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अचला सप्तमी पर लगी डुबकी, पूजे गए भाष्कर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 14 Feb 2016 11:39 PM IST
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माघ मास अचला सप्तमी रविवार को संगम सहित गंगा के विभिन्न घाटों में डुबकी लगाने को श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। आरोग्यता की कामना से जल में खड़े होकर भगवान भाष्कर को अर्घ्य दिया। मेला क्षेत्र दंडीबाड़ा, आचार्यबाड़ा, काली सड़क, त्रिवेणी मार्ग, महावीर मार्ग स्थित संतों के शिविरों में गुरु पूजन करने को भक्तों, शिष्यों का तांता लगा। कल्पवासियों ने गंगा तट पर पूजा अर्चना के बाद शिविरों में सत्यनारायण कथा सुनी।
आरोग्यता की कामना से अचला सप्तमी का स्नान करने को स्नानार्थियों की भीड़ सुबह से गंगा, यमुना अदृश्य सरस्वती के पावन तट पर पहुंचनी शुरू हुई। हर-हर गंगे, भगवान भाष्कर की जय के घोष से संगम तट गूंजता रहा। स्नान के बाद पंडा बाबा के तख्त पर बैठकर चंदन टीका लगवाया गया। अन्य स्नान पर्वों से इतर वस्त्र दान किए गए।
अचला सप्तमी के मौके पर तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् धर्म संघ की ओर से संगम तट पर सूर्य देव का राज्याभिषेक हुआ। वैदिक आचार्यों के आचार्यत्व में रोली, चावल और संगम जल को तांबे के पात्रों से सूर्य को अर्पित किया गया। धर्म संघ के संयोजक राजेश श्रीवास्तव ने सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता है। इनकी उपासना से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती और शनि और यमराज के भय से मुक्ति मिलती है। राज्याभिषेक कार्यक्रम में शंकर विमान मंडपम के व्यवस्थापक रमणी शास्त्री, मधु चकहा, नटराज सुन्दरम, हरिजगन्नाथ शास्त्री, सुधा मिश्रा, संतोष मिश्रा, आदि उपस्थित रहे।
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संस्कृत हमारी मातृ भाषा होनी चाहिए क्योंकि हमारे सभी संस्कार संस्कृत भाषा के माध्यम से संपन्न होते हैं। यह बात रविवार को श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी द्वारा संचालित श्री महंत विचारानंद महाविद्यालय परिसर में आयोजित अचला सप्तमी समारोह में ज्योतिष एवं द्वारकाशारदापीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहीं। उन्होंने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के प्रयास और श्रीमहंत विचारानंद संस्कृत महाविद्यालय की सराहना की। कहा, विद्यालय के माध्यम से संस्कृत भाषा को बचाने का कार्य किया जा रहा है। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के सानिध्य में कार्यक्रम की शुरूआत सुबह छह बजे ध्वजापूजन से हुई। 51 वैदिक आचार्यों ने रूद्राभिषेक कराया।
निरंजनी अखाड़े के श्रीमहंत रविंद्र पुरी, श्रीमहंत प्रेम गिरि, श्रीमहंत धर्मराज भारती, श्रीमहंत डोंगर गिरि, श्रीमहंत दिनेश गिरि, श्रीमहंत आशीष गिरि, जूना अखाड़े के श्रीमहंत प्रेम गिरि, पंचायती अखाड़ा निर्मल के मुकामी महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री, बड़ा उदासीन अखाड़ा के श्रीमहंत अग्रदास की मौजूदगी में संस्कृत विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं विद्वानों को सम्मानित किया गया। अतिथियों का स्वागत बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक स्वामी आनंद गिरि ने किया। कार्यक्रम के बाद भंडारा शुरू हुआ। जो देर रात तक अनवरत चलता रहा। कार्यक्रम में प्रशासनिक, पुलिस अधिकारियों सहित गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
माघ मेला क्षेत्र संगम तट पर स्थित ऋषि ज्ञान योग प्रसार सेवा समिति की ओर से यज्ञ और भंडारा होगा। सचिव सत्यप्रकाश मिश्र के मुताबिक यज्ञ में गंगा की अविरलता एवं निर्मलीकरण के लिए आहुतियां डाली जाएंगी।
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आरोग्यता की कामना से अचला सप्तमी का स्नान करने को स्नानार्थियों की भीड़ सुबह से गंगा, यमुना अदृश्य सरस्वती के पावन तट पर पहुंचनी शुरू हुई। हर-हर गंगे, भगवान भाष्कर की जय के घोष से संगम तट गूंजता रहा। स्नान के बाद पंडा बाबा के तख्त पर बैठकर चंदन टीका लगवाया गया। अन्य स्नान पर्वों से इतर वस्त्र दान किए गए।
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अचला सप्तमी के मौके पर तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् धर्म संघ की ओर से संगम तट पर सूर्य देव का राज्याभिषेक हुआ। वैदिक आचार्यों के आचार्यत्व में रोली, चावल और संगम जल को तांबे के पात्रों से सूर्य को अर्पित किया गया। धर्म संघ के संयोजक राजेश श्रीवास्तव ने सूर्य देव को प्रत्यक्ष देवता है। इनकी उपासना से सुख समृद्धि की प्राप्ति होती और शनि और यमराज के भय से मुक्ति मिलती है। राज्याभिषेक कार्यक्रम में शंकर विमान मंडपम के व्यवस्थापक रमणी शास्त्री, मधु चकहा, नटराज सुन्दरम, हरिजगन्नाथ शास्त्री, सुधा मिश्रा, संतोष मिश्रा, आदि उपस्थित रहे।
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संस्कृत हमारी मातृ भाषा होनी चाहिए क्योंकि हमारे सभी संस्कार संस्कृत भाषा के माध्यम से संपन्न होते हैं। यह बात रविवार को श्रीमठ बाघम्बरी गद्दी द्वारा संचालित श्री महंत विचारानंद महाविद्यालय परिसर में आयोजित अचला सप्तमी समारोह में ज्योतिष एवं द्वारकाशारदापीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के प्रतिनिधि शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहीं। उन्होंने अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के प्रयास और श्रीमहंत विचारानंद संस्कृत महाविद्यालय की सराहना की। कहा, विद्यालय के माध्यम से संस्कृत भाषा को बचाने का कार्य किया जा रहा है। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के सानिध्य में कार्यक्रम की शुरूआत सुबह छह बजे ध्वजापूजन से हुई। 51 वैदिक आचार्यों ने रूद्राभिषेक कराया।
निरंजनी अखाड़े के श्रीमहंत रविंद्र पुरी, श्रीमहंत प्रेम गिरि, श्रीमहंत धर्मराज भारती, श्रीमहंत डोंगर गिरि, श्रीमहंत दिनेश गिरि, श्रीमहंत आशीष गिरि, जूना अखाड़े के श्रीमहंत प्रेम गिरि, पंचायती अखाड़ा निर्मल के मुकामी महंत देवेंद्र सिंह शास्त्री, बड़ा उदासीन अखाड़ा के श्रीमहंत अग्रदास की मौजूदगी में संस्कृत विद्यालयों के प्रधानाचार्य एवं विद्वानों को सम्मानित किया गया। अतिथियों का स्वागत बड़े हनुमान मंदिर के व्यवस्थापक स्वामी आनंद गिरि ने किया। कार्यक्रम के बाद भंडारा शुरू हुआ। जो देर रात तक अनवरत चलता रहा। कार्यक्रम में प्रशासनिक, पुलिस अधिकारियों सहित गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
माघ मेला क्षेत्र संगम तट पर स्थित ऋषि ज्ञान योग प्रसार सेवा समिति की ओर से यज्ञ और भंडारा होगा। सचिव सत्यप्रकाश मिश्र के मुताबिक यज्ञ में गंगा की अविरलता एवं निर्मलीकरण के लिए आहुतियां डाली जाएंगी।