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इलाहाबाद में स्कूलों की खराब हालत पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी

Tue, 29 Nov 2016 01:39 AM IST
अमर उजाला, इलाहाबाद
अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Tue, 29 Nov 2016 01:39 AM IST
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allahabad school
कोर्ट - फोटो : डेमो फोटो
 इलाहाबाद जिले के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक सरकारी स्कूल की बदहाल स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह राज्य प्रशासन की दयनीय स्थिति को जाहिर करता है। शीर्ष अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को चार हफ्ते में स्कूलों की कमियों को दूर करने के लिए कहा है। वास्तव में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में कक्षा एक से आठवीं तक के सरकारी स्कूलों की स्थिति का जायजा लेने के लिए तीन वकीलों की कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि इलाहाबाद जिले में सरकारी स्कूलों की स्थिति दयनीय है।
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न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कमेटी की रिपोर्ट पर देखने के बाद कहा कि स्कूलों की जो हालत है उसमें न तो कोई शिक्षा दे सकता है और न ही शिक्षा ले सकता है। पीठ ने कहा कि स्कूलों की बिल्डिंग सही नहीं है। आधारभूत सुविधाओं का अभाव है। पीठ ने कहा कि यह सब राज्य में प्रशासन की दयनीय स्थिति बयां करता है। पीठ ने राज्य के मुख्य सचिव को कमेटी द्वारा स्कूलों में गिनाई गई कमियों को चार हफ्ते में दूर करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा कि अगर मुख्य सचिव चाहे तो इस काम के लिए एक कमेटी का गठन हो सकता है। राज्य सरकार के वकील ने पीठ के इस काम को अंजाम देने के लिए छह हफ्ते का वक्त मांगा लेकिन पीठ ने इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि पहले हम यह देखेंगे कि चार हफ्ते में क्या कार्रवाई हुई।
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वकीलों की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कई स्कूलों में बिजली के कनेक्शन नहीं है। जबकि बगल की बिल्डिंगों में बिजली के कनेक्शन है। कमेटी ने जिले के 35 स्कूलों के निरीक्षण में पाया कि शौचालयों की स्थिति खराब है। कई स्कूलों के शौचालय बंद पड़े हैं। छात्रा-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय नहीं हैं। कई स्कूलों में पेयजल की व्यवस्था नहीं है। हैंडपंप के सहारे काम चल रहा है। कभी-कभार हैंडपंप भी खराब रहते हैं।
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अमर उजाला ने प्रकाशित थी स्पेशल रिपोर्ट
इलाहाबाद। सुप्रीमकोर्ट की टीम के जिले के स्कूलों का निरीक्षण करने से पूर्व से ही  ‘अमर उजाला’ की टीम ने प्राइमरी स्कूलों की हकीकत पर विशेष कवरेज की। अमर उजाला ने 24 और 25 नवंबर को पूरा एक पेज प्रकाशित कर प्राथमिक स्कूलों की बदहाली को उजागर किया।  हालांकि बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने टीम के सदस्यों को इस वास्तविकता से दूर रखने का भरसक प्रयास किया और उनको उन्हीं विद्यालयों में ले गए जो अधिकारियों की नजर में एक चाक चौबंद थे, मगर जिले में बेसिक शिक्षा की हालत इतनी बदहाल हो चुकी है कि जो विद्यालय अधिकारियों की नजर आदर्श हैं उनकी खामियों भी टीम के सदस्यों की नजर से बच नहीं सकी। उनकी रिपोर्ट में भी स्कूलों की वैसी ही बदहाल बयां हुई है जैसी कि अमर उजाला की कवरेज में सामने आई।
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