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इलाहाबाद विश्वविद्यालय : सम्मेलन में बोले पुरा छात्र... विवि ने सिखाया पढ़ना-लिखना, संघर्ष करना और आगे बढ़ना

Sun, 28 Apr 2024 01:29 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 28 Apr 2024 01:29 PM IST
सार

सीनेट हॉल में आयोजित समारोह के दौरान ‘नमस्ते, हैलो, कसबे...’ से अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए मशहूर फिल्म निर्देशक तिग्मांशु धूलिया ने अपने अंग्रेजी के शिक्षक प्रो. अमर सिंह को याद करते हुए कहा कि धोती पहने, माथे पर टीका लगाए, मुंह में पान दबाए जब वह साइकिल से विश्वविद्यालय पहुंचते थे और अंग्रेजी बोलना शुरू करते थे तो लगता था कि मैं ऑक्सफोर्ड में हूं।

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Allahabad University: All students said in the conference _ The university taught to read, write, struggle and
इलाहाबाद विश्वविद्यालय पुरा छात्र सम्मेलन में पुस्तक विमोचन करते अतिथि। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) को पूरब के ऑक्सफोर्ड का दर्जा यूं ही नहीं मिला। शनिवार से शुरू हुए इविवि के दो दिवसीय पुरा छात्र सम्मेलन में जुटे सुप्रीम कोर्ट के जजों और अन्य पुरा छात्रों ने अपने छात्र जीवन को याद करते हुए गुरुओं को नमन किया और बताया कि विश्वविद्यालय आने के बाद ही उन्होंने पढ़ना, लिखना, सोचना, संघर्ष करना और आगे बढ़ना सीखा।

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सीनेट हॉल में आयोजित समारोह के दौरान ‘नमस्ते, हैलो, कसबे...’ से अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए मशहूर फिल्म निर्देशक तिग्मांशु धूलिया ने अपने अंग्रेजी के शिक्षक प्रो. अमर सिंह को याद करते हुए कहा कि धोती पहने, माथे पर टीका लगाए, मुंह में पान दबाए जब वह साइकिल से विश्वविद्यालय पहुंचते थे और अंग्रेजी बोलना शुरू करते थे तो लगता था कि मैं ऑक्सफोर्ड में हूं। अंत में तिग्मांशु बोले, ‘मैं यहां हू, इसलिए आज मैं यहां हूं।’
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इविवि के पुरा छात्र एवं सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश वीएन खरे ने कहा कि इस विश्वविद्यालय ने देश को कई महान वैज्ञानिक दिए। विधि के क्षेत्र में कई दिग्गज दिए। भाग्यशाली हूं कि आज मैं यहां हूं। यहां आकर बहुत अच्छा लगा। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने बीएससी में अपने मैथ्स के शिक्षक प्रो. आजाद को याद करते हुए कहा कि उनके तीन प्रिय शिष्य थे और उनमें से मैं भी एक था। खुशी का पल है कि आज चारों यहां मौजूद हैं।

Allahabad University: All students said in the conference _ The university taught to read, write, struggle and
इलाहाबाद विश्वविद्यालय पुरा छात्र सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। - फोटो : अमर उजाला

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने बताया कि उन्हें इलाहाबाद विश्वविद्यालय से इतना प्यार है कि गृह जनपद न होने के बावजूद वह आज भी होम टाउन के कॉलम में इलाहाबाद लिखते हैं। पढ़ना, लिखना, संघर्ष करना, आगे बढ़ना और मोहब्बत करना यहीं से सीखा। पुरा छात्र सम्मेलन के बहाने मोहब्बत का यह सिलसिला यूं ही चलता रहे, यही उनकी कामना है।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज मित्थल ने कहा कि मेरठ से 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद पहले तो दिल्ली के हंसराज कॉलेज में प्रवेश लिया लेकिन दो माह बाद ही कॉलेज छोड़कर इविवि चले आए। यहां की फैकल्टी इतनी अच्छी थी कि ध्यान से सिर्फ लेक्चर सुन लें तो परीक्षा पास करने के लिए किताब उठाने की जरूरत नहीं पड़ती थी।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायमूर्ति अशोक भूषण ने बताया कि क्लास में आने के बाद लगता था कि दूसरी दुनिया में आ गए। वास्तव में व्यक्तित्व का विकास विश्वविद्यालय में ही हुआ। यहां से विधि की पढ़ाई की और वर्ष 1973 से 1978 तक यहां के छात्र रहे। गर्व होता है कि इविवि में पढ़ने का मौका मिला। यही यादें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करतीं हैं। कार्यक्रम के दौरान मंच पर चांसलर आशीष चौहान, कुलपति प्रो. संगीता श्रीवास्तव, इविवि पुराछात्र संघ के अध्यक्ष हेरंब चतुर्वेदी एवं सचिव प्रो. कुमार वीरेंद्र मौजूद रहे।

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इलाहाबाद विश्वविद्यालय पुरा छात्र सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। - फोटो : अमर उजाला

आज भी याद है लल्ला चुंगी का चाय-समोसा

इविवि के पुराछात्रों को आज भी लल्ला चुंगी का चाय-समोसा याद है और वे यह भी नहीं भूले कि चाय-समोसे की दुकान के ठीक सामने महिला छात्रावास भी है। फिलहाल दुकान अब वहां नहीं है। चाय के बहाने इविवि के विज्ञान संकाय के बॉटनी विभाग को भी याद किया गया। सम्मेलन के दौरान मंच पर पुराछात्र बीच-बीच में छात्र जीवन की खट्टी-मीठी यादें कुछ इसी चुटीले अंदाज में साझा करते रहे। ऐसा लगा कि मानो विश्वविद्यालय में कदम रखते ही वे खुद छात्र बन गए।

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