के आयोजन पर ही संकट मंडराने लगा है। जिन परिस्थितियों में आईसीएससी, सीबीएसई, यूपी बोर्ड ने परीक्षाएं निरस्त कीं और ज्यादातर राज्यों ने भी अपने यहां की बोर्ड परीक्षाएं निरस्त कर दी हैं, उसे देखते हुए अब सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों की संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराए जाने की उम्मीद भी बहुत कम रह गई है। अगर बाद में एनटीए परीक्षा कराने का निर्णय लेता है तो आवेदन की प्रक्रिया पूरी होने में कम से कम एक माह का वक्त लगेगा। इसके बाद देश भर में परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे और फिर परीक्षा कई जाएगी। रिजल्ट आने के बाद प्रवेश लिए जाएंगे। इस पूरी प्रक्रिया में काफी वक्त लगेगा और इसका सीधा असर नए सत्र पर पड़ेगा।

मेरिट के आधार पर प्रवेश देने की मांग 
सीएमपी डिग्री कॉलेज के पूर्व छात्र परिषद अध्यक्ष करन सिंह परिहार ने कुलपति को पत्र लिखकर मांग की है कि नए सत्र के लिए मेरिट के आधार पर छात्र-छात्राओं के प्रवेश लिए जाएं। करन का कहना है कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने भी मेरिट के आधार प्रवेश लेने की तैयारी की है। इससे कोराना संक्रमण का खतरा नहीं रहेगा और नया सत्र भी समय से शुरू किया जाएगा।
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