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डीजीपी तक पहुंचा इविवि में आंदोलन का मुद्दा
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Allahabad University
- फोटो : CITY DESK
इविवि प्रशासन और छात्रों ने एक-दूसरे के खिलाफ लिखा पत्र
महिला हॉस्टल के बाहर 14वें दिन जारी रहा छात्राओं का अनशन
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के महिला हॉस्टल में छात्राओं की सुरक्षा के मुद्दे पर इविवि प्रशासन और छात्रों ने एक-दूसरे के खिलाफ पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र भेजा है। वहीं, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह की सुरक्षा का मुद्दा भी डीजीपी तक पहुंचा है। इन सबके बीच महिला हॉस्टल के गेट पर छात्राओं की सुरक्षा के मसले पर कुलपति की बर्खास्तगी की मांग को लेकर छात्राओं का क्रमिक अनशन लगातार 14वें दिन, बृहस्पतिवार को भी जारी रहा।
चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे और डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार की ओर से डीजीपी को भेजे पत्र में कहा गया है कि पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह का एचओआर हॉस्टल के कमरा नपंबर 301 पर अवैध कब्जा है। महिला हॉस्टल के मेन गेट पर सरकार विरोधी और विश्वविद्यालय विरोधी राजनीति करने वालों का जमघट लग रहा है। ऋचा सिंह अपने ऊपर जिस खतरे की बात कर रही हैं, वह जांच का विषय है। यह जानना जरूरी है कि धमकी देने वाले कौन हैं और किस तरह की धमकी दी जा रही है जिससे उन्हें जानमाल का खतरा उत्पन्न हो गया है। पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि ऋचा सिंह पर खतरे और महिला परिसर में असुरक्षा के आरोपों की जांच कराई जाए।
उधर, संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से डीजीपी को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि क्रमिक अनशन स्थल पर चौकी प्रभारी (विश्वविद्यालय) एवं महिला थाना प्रभारी के नेतृत्व में पर्याप्त फोर्स की ड्यूटी लगाई जा रही है। ऋचा सिंह की सुरक्षा के मसले पर डीजीपी को पहले ही महिला आयोग की ओर से पत्र भेजने ऋचा की पर्याप्त सुरक्षा का इंतजाम कराने को कहा गया है। महिला हॉस्टल में असुरक्षा का मुद्दा राज्यसभा और विधानसभा में उठाया गया है। जहां तक ऋचा पर खतरे की जांच का सवाल है तो समिति इसका स्वागत करती है। पत्र में डीजीपी को बताया गया है कि ऋचा हॉस्टल का कमरा छोड़ चुकी हैं और उनका कभी भी अवैध कब्जा नहीं रहा।
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वहीं, अनशन पर बैठे छात्र-छात्रओं ने आरोप लगाया कि महिला हॉस्टल के विजिटंग हॉल में विश्वविद्यालय प्रशासन का कब्जा अभी बरकरार है। बृहस्पतिवार को जो अभिभावक वहां मिलने पहुंचे, उन्हें हॉस्टल के बाहर सड़क पर छात्राओं से मुलाकात करनी पड़ी। यह किसी केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए शर्म की बात है। अनशन स्थल पर पहुंचे प्रो. एके श्रीवास्तव, प्रो. हेमलता श्रीवास्तव, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष केके राय ने आंदोलन को समर्थन देते हुए विश्वविद्यालय की बदहाली के लिए कुलपति को जिम्मेदार ठहराया।
ऋचा ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय के हालात से अवगत कराया है। पत्र में कहा गया है कि देसी राजू समिति ने कुलपति की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए, महिला आयोग ने विश्वविद्यालय में महिला सुरक्षा को लेकर आपत्ति जताई, राज्यसभा और विधानसभा में यह मुद्दा उठा, इसके बाद भी कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू अपने पद बने हुए हैं। ऋचा ने मांग की है कि प्रो. हांगलू को कुलपति के पद से हटाया जाए।
लाइब्रेरी खुलवाने के लिए सौंपा ज्ञापन
संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से केंद्रीय पुस्तकालय खुलवाने के लिए कुलानुशासक कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। समिति के लोगों का कहना है कि एमए की सेमेस्टर परीक्षाएं अभी पूरी नहीं हुईं हैं और केंद्रीय पुस्तकालय को 18 दिसंबर से दो जनवरी तक बंद कर दिया गया है। इस दौरान अखिलेश यादव, सत्यम सिंह, अविनाश विद्याथ्री, संदीप यादव, अजय सम्राट आदि मौजूद रहे।
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महिला हॉस्टल के बाहर 14वें दिन जारी रहा छात्राओं का अनशन
प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के महिला हॉस्टल में छात्राओं की सुरक्षा के मुद्दे पर इविवि प्रशासन और छात्रों ने एक-दूसरे के खिलाफ पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को पत्र भेजा है। वहीं, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह की सुरक्षा का मुद्दा भी डीजीपी तक पहुंचा है। इन सबके बीच महिला हॉस्टल के गेट पर छात्राओं की सुरक्षा के मसले पर कुलपति की बर्खास्तगी की मांग को लेकर छात्राओं का क्रमिक अनशन लगातार 14वें दिन, बृहस्पतिवार को भी जारी रहा।
चीफ प्रॉक्टर प्रो. रामसेवक दुबे और डीएसडब्ल्यू प्रो. हर्ष कुमार की ओर से डीजीपी को भेजे पत्र में कहा गया है कि पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह का एचओआर हॉस्टल के कमरा नपंबर 301 पर अवैध कब्जा है। महिला हॉस्टल के मेन गेट पर सरकार विरोधी और विश्वविद्यालय विरोधी राजनीति करने वालों का जमघट लग रहा है। ऋचा सिंह अपने ऊपर जिस खतरे की बात कर रही हैं, वह जांच का विषय है। यह जानना जरूरी है कि धमकी देने वाले कौन हैं और किस तरह की धमकी दी जा रही है जिससे उन्हें जानमाल का खतरा उत्पन्न हो गया है। पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि ऋचा सिंह पर खतरे और महिला परिसर में असुरक्षा के आरोपों की जांच कराई जाए।
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उधर, संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से डीजीपी को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि क्रमिक अनशन स्थल पर चौकी प्रभारी (विश्वविद्यालय) एवं महिला थाना प्रभारी के नेतृत्व में पर्याप्त फोर्स की ड्यूटी लगाई जा रही है। ऋचा सिंह की सुरक्षा के मसले पर डीजीपी को पहले ही महिला आयोग की ओर से पत्र भेजने ऋचा की पर्याप्त सुरक्षा का इंतजाम कराने को कहा गया है। महिला हॉस्टल में असुरक्षा का मुद्दा राज्यसभा और विधानसभा में उठाया गया है। जहां तक ऋचा पर खतरे की जांच का सवाल है तो समिति इसका स्वागत करती है। पत्र में डीजीपी को बताया गया है कि ऋचा हॉस्टल का कमरा छोड़ चुकी हैं और उनका कभी भी अवैध कब्जा नहीं रहा।
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वहीं, अनशन पर बैठे छात्र-छात्रओं ने आरोप लगाया कि महिला हॉस्टल के विजिटंग हॉल में विश्वविद्यालय प्रशासन का कब्जा अभी बरकरार है। बृहस्पतिवार को जो अभिभावक वहां मिलने पहुंचे, उन्हें हॉस्टल के बाहर सड़क पर छात्राओं से मुलाकात करनी पड़ी। यह किसी केंद्रीय विश्वविद्यालय के लिए शर्म की बात है। अनशन स्थल पर पहुंचे प्रो. एके श्रीवास्तव, प्रो. हेमलता श्रीवास्तव, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष केके राय ने आंदोलन को समर्थन देते हुए विश्वविद्यालय की बदहाली के लिए कुलपति को जिम्मेदार ठहराया।
ऋचा ने प्रधानमंत्री को लिखा पत्र
पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर विश्वविद्यालय के हालात से अवगत कराया है। पत्र में कहा गया है कि देसी राजू समिति ने कुलपति की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए, महिला आयोग ने विश्वविद्यालय में महिला सुरक्षा को लेकर आपत्ति जताई, राज्यसभा और विधानसभा में यह मुद्दा उठा, इसके बाद भी कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू अपने पद बने हुए हैं। ऋचा ने मांग की है कि प्रो. हांगलू को कुलपति के पद से हटाया जाए।
लाइब्रेरी खुलवाने के लिए सौंपा ज्ञापन
संयुक्त संघर्ष समिति की ओर से केंद्रीय पुस्तकालय खुलवाने के लिए कुलानुशासक कार्यालय में ज्ञापन सौंपा। समिति के लोगों का कहना है कि एमए की सेमेस्टर परीक्षाएं अभी पूरी नहीं हुईं हैं और केंद्रीय पुस्तकालय को 18 दिसंबर से दो जनवरी तक बंद कर दिया गया है। इस दौरान अखिलेश यादव, सत्यम सिंह, अविनाश विद्याथ्री, संदीप यादव, अजय सम्राट आदि मौजूद रहे।